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ग़रीबी शांति के लिए ख़तरा: नोबेल विजेता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नोबेल शांति पुरस्कार पाने वाले बांग्लादेश के अर्थशास्त्री प्रोफ़ेसर मोहम्मद यूनुस का कहना है कि 'ग़रीबी शांति के लिए ख़तरा' है. प्रोफ़ेसर मोहम्मद यूनुस और उनके ग्रामीण बैंक को नॉर्वे की राजधानी ऑस्लो में वर्ष 2006 का नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया है. प्रोफ़ेसर यूनुस ग्रामीण बैंक के संस्थापक हैं जो ग़रीब लोगों को स्वरोजगार के लिए सामूहिक रूप से कर्ज़ देता है. उनका कहना था कि उन्हें मिले साढ़े 13 लाख डॉलर से वे ग़रीब लोगों को व्यवसाय स्थापित करने में मदद के और नए-नए तरीक़े खोजेंगे. नोबेल पुरस्कार लेते समय उनका कहना था, "ग़रीबी शांति के लिए ख़तरा है. अत्यंत ग़रीबी से पैदा हुई निराशा, दुश्मनी और गुस्सा विश्व के किसी भी समाज में शांति कायम नहीं रख सकते." उनका कहना था कि आतंकवाद की कड़े शब्दों में निंदा होनी चाहिए लेकिन उसके मूल कारणों का निवारण होना चाहिए. प्रोफ़ेसर मोहम्मद यूनुस का कहना था कि वे मानते हैं साधनों को ग़रीब लोगों की ज़िंदगी बेहतर बनाने में इस्तेमाल करना उन्हें हथियारों पर ख़र्च करने के मुकाबले में बेहतर विकल्प है. उन्होंने 1976 में ग्रामीण बैंक की स्थापना की थी और तब उन्होंने जेब से मात्र 27 डॉलर लगाए थे. तीस साल के बाद उनके बैंक से 66 लाख लोगों ने कर्ज़ लिया है जिनमें से 97 प्रतिशत महिलाएँ हैं. पूरे बांग्लादेश में ग्रामीण बैंक की 2185 शाखाएँ हैं और इसकी पहुँच 69 हज़ार 140 गाँवों तक है. | इससे जुड़ी ख़बरें साहित्य का नोबेल पामुक को12 अक्तूबर, 2006 | पत्रिका बुश-ब्लेयर पर बरसे हैरल्ड पिंटर08 दिसंबर, 2005 | पहला पन्ना नाटककार हैरल्ड पिंटर को नोबेल सम्मान13 अक्तूबर, 2005 | पत्रिका बारादेईः एक सधे हुए अरब कूटनयिक07 अक्तूबर, 2005 | पहला पन्ना नोबेल शांति पुरस्कार बारादेई को07 अक्तूबर, 2005 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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