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महँगाई दस माह के उच्चतम स्तर पर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
महँगाई को काबू में रखने की सरकारी प्राथमिकता के बावजूद मुद्रास्फ़ीति दर लगातार बढ़ती हुई पाँच फ़ीसदी के पार पहुँच गई है. यह दस माह में सबसे ज़्यादा है. महँगाई दर का यह आँकड़ा थोक मूल्यों पर आधारित है. चिंताजनक बात ये है कि इस बार भी महँगाई बढ़ाने में फलों, सब्जियों, दूध और अनाज की ऊँची क़ीमतों का मुख्य योगदान रहा. आम तौर पर किसी भी सामान का थोक मूल्य ख़ुदरा क़ीमत से कम होता है. इसलिए इन सामानों के खुदरा भाव और ज़्यादा बढ़े हैं. ख़ास कर बजट पेश होने के बाद खाद्य तेलों के भाव में तेज़ वृद्धि हुई है. रिफाइंड सरसो तेल और सूरजमुखी के तेल के अलग-अलग ब्रांडों में प्रति किलो 15 रूपए तक की बढ़ोतरी हुई है. शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक 23 फरवरी को समाप्त हुए सप्ताह में महँगाई दर 5.02 फ़ीसदी हो गई. इसके पिछले सप्ताह की दर 4.89 फ़ीसदी थी. मुद्रास्फ़ीति बढ़ने के पीछे पेट्रोलियम पदार्थों की ऊंची कीमतों का भी असर है. सरकार ने 14 फ़रवरी को पेट्रोल के दाम दो रुपए और डीज़ल के दाम एक रुपए प्रति लीटर बढ़ा दिए थे. जानकारों का कहना है कि महंगाई दर अभी और बढ़ सकती है क्योंकि कच्चे तेल के दाम 106 डॉलर प्रति बैरल की ऊंचाई को छू चुके हैं और इसके और ऊपर जाने की संभावना है. | इससे जुड़ी ख़बरें महँगाई ने सिर उठाना शुरु किया23 फ़रवरी, 2008 | कारोबार चीन में मुद्रास्फीति रिकॉर्ड स्तर पर19 फ़रवरी, 2008 | कारोबार 'महँगाई पर क़ाबू रखना ज़्यादा महत्वपूर्ण'26 जनवरी, 2008 | कारोबार महँगाई दर 16 माह के न्यूनतम स्तर पर08 सितंबर, 2007 | कारोबार 'महँगाई हो सकती है हार की वजह'06 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस महँगाई के कारण घट सकता है सीमा शुल्क 24 फ़रवरी, 2007 | कारोबार महँगाई पर निगरानी के लिए विशेष सेल22 फ़रवरी, 2007 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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