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मंगलवार, 15 जुलाई, 2008 को 04:33 GMT तक के समाचार
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सरकार को समर्थन नहीं: अकाली दल
प्रकाश सिंह बादल
अकाली दल ने सरकार का समर्थन न करने का फ़ैसला किया है
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के विश्वास मत को लेकर राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हो गईं हैं.

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के घटक अकाली दल ने सभी अटकलों को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वह सदन में विश्वास मत के दौरान यूपीए सरकार के पक्ष में मतदान नहीं करेगा.

पार्टी मंगलवार को आधिकारिक रूप से अपने फ़ैसले की घोषणा करेगी.

वहीं नेशनल कॉन्फ्रेंस की कोर ग्रुप की बैठक के बाद उनके नेता अब्दुल रहीम ने बताया कि चर्चा के बाद अंतिम निर्णय का अधिकार पार्टी प्रमुख उमर अब्दुल्ला के ऊपर छोड़ दिया है.

लोक सभा में नेशनल कॉन्फ्रेंस के दो सदस्य हैं.

प्रेक्षकों का मानना है कि सरकार का भविष्य छोटी पार्टियों के रुख़ पर टिका हुआ है.

मंगलवार को सीपीआई के महासचिव एबी बर्धन ने दिल्ली में ये कहकर हलचल मचा दी थी कि समर्थन हासिल करने के लिए एक एक सांसद को 25-25 करोड़ रुपए की पेशकश की जा रही है.

छोटे दलों की भूमिका

संसद
लोक सभा में विभिन्न पार्टियों की स्थिति

पहले अटकलें लगाई जा रही थीं कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सिख होने के कारण अकाली दल विश्वास मत के दौरान सरकार के पक्ष में मतदान कर सकता है.

लोक सभा में अकाली दल के आठ सांसद हैं.

इधर तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने रविवार को सरकार के ख़िलाफ़ मतदान करने की घोषणा कर दी थी.

हालांकि कांग्रेस के सहयोगी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने अब तक इस विषय में अपने रुख़ को स्पष्ट नहीं किया है.

झामुमो के नेता शिबू सोरेन केंद्र सरकार में मंत्री न बनाए जाने के कारण कांग्रेस नेतृत्व से नाराज़ हैं. झारखंड मुक्ति मोर्चा के लोक सभा में पाँच सांसद हैं.

पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के जनता दल (एस) ने भी इस मामले में अभी तक अपना रुख़ स्पष्ट नहीं किया है. उनकी पार्टी के लोकसभा में तीन सदस्य हैं.

इधर वामपंथियों ने बहुजन समाज पार्टी को अपने पक्ष में खींच कर सरकार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. लोक सभा में बसपा के 17 सदस्य हैं.

मनमोहन सिंह'सरकार स्थिर है'
मनमोहन सिंह ने कहा कि उनकी सरकार की स्थिरता पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
सीताराम येचुरी और प्रवण मुखर्जीप्यार कम तकरार ज़्यादा
चार बरसों का वामदलों और यूपीए सरकार का संबंध तकरार वाला ही रहा है.
स्केचराजनीति हुई तेज़
समर्थन वापसी की घोषणा के बाद राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हो गईं हैं.
एमके नारायणनकरार नहीं समझता वाम
एमके नारायणन ने कहा है कि वामदल परमाणु करार की तकनीकियाँ नहीं समझते.
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