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'महँगाई से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास हो' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमतों में रिकॉर्ड उछाल को देखते हुए सरकार को पेट्रोलियम पदार्थों की क़ीमतें बढ़ानी पड़ी. महँगाई के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचने का यह भी एक बड़ा कारण है. एनडीए सरकार के कार्यकाल में अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमतें कभी भी 25 डालर से अधिक नहीं हुईं थीं. लेकिन वहीं क़ीमत आज लगभग 140 डालर प्रति बैरल तक पहुँच गई है. इसकी उम्मीद नहीं थी. महँगाई केवल भारत में नहीं बल्कि एशिया के ज़्यादातर देशों में बढ़ी है. यहाँ तक की यूरोप और उत्तरी अमरीकी देशों का भी यही हाल है. सरकार ने जब तेल के दाम बढ़ाए तो कांग्रेस शासित राज्यों ने अपने यहाँ पेट्रोलियम पदार्थों पर बिक्री कर और वैट में कमी की और सारा भार अपने ऊपर ले लिया. दूसरी पार्टियों की राज्य सरकारों ने भी तेल पर से बिक्री कर और वैट कम तो किए लेकिन वह काफ़ी नहीं था. मुख्यमंत्रियों की बैठक हो अगर उन्होंने कांग्रेस सरकारों की तरह कमी की होती तो महँगाई लगभग 10 फ़ीसदी तक होती, जो फिर भी अधिक होती. इसलिए हम चाहते हैं कि वित्तमंत्री मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर इसका समाधान तलाशें. सरकार अंतरराष्ट्रीय तेल बाजा़र पर नज़र रखे हुए हैं. कुछ दिन पहले ही सउदी अरब के राजा ने तेल उत्पादक देशों (ओपेक) की बैठक में तेल की बढ़ती क़ीमतों पर चर्चा की है. उन्होंने तेल का उत्पादन बढ़ाने की बात कही है जिसका तेल की क़ीमतों पर असर पड़ेगा. इसके बावजूद केंद्र सरकार ने महँगाई को कम करने के लिए कई क़दम उठाए हैं. स्टील और सीमेंट उत्पादकों से बात करके उनके दाम कम करने की कोशिश की गई. खाद के दाम कम करने की भी कोशिश की गई. केंद्र सरकार ने कुछ चीजों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाकर और कुछ के आयात लगने वाले करों में कमी लाकर महँगाई रोकने का प्रयास किया. एनडीए भी ज़िम्मेदार इनके अलावा सरकार ने सीआरआर बढ़ाकर बाज़ार से लगभग 17 हज़ार करोड़ रुपए वापस ले लिया ताकि खुले बाज़ार में नकदी के प्रसार पर अंकुश लगाया जाए. किसी भी चीज का वितरण राज्य सरकार का काम है, अवैध भंडारण और कालाबाज़ारी रोकना और कार्रवाई करना केंद्र सरकार की नहीं बल्कि राज्य सरकारों की ज़िम्मेदारी है. एनडीए सरकार में योजनावद्ध तरीके से जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) को समाप्त करने का काम किया गया. जिसका प्रभाव आज महँगाई पर पड़ रहा है. यूपीए सरकार में अभी चार महीने पहले तक महँगाई लगभग पाँच फ़ीसदी थी, जो आज बढ़कर 11.05 फ़ीसदी तक पहुँच गई है. इस तरह महँगाई बढ़ने से यूपीए सरकार चिंतित है. कांग्रेस पार्टी ने माँग की है कि वित्तमंत्री देश के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाकर महँगाई रोकने का सामूहिक प्रयास करें.
इसके तहत राज्य और केंद्र सरकारें अपनी-अपनी ज़िम्मेदारी का निभाएँ. जहाँ तक लोगों को महँगाई का कारण बताने और श्वेत पत्र जारी करने संबंधी विपक्ष की माँग है, उसमें कोई हर्ज़ नहीं है. हम जानते हैं कि लगभग 72 फ़ीसदी पेट्रोलियम पदार्थ, 70 फ़ीसदी खाद्य तेल और 50 फ़ीसदी दालें आयात की जाती है. इसलिए यह तय है कि महँगाई इन्हीं कारणों से बढ़ी है. कांग्रेस अमरीका के साथ परमाणु समझौता करने की बात कह रही है. इससे हमें ऊर्जा सस्ते दर पर मिलेगी. इससे भी कुछ हद तक महँगाई पर नियंत्रण पाया जा सकता है. (बीबीसी संवाददाता आलोक कुमार के साथ बातचीत पर आधारित) |
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