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लाखों बच्चे भूखे सोते हैं: यूनिसेफ़ | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया के विकासशील देशों में पांच साल से कम के 25 प्रतिशत से अधिक बच्चों का वजन सामान्य से कम है और ये बच्चे जानलेवा बीमारियों के शिकार हो सकते हैं. इनमें से आधे बच्चे दक्षिण एशिया में रहते हैं. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष(यूनिसेफ़) की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर से भूख और ग़रीबी हटाने के सह्स्राब्दि लक्ष्यों से अभी संयुक्त राष्ट्र बहुत दूर है क्योंकि कई देशों में बच्चों को ठीक भोजन नहीं मिल रहा है. बच्चों पर यह रिपोर्ट लिखने वालों का कहना है कि बच्चों को बचाने में दुनिया विफल रही है. यूनिसेफ़ की रिपोर्ट कहती है कि पांच साल से कम के 25 प्रतिशत बच्चों के पास खाने को पर्याप्त भोजन नहीं है और दुखद तथ्य ये है कि ऐसे बच्चों में से 50 प्रतिशत बच्चे सिर्फ तीन देशों में रहते है. भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश. रिपोर्ट के अनुसार अगर ग़रीबी हटाने के सहस्राब्दि लक्ष्यों को पूरा होना है तो ऐसे बच्चों की संख्या अब तक आधी हो जानी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ. यूनिसेफ़ के अनुसार इस समस्या का एक समाधान अधिक से अधिक बच्चों को विटामिन ए की गोलियां पहुंचाना हो सकता है जो कि बच्चों में आयरन औऱ आयोडीन की कमी को पूरा करता है. यूनिसेफ़ के अनुसार दुनिया भर में डेढ़ करोड़ से अधिक बच्चे भूखे सोते हैं जबकि कुछ धनी देशों के बच्चे मोटापे जैसी बीमारी से परेशान हैं. भारत और चीन यूनिसेफ़ की रिपोर्ट में भारत और चीन की तुलना की गई है जिसके अनुसार बच्चों को पर्याप्त भोजन मुहैया कराने की दिशा में पिछले 15 वर्षों में चीन में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की है जबकि भारत का प्रदर्शन अत्यंत ख़राब कहा जा सकता है. रिपोर्ट के अनुसार भारत में पांच साल से कम के आधे से अधिक बच्चों को पर्याप्त भोजन नहीं मिलता है. रिपोर्ट से जुड़े यूनिसेफ़ अधिकारी रेनर ग्रॉस कहते हैं भारत धीरे धीरे इस क्षेत्र में काम कर रहा है लेकिन स्थितियां जल्दी ठीक नहीं हुई तो बच्चों की मौतें हो सकती हैं. रिपोर्ट में चीन की तारीफ की गई है और कहा गया है कि चीन में नीतियों को लागू करने में काफी सफलता मिली है. रिपोर्ट के अनुसार चीन में एक बच्चे की नीति के कारण भी उसे सभी बच्चों को अच्छा भोजन मुहैया करा पाने में मदद मिली है जबकि भारत में ऐसा नहीं है. भारत में ग़रीबी दूर करने की दिशा में काम कर रहे ज़्यां द्रेज़ कहते हैं कि भारत में मानव संसाधन के विकास की ओर कभी ध्यान नहीं दिया जाता है जिसके चलते लोग अनपढ़ हैं उनका स्वास्थ्य ख़राब है और बच्चे भूखे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें ग़रीबी के ख़िलाफ़ सबसे बड़ा अभियान28 जनवरी, 2005 | पहला पन्ना ग़रीबी कम करने का लक्ष्य पहुँच से दूर13 अप्रैल, 2005 | पहला पन्ना 35 करोड़ बच्चे बेहद ग़रीब22 अगस्त, 2005 | पहला पन्ना 'विकास के फ़ायदे ग़रीबों तक नहीं'07 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस ग़रीबी, विकास और संयुक्त राष्ट्र13 सितंबर, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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