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बचत को भी महँगाई मार गई | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इस वर्ष की शुरुआत से लगातार बढ़ रही महँगाई का असर जहाँ आम आदमी के बजट पर पड़ा है, वहीं उन्हें बचत योजनाओं से भी मुनाफ़ा नहीं हो रहा है. पिछले वर्ष के आख़िर में महँगाई की दर पाँच फ़ीसदी से नीचे थी जो अब बढ़ कर 8.75 फ़ीसदी हो चुकी है. पेट्रोलियम पदार्थों की क़ीमतें बढ़ने से इसका आगे बढ़ना तय है. दूसरी ओर एक आम आदमी जो किसी तरह अपनी कमाई का एक हिस्सा भविष्य के लिए बैंकों में जमा करता है, उसे वहाँ से मिलने वाला रिटर्न महँगाई दर के मुक़ाबले फीका पड़ गया है. बैंकों में बचत खाता पर सिर्फ़ पौने चार फ़ीसदी की दर से ब्याज मिलता है. इसमें पिछले कई वर्षों से कोई ख़ास वृद्धि नहीं हुई है.
महँगाई थामने के लिए रिजर्व बैंक ब्याज़ दर बढ़ाने की नीति पर कायम है ताकि बाज़ार में नकदी कम हो और माँग में कमी आए. इससे वाणिज्यिक बैंक घर, कार और निजी कर्ज़ों पर ब्याज़ दर बढ़ा रहे हैं. जानकारों का कहना है कि बैंकों को अपने पास पर्याप्त नकदी बनाए रखने के लिए ज़मा पर भी ब्याज़ दर बढ़ाने होंगे. म्युचुअल फंडों में जोख़िम वहीं शेयर बाज़ार के धाराशायी होने से जहाँ शेयरों में निवेश जोख़िम भरा हो गया है, वहीं म्युचुअल फंडों की ओर पिछले कुछ वर्षों में आकर्षण थम गया है.
इसका कारण ये है कि म्युचुअल फंडों की वैसी योजनाएँ ही लोकप्रिय हुईं जो निवेशक का पैसा परोक्ष रूप से शेयर बाज़ार में लगाते रहे हैं. यूको बैंक के पूर्व निदेशक सत्यप्रकाश मंगल कहते हैं, "वर्ष 2001-02 के बाद बाज़ार में आई तेज़ी का लाभ म्युचुअल फंड निवेशकों को मिला लेकिन अब वो तेज़ी गायब हो चुकी है". वो कहते हैं, "पिछले साल तक रिलायंस, बिड़ला सनलाइफ़ की कुछ म्युचुअल फंड योजनाओं ने 80 फ़ीसदी तक का रिटर्न दिया था. लेकन अब हालात बदल चुके हैं. पिछले छह माह के दौरान शेयर बाज़ार से संबद्ध अधिकतर म्युचुअल फंडों के मूल्य (एनएवी) में गिरावट आई है."
वो गुजरा ज़माना विश्लेषकों की राय में अब ऐसी स्थिति बन रही है जब लोगों को गुजरा ज़माना याद आ रहा है. मतलब जो अपने निवेश सुरक्षित रखना चाहते हैं या जिन्हें अपनी पसीने की कमाई पर निश्चित रिटर्न चाहिए वो फिर से सावधि जमा (फिक्स्ड डिपोजिट) और डाकघरों की मासिक आय योजनाओं की ओर रूख़ करेंगे. हालाँकि बैंकों में बचत खाता पर ब्याज़ दर बढ़ने की गुंजाइश नहीं है, लेकिन सावधि जमाओं पर ब्याज़ दर बढ़ेंगे. विजया बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ़ कॉमर्स, यूनाइटेड बैंक ऑफ़ इंडिया और यस बैंक ने इसकी शुरुआत कर दी है.
भारतीय स्टेट बैंक के विश्लेषक अजित डाँगे कहते हैं, "बचत खाते पर और रिटर्न की गुंजाइश नहीं है. जब बैंकों को कर्ज़ देने के लिए हतोत्साहित किया जा रहा है तो वो ज़मा बढ़ा कर करेंगे क्या?" उनका कहना है, "हाँ लंबी अवधि का सावधि योजनाओं पर रिटर्न बेहतर हो सकता है. कम से कम महँगाई की दर से ज़्यादा रखना होगा, नहीं तो कोई क्यों अपना पैसा बैंकों में रखे." अजित डाँगे कहते हैं कि आने वाले दिनों में अमरीकी अर्थव्यवस्था और बुरे दौर से गुजर सकती है और ऐसे में डॉलर की क़ीमत और घटेगी. उनके मुताबिक अगर ऐसी स्थिति आती है तो लोग सोने में फिर से निवेश करने लगेंगे. अभी सोने का भाव लगभग 12 हज़ार 500 प्रति दस ग्राम चल रहा है और डाँगे के मुताबिक डॉलर कमज़ोर होने पर इसकी क़ीमत और बढ़ सकती है. |
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