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महँगाई पर क़ाबू पाने की कोशिश
भारतीय रिज़र्व बैंक
बैंक ने ध्यान मुद्रास्फ़ीति पर केंद्रित किया है जो 7.33 तक जा पहुँची है
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने लगातार बढ़ रही महँगाई को कम करने की दिशा में क़दम उठाते हुए कैश रिज़र्व रेश्यो (सीआरआर) यानी बैंकों द्वारा आरबीआई में जमा किए जाने वाली नकद राशि की दर को एक चौथाई फ़ीसदी बढ़ा दिया है.

यह घोषणाएँ वर्ष 2008-09 की नई मौद्रिक नीति के तहत हुई हैं. महत्वपूर्ण है कि बैंक ने ध्यान मुद्रास्फ़ीति पर केंद्रित किया है जो 7.33 तक जा पहुँची है.

आरबीआई ने सीआरआर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है जो आठ प्रतिशत से 8.25 प्रतिशत जा पहुँचा है. ग़ौरतलब है कि 17 अप्रैल को ही सीआरआर में 0.5 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी.

सीआरआर में वृद्धि का मतलब है कि बैंकों को अब 0.25 प्रतिशत अधिक नकद राशि रिज़र्व बैंक के पास रखनी होगी.

आम तौर पर जब रिज़र्व बैंक कैश रिज़र्व रेश्यो बढ़ाता है तो विभिन्न बैंक कर्ज़ की दरें बढ़ा देते हैं जिससे लोग कर्ज़ लेने से कतराते हैं.

आरबीआई गवर्नर की उम्मीद

उधर आरबीआई के गवर्नर वाईवी रेड्डी ने उम्मीद जताई है कि सकल घरेलू उत्पाद 8 प्रतिशत से 8.5 प्रतिशत के बीच रहेगी और मुद्रास्फ़ीति की दर चार से पाँच प्रतिशत के बीच रहेगी.

हालांकि आरबीआई ने बैंक रेट, रेपो रेट या रिवर्स रेपो रेट में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया है लेकिन सीआरआर में वृद्धि से बैंक के ब्याज दरों पर असर पड़ेगा.

विभिन्न वाणिज्यिक बैंक अपना पैसा रिज़र्व बैंक के ख़जाने में जमा करते हैं. इस पर रिज़र्व बैंक जिस दर से ब्याज़ देता है उसे रेपो दर कहते हैं.

जबकि रिवर्स रेपो दर ठीक इसके उलट होती है. जब रिज़र्व बैंक अन्य बैंकों को कम अवधि के लिए उधार देता है तो उस पर जिस दर से ब्याज लिया जाता है उसे रिवर्स रेपो दर कहते हैं.

इस तरह से 2008-09 की नई मौद्रिक नीति से संबंधित कुछ प्रमुक बिंदु इस तरह हैं:

  • सीआरआर में 0.25 प्रतिशत वृद्धि
  • जीडीपी 8-8.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद
  • रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट में बदलाव नहीं
  • मुद्रास्फ़ीति की दर है 7.33 प्रतिशत

उधर देश के प्रमुख उद्यमियों को संबोधित करते हुए मंगलवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि बढ़ती हुए क़ीमतों को रोकने के लिए जो भी क़दम उठाए जाएँगे उसका असर महँगाई रोकने पर पड़ेगा.

उन्होंने खाद्य पदार्थों और ईंधन की बढ़ती क़ीमतों पर ध्यान देने की दुनिया के अन्य देशों से भी अपील की थी.

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