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'खाद्यान्न संकट के गंभीर परिणाम होंगे' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एशियाई विकास बैंक ने कहा है कि खाद्य पदार्थो की बढ़ती क़ीमतों से पैदा हुआ संकट इतना गंभीर है कि ग़रीबी दूर करने के प्रयासों में जितनी सफलता हासिल हुई है वह छोटी पड़ जाएगी. बैंक के वार्षिक सम्मेलन में जारी एक रिपोर्ट में अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय से तत्काल प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया गया है. एशियाई में सबसे अधिक ग़रीब लोगों की परेशानियों को कम करने के लिए बनाए गए एक कोष में दुनिया के कई दानकर्ता देशों ने 11 अरब ड़ालर का दान दिया है. उधर अफ़्रीकी विकास बैंक ने भी एक अरब डॉलर की मदद देने की घोषणा की है. एशियाई विकास बैंक एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के मैनेजिंग डायरेक्टर जनरल रजत नाग ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि बैंक को सबसे ज़्यादा चिंता एशिया के एक अरब लोगों की है. “एशिया में 60 करोड़ लोग एक डॉलर प्रतिदिन से कम कमाते हैं. ये लोग ग़रीबी रेखा के नीचे है. साथ ही 40 करोड़ ऐसे भी लोग हैं जो ग़रीबी रेखा के थोड़े ही ऊपर हैं. हमने अगर समय पर क़दम नहीं उठाए तो इन सभी की स्थिति और खराब होगी.”
रजत नाग कहते हैं कि इन एक अरब लोगों को भुखमरी और कुपोषण के अलावा और भी समस्याओं से जूझना पड़ सकता है. “लोग शिक्षा पर ख़र्च करना बंद कर देंगे. इसका सबसे ज़्यादा असर लड़कियों पर पड़ता है जिनको माता-पिता स्कूल भेजना बंद कर देते हैं. कई लोग डॉक्टरों के पास तब तक नहीं जाते जब तक उनकी जान पर न बन आए.” जॉर्ज बुश लेकिन इस संकट की घड़ी में सरकारें साथ आने की बजाय वाकयुद्ध में जुटी हैं. अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने शनिवार को कहा कि भारत जैसे देशों में लोग अमीर हो रहे हैं जिसके कारण लोग ज़्यादा खा रहे हैं और इसलिए खाद्य सामग्रियों की क़ीमतें बढ़ रही हैं. बुश की इस बात से नाराज़ होकर एक भारतीय वेबसाइट ने तो यहाँ तक हेडलाइन लगाई है कि ‘भारतीयों खाना बंद करो, अमरीकियों को खाने दो.’ रजत नाग ने कहा कि वो राजनीति में नहीं पड़ना चाहते लेकिन रजत नाग कहते हैं पिछले साल ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश और विएतनाम में फ़सल अच्छी नहीं हुई पर इस बार संकेत बेहतर हैं. ‘भारत में फ़सल अच्छी हुई है और मानसून अच्छा होने के आसार हैं. निकट भविष्य में अभी की स्थिति के मुकाबले कुछ बेहतरी तो आएगी लेकिन अनाज के कम दाम में मिलने का युग अब समाप्त हो गया है.” बायो ईंधन रजत नाग बायो ईंधन यानी अनाज से ईंधन बनाने के बारे में भारत के पक्ष में नज़र आए लेकिन खुलकर अमरीका का विरोध करने से कतरा गए.
भारत का कहना है कि जब लोग भूखे मर रहे हैं तो फिर अमरीका जैसे देश भुट्टे जैसे खाद्य पदार्थ से तेल बनाकर गाड़ियाँ चलाने की बात क्यों कर रहे हैं. शनिवार को अमरीका के राष्ट्रपति ने स्पष्ट कहा कि वो बायो ईंधन के पक्ष में हैं. रजत नाग कहते हैं कि बायो ईंधन की नीति के बारे में भी दुनिया को फिर सोचना चाहिए क्योंकि इससे खाने की चीज़ों की समस्या और अधिक बढ़ेगी. रजत नाग सहित अन्य अधिकारी और विभिन्न देशों के मंत्री बैठक के लिए स्पेन की राजधानी मेड्रिड पहुँचे हुए हैं जहाँ इन मुद्दों पर छह मई तक चर्चा कर नीतियाँ बनाई जानी हैं. |
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