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महँगाई ने सिर उठाना शुरु किया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के आँकड़ों के मुताबिक रोज़मर्रा की ज़रूरतों के सामान महँगे होने के कारण महँगाई दर पिछले छह माह में सबसे ज़्यादा हो गई है. नौ फ़रवरी को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान मुद्रास्फ़ीति यानी महँगाई दर 4.35 फ़ीसदी आँकी गई. इससे पिछले सप्ताह यह आँकड़ा चार फ़ीसदी से थोड़ा ज़्यादा था. इसमें वृद्धि दाल, आटा और सब्जियों की कीमतें बढ़ने के कारण हुई है. ये वैसे सामान हैं जिनका उपयोग आम आदमी सबसे ज़्यादा करता है. थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर जारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले वर्ष इसी अवधि में मुद्रास्फ़ीति दर छह फ़ीसदी से भी ज़्यादा थी. जानकारों का कहना है कि चालू वित्त वर्ष के अंतिम दो महीनों में मुद्रास्फीति की दर बढ़ने की परंपरा रही है. आईसीआईसीआई सेक्युरिटीज के अर्थशास्त्री ए पराना कहते हैं, "पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने के कारण अगले हफ़्तों में महँगाई और बढ़ सकती है और यह पाँच फ़ीसदी के आँकड़े को छू सकता है." रिजर्व बैंक के गवर्नर वाईवी रेड्डी ने पिछले दिनों मौद्रिक नीति की तिमाही समीक्षा करते हुए कहा था कि विश्व बाज़ार में कच्चे तेल के साथ-साथ खाद्यान्न की कीमतों में अस्थिरता को देखते हुए फिलहाल मुद्रास्फ़ीति को लेकर नरम रवैया नहीं अपनाया जा सकता. हालाँकि यह अभी भी रिजर्व बैंक के लक्ष्य से अधिक नहीं है. भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2007-08 के दौरान महँगाई दर पाँच से साढ़े पाँच फ़ीसदी के बीच रखने का लक्ष्य निर्धारित किया था. | इससे जुड़ी ख़बरें चीन में मुद्रास्फीति रिकॉर्ड स्तर पर19 फ़रवरी, 2008 | कारोबार 'महँगाई पर क़ाबू रखना ज़्यादा महत्वपूर्ण'26 जनवरी, 2008 | कारोबार महँगाई दर 16 माह के न्यूनतम स्तर पर08 सितंबर, 2007 | कारोबार 'महँगाई हो सकती है हार की वजह'06 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस महँगाई के कारण घट सकता है सीमा शुल्क 24 फ़रवरी, 2007 | कारोबार महँगाई पर निगरानी के लिए विशेष सेल22 फ़रवरी, 2007 | कारोबार 'महँगाई के लिए सरकार ज़िम्मेदार'09 फ़रवरी, 2007 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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