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बुश ने महंगाई का ठीकरा भारत पर फोड़ा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनियाभर में खाद्यान्न की बढ़ती क़ीमतों की वजह भारत जैसे देश हैं- अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस के बाद अब राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने भी कुछ इसी तरह का तर्क पेश किया है. तर्क ऐसा जिसपर पहले ही भारत सरकार और वामपंथी दल आँखें तरेर चुके हैं. राष्ट्रपति बुश का कहना है कि भारत जैसे देशों में समृद्धि अच्छी बात है लेकिन इसके कारण बेहतर आहार की मांग बढ़ती है और अंतत: खाद्यान्न की क़ीमतें बढ़ती हैं. बुश के बयान पर भारत के वाणिज्य राज्य मंत्री जयराम रमेश ने तीख़ी प्रतिक्रिया दी है जिसे समाचार एजेंसियों ने एक भारतीय समाचार चैनल के हवाले से जारी किया है. इस बयान में रमेश ने कहा है, "जॉर्ज बुश कभी भी अर्थशास्त्र की जानकारी के लिए नहीं जाने गए हैं और उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे कितने ग़लत हैं." रमेश ने पलटवार में कहा, "यह कहना पूरी तरह से ग़लत है कि भारत में भोजन की माँग से दुनिया भर में खाद्य सामग्रियों की क़ीमत बढ़ रही है." पिछले दिनों अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने भी ऐसा ही तर्क दिया था. उन्होंने कहा था कि भारत और चीन जैसे देशों में लोगों के खान-पान के स्तर में हुई बेहतरी और खाद्यान्न सामग्रियों के निर्यात पर लगी रोक इस समय दुनियाभर में खाद्यान्न संकट के कारणों में से एक है. मिसौरी में एक कार्यक्रम के दौरान अर्थव्यवस्था पर सवालों के जवाब देते हुए राष्ट्रपति बुश ने कहा कि मौजूदा संकट के कई कारण हैं और इनमें से सिर्फ़ एक वजह बायो ईंधन में निवेश है. तर्क राष्ट्रपति बुश ने कहा, "दुनियाभर में मांग बढ़ रही है. विकासशील देशों में समृद्धि बढ़ रही है. जो अच्छी बात है. ये आपके लिए भी अच्छा है क्योंकि आप उन देशों में अपने उत्पाद बेच सकते हैं, जिन्हें आप जानते हैं. शायद बड़े देश. लेकिन उन देशों में अपना उत्पाद बेचना मुश्किल होगा, जो समृद्ध नहीं हैं." उन्होंने कहा कि ये अच्छा तो है लेकिन इससे मांग बढ़ जाती है. बुश ने इस मुद्दे को उदाहरण देकर कुछ यूँ समझाया- भारत में 35 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिन्हें मध्य वर्ग माना जाता है. ये संख्या अमरीका से भी ज़्यादा है. भारत का मध्य वर्ग हमारी आबादी से भी ज़्यादा है. जब आपके पास धन आने लगता है तो आप बेहतर चीज़ों की मांग करने लगते हैं. इनमें बेहतर खाना भी शामिल है. इससे मांग बढ़ती है और फिर क़ीमतें आसमान छूने लगती हैं. राष्ट्रपति बुश ने कहा कि मौसम के बदलते व्यवहार और ईंधन की क़ीमतों के कारण भी महंगाई बढ़ी है. पहले कोंडोलीज़ा राइस के बयान पर भारत सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी. सरकार को समर्थन दे रही वामपंथी पार्टियाँ ने भी इस बयान पर ऐतराज़ किया था. विदेश राज्य मंत्री आनंद शर्मा ने कहा था कि भारत के बारे में कोंडोलीज़ा राइस की सोच अलग है लेकिन जहाँ तक भारतीयों की बात है, उन्हें जो चीज़ खानी होगी, वो तो खाएँगे ही. | इससे जुड़ी ख़बरें 'विदेशी निवेश, विश्व बाज़ार में बढ़ती कीमतों के कारण महँगाई'02 मई, 2008 | कारोबार भाजपा की हड़ताल: कई राज्यों में असर02 मई, 2008 | भारत और पड़ोस महँगाई के ख़िलाफ़ भाजपा की हड़ताल01 मई, 2008 | भारत और पड़ोस महंगाई पर वामपंथी-यूएनपीए का प्रदर्शन19 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस महंगाई पर सरकार को घेरने की तैयारी16 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस महंगाई पर सरकार को घेरने की तैयारी16 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस महंगाई के मुद्दे पर संसद में हंगामा15 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस महंगाई पर विश्व बैंक की भी चेतावनी14 अप्रैल, 2008 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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