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भारत में महँगाई रिकॉर्ड स्तर पर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में केंद्र सरकार के तमाम प्रयासों के बाद भी महँगाई की दर 42 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुँच गई है. सरकार की ओर से 19 अप्रैल को ख़त्म हफ़्ते में थोक मूल्य सूचकांक 7.57 प्रतिशत आँका गया है जो 12 अप्रैल को ख़त्म हुए सप्ताह में 7.33 प्रतिशत पर था. पिछले साल इसी सप्ताह मुद्रास्फीति की दर 6.07 प्रतिशत आँकी गई थी. इससे पहले मुद्रास्फीति की दर हाल में पहली बार 7.14 प्रतिशत तक नीचे उतरी थी लेकिन सिर्फ़ एक हफ़्ते बाद ही उसमें बढ़ोत्तरी शुरू हो गई. आठ नवंबर 2004 के बाद पहली बार महँगाई की दर इतनी ऊपर तक गई है. उस समय मुद्रास्फीति की दर 7.68 प्रतिशत आँकी गई थी. समाचार एजेंसियों के अनुसार उधर भारत के वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है, "महँगाई पर काबू पाया जाएगा. मेरी लोगों से यही अपील है कि वे सब्र रखें और हम पर विश्वास रखें. महँगाई बढ़ने का कारण अंतरराष्ट्रीय बाज़ार की गतिविधियाँ हैं." खाद्य सामग्री के सूचकाँक वहीं राहत है तो इस बात की कि इस सप्ताह खाद्य सामग्रियों, खाद्य तेल और सीमेंट की क़ीमतों के सूचकाँकों में कोई बदलाव नहीं आया है. दाल की क़ीमतों में कमी भी आई है लेकिन लौह-अयस्क और कपड़े के कच्चे माल की क़ीमतों में एक प्रतिशत से ज़्यादा की वृद्धि दर्ज की गई है. कुल मिलाकर पिछले सप्ताह की तुलना में 19 अप्रैल को समाप्त हफ़्ते में थोक मूल्य सूचकांक में 0.3 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी आँकी गई है. रिज़र्व बैंक के प्रयास बढ़ती महँगाई पर अंकुश लगाने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने इस सप्ताह की शुरुआत में नगद जमा अनुपात (सीआरआर) में 0.25 फ़ीसदी की वृद्धि की थी.
बैंक ने वित्तीय वर्ष 2008-09 के लिए घोषित नई मौद्रिक नीति में यह वृद्धि की थी. आरबीआई के गवर्नर वाईवी रेड्डी ने उम्मीद जताई थी कि देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की दर 8 से 8.5 प्रतिशत के बीच और मुद्रास्फ़ीति की दर चार से पाँच प्रतिशत के बीच रहेगी. रिज़र्व बैंक ने इससे पहले 17 अप्रैल को भी सीआरआर में 0.50 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की थी. इसका मतलब है कि इसी महीने में सीआरआर 0.75 प्रतिशत बढ़ गई है. सरकार की घेराबंदी बढ़ती महँगाई को लेकर सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामदलों ने कुछ दिन पहले इस मसले पर सरकार को अपने समर्थन की समीक्षा की चेतावनी भी दी थी.
मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता महँगाई को रोक पाने में केंद्र सरकार पर नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए शुक्रवार को देशव्यापी हड़ताल कर रहे हैं. पिछले महीने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने महँगाई के मुद्दे पर विपक्षी दलों की तीख़ी आलोचना से यह कहकर सरकार का बचाव किया था कि इसे राजनीति का मसला न बनाया जाए. उन्होंने कहा था, "अनाज का अभाव है और इस तरह का प्रचार करने से सिर्फ़ जमाखोरों को फ़ायदा होगा." प्रधानमंत्री ने कहा था, "इस बार फ़सल अच्छी हुई है. दरअसल वर्ष 1996 के बाद कृषि को दरकिनार किया गया लेकिन यूपीए सरकार ने पिछले चार वर्षों में किसानों और कृषि के लिए कई क़दम उठाए हैं. इसके परिणाम भी सामने आ रहे हैं." उन्होंने कहा था कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली और किसानों से अनाज की ख़रीदारी की व्यवस्था को मज़बूत बनाया जाएगा. |
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