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'खाद्य महँगाई की ज़्यादा मार बच्चों पर' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र ने आगाह किया है कि खाद्य वस्तुओं के बढ़ते दामों की वजह से भारत में अतिरिक्त 18 लाख बच्चे कुपोषण का शिकार हो सकते हैं. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष, युनीसेफ़, के दक्षिण एशिया निदेशक डैनियल टूल ने कहा कि खाने-पीने की चीज़ों के बढ़ते दामों की वजह से दक्षिण एशिया के बच्चों के लिए बड़ा संकट उत्पन्न हो गया है. उनका कहना था कि दक्षिण एशिया में रहने वाले सबसे ग़रीब लोग अब भी खाने-पीने की चीज़ों पर बहुत कम ख़र्च कर रहे हैं, जिससे वो कम खाना खा रहे हैं और उन्हें अच्छी ख़ुराक नहीं मिल पा रही है. कुछ इलाक़ों में लोग दिन में सिर्फ़ एक बार ही खाना खा पाते हैं. भारत की बाल संख्या का क़रीब आधा हिस्सा कुपोषण का शिकार है जिससे उनके विकास पर असर पड़ रहा है. एक अनुमान के मुताबिक पाँच वर्ष से कम उम्र के क़रीब पाँच करोड़ बच्चे कुपोषण से ग्रसित हैं. संयुक्त राष्ट्र संघ के मुताबिक भारत में 30 करोड़ लोग एक डॉलर से कम की दैनिक आय में अपना गुज़ारा करते हैं. बुरा असर डैनियल टूल का कहना है कि गेहूँ और चावल के दामों के क़रीब दो गुना बढ़ जाने से सबसे ग़रीब तबके पर बहुत बुरा असर पड़ा है. जो लोग अब ही ग़रीबी से संघर्ष कर रहे हैं, उनके लिए जीना और दूभर हो जाएगा. डैनियल टूल कहते हैं, "बढ़ते दामों की वजह से राजनीतिक अस्थिरता भी पैदा हो सकती है, जो इस क्षेत्र के लिए अच्छी ख़बर नहीं होगी." उन्होंने कहा कि सरकार को इस संकट से निपटने के लिए ठोस क़दम उठाने चाहिए, "सरकार को खाद्यान्न से जुड़ों कार्यक्रमों पर ध्यान देना चाहिए और ये कोशिश करनी चाहिए कि उनका लाभ गरीबों तक पहुँचें." यूनीसेफ़ का कहना है कि खाद्य वस्तुओं के दामों में अब कमी होने वाली नहीं है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'खाद्यान्न कीमतों में वृद्धि पर चेतावनी'18 दिसंबर, 2007 | पहला पन्ना 'बायोफ़्यूल' और घटते खाद्यान्न पर चेतावनी22 अप्रैल, 2008 | पहला पन्ना खाद्यान्न संकट टास्क फ़ोर्स का गठन29 अप्रैल, 2008 | पहला पन्ना 'खाद्यान्न संकट के गंभीर परिणाम होंगे'04 मई, 2008 | पहला पन्ना 'यूएन की खाद्य संस्था फ़िजूल है'05 मई, 2008 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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