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'दुनिया में खाद्यान्न संकट बना रहेगा' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विश्व बैंक ने भूख की वजह से एक नए संघर्ष के लिए तैयार रहने को कहा है. विश्व बैंक के अध्यक्ष रॉबर्ट ज़ौलिक ने कहा कि अगले कुछ वर्षों में खाद्य पदार्थों की कीमतों के बढ़ते रहने की आशंका है. इसे कुछ किसानों के लिए एक अच्छी ख़बर कहा जा सकता है लेकिन दुनिया के कमज़ोर और ग़रीब लोग इस संकट के तले पिस जाएंगे. विश्व बैंक के एक अनुमान के मुताबिक़ दुनिया में 33 ऐसे देश हैं जहाँ खाने और तेल के बढ़ते दामों की वजह से सामाजिक आंदोलन छिड़ सकता है. रॉबर्ट ज़ौलिक ने कहा कि इस वक़्त हमारी पहली प्राथमिकता सबसे अधिक ज़रूरतमंद लोगों की मदद करना होनी चाहिए. उनका कहना था कि इसलिए संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम को 50 करोड़ डॉलर की सख्त ज़रुरत है. इस राहत के ना मिलने पर दुनिया में और भी अधिक लोग भुखमरी का शिकार हो जाएंगे. अफ़्रीका को ऋण बढ़ाया वहीं बुधवार को विश्व खाद्य कार्यक्रम की अध्यक्ष जोसेट शिरन ने बीबीसी को बताया कि लोगों के लिए खाना ख़रीदना मुश्किल होता जा रहा है. जोसेट शिरन का कहना था,'' हम भुखमरी का एक नया चेहरा देख रहे हैं. अनाज उपलब्ध है लेकिन फिर भी लोग उसे ख़रीद नहीं पा रहे हैं. हम सचमुच ऐसे उपाय ढूंढना चाहते हैं ताकि अनाज की आपूर्ति बढ़ जाए और कीमतें कम हो जाए ताकि लोग उसे ख़रीद सकें.'' उधर ज़ौलिक ने कहा कि विश्व बैंक अफ़्रीका में कृषि संबंधी ऋण को लगभग दोगुना कर 80 करोड़ डॉलर तक बढ़ा देगा. उनका कहना था कि इस ऋण से एक नई हरित क्रांति लाने में मदद मिलेगी ताकि कृषि और उससे जुड़े संसाधनों में सुधार लाया जा सके. उन्होंने कहा कि इससे छोटे किसानों की ग़रीबी को भी दूर किया जा सकता है. विश्व बैंक के अध्यक्ष के अनुसार विश्व व्यापार संगठन को भी व्यापार से जुड़े प्रतिबंधों को हटाने की ज़रुरत है ताकि विकासशील देशों में किसानों को उत्पादकता बढा़ने में मदद मिल सके. |
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