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महँगाई रोकने के उपायों की घोषणा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में बढ़ती महँगाई पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार ने कई उपायों की घोषणा की है. ग़ैर बासमती चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और कच्चे खाद्य तेलों पर आयात शुल्क बिल्कुल ख़त्म कर दिया गया है. ये फ़ैसला केंद्रीय कैबिनेट की तीन घंटे तक चली बैठक में लिया गया. बैठक के बाद वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने पत्रकारों को बताया कि बासमती के अलावा अब किसी किस्म के चावल के निर्यात की अनुमति नहीं होगी. बासमती चावल का निर्यात मूल्य भी बढ़ा कर 1200 डॉलर प्रति टन कर दिया गया है. दलहन के निर्यात पर लगा प्रतिबंध जो सोमवार को ख़त्म हो रहा था, उसे एक साल के लिए और बढ़ा दिया गया है. रिफ़ाइंड तेलों पर आयात शुल्क घटा कर साढ़े सात फ़ीसदी किया गया है.
इसके अलावा बटर और घी पर आयात शुल्क 40 फ़ीसदी से घटा कर 30 फ़ीसदी किया गया है और मक्के के आयात शुल्क में भी कमी गई है. वित्त मंत्री का कहना था, "महँगाई रोकने में राज्य सरकारों की भी ज़िम्मेदारी बनती है. उन्हें अपने-अपने राज्यों में ज़रूरी सामानों का भंडार तय करने का अधिकार दिया गया है." उन्होंने बताया कि बैठक में इस्पात और लोहे की बढ़ती कीमतों पर भी चर्चा हुई लेकिन संबंधित मंत्री के उपस्थित नहीं होने के कारण कोई फ़ैसला नहीं लिया गया है. इसके बावजूद उन्होंने स्टील कंपनियों से कीमतों में वृद्धि की घोषणा से परहेज करने को कहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें महंगाई से चिंतित सरकार ने बैठक बुलाई31 मार्च, 2008 | कारोबार महँगाई दस माह के उच्चतम स्तर पर08 मार्च, 2008 | कारोबार महँगाई ने सिर उठाना शुरु किया23 फ़रवरी, 2008 | कारोबार महँगाई दर चार फ़ीसदी के पार08 फ़रवरी, 2008 | कारोबार 'महँगाई पर क़ाबू रखना ज़्यादा महत्वपूर्ण'26 जनवरी, 2008 | कारोबार महँगाई दर 16 माह के न्यूनतम स्तर पर08 सितंबर, 2007 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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