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दुनियाभर में बढ़ते खाद्य संकट पर चिंता | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तेज़ी से तकनीक और औद्योगिक विकास की राह पर चल रही दुनिया के आगे जो सबसे अहम चुनौतियाँ हैं, उनमें खाद्यान्न संकट भी एक अहम सवाल बनकर सामने खड़ा है. इसी संकट पर चिंता व्यक्त करते हुए संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम की निदेशक ने कहा है कि जो लोग अपने भोजन के लिए इस कार्यक्रम पर आधारित हैं, उनके लिए खाद्यान्न आपूर्ति को जारी रखने के लिए अतिरिक्त मदद की ज़रूरत है. विश्व खाद्य कार्यक्रम की निदेशक ने कहा कि दानदाताओं को आगे आना चाहिए और अधिक सहयोग देना चाहिए ताकि लोगों की आवश्यकता भर आपूर्ति तय की जा सके. संस्था की ओर से ख़ासतौर पर अफ़ग़ानिस्तान जैसे देशों का भी जिक्र किया गया है जहाँ एक बड़ी संख्या में लोग अपने लिए अभी भी भोजन जुटा पाने में असमर्थ हैं और वहाँ से खाद्यान्न आपूर्ति की मांग और बढ़ती जा रही है. ग़ौरतलब है कि पिछले वर्ष खाद्यान्न के दामों में बढ़ती मांग और अन्य कारणों के चलते 40 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हुई है. रोटी का सवाल इसी माह की शुरुआत में संयुक्त राष्ट्र खाद्यान्न एवं कृषि संगठन ने कहा था कि गेंहू और मक्के जैसे अनाजों के बढ़ते दाम वैश्विक चिंता का विषय बनते जा रहे हैं. संगठन ने बताया था कि ग़रीब देशों में इस वर्ष खाद्यान्न आयात एक तिहाई तक बढ़ सकता है. सबसे ज़्यादा आयात बढ़ने के संकेत अफ्रीका से मिल रहे हैं जहाँ 49 प्रतिशत तक आयात बढ़ सकता है. संगठन ने कहा है कि इस स्थिति से उबरने के लिए ग़रीब देशों के किसानों को बीज और खाद उपलब्ध कराने पर ज़ोर दिया जाना चाहिए ताकि उत्पादन में बढ़ोत्तरी हो सके. बीबीसी को दिए गए साक्षात्कार में विश्व खाद्य कार्यक्रम की निदेशक जोसेट शीरन ने कहा कि अगर जल्द ही संगठन को दानदाताओं से सहयोग नहीं मिलता है तो उस स्थिति में विश्व खाद्य कार्यक्रम अपनी मदद को रोके या उसमें कटौती करे, इस बारे में विशेषज्ञों से सुझाव लिए जा रहे हैं. उन्होंने चेताया कि यहाँ तक कि कुछ देशों में तो मध्यमवर्गीय परिवारों की पहुँच से भी भोजन बाहर होता नज़र आ रहा है और भोजन जुटाने के लिए इन लोगों को शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी ज़रूरतों से समझौता करना पड़ रहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें ...ताकि उजागर न हो सके कालाहांडी का सच09 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'ग़रीबी आकलन की पद्धति में बदलाव हो'23 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस ग़रीबी शांति के लिए ख़तरा: नोबेल विजेता11 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस भूखे को मिलेगा मुफ़्त खाना26 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस लाखों बच्चे भूखे सोते हैं: यूनिसेफ़02 मई, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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