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महंगाई पर विश्व बैंक की भी चेतावनी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विश्व बैंक के अध्यक्ष रॉबर्ट ज़ोलिक ने कहा है कि खाद्य पदार्थों की बढ़ती क़ीमतों की वजह से ग़रीब देशों में दस करोड़ से भी ज़्यादा लोग और ग़रीबी के गर्त में जाने को मजबूर होंगे. विश्व बैंक के अध्यक्ष की इस चेतावनी से एक दिन पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुखिया भी इसी तरह की चेतावनी दे चुके हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि खाद्य पदार्थों की बढ़ती क़ीमतों की वजह से लाखों लोग भुखमरी के कगार पर हैं. विश्व बैंक के मुखिया रॉबर्ट ज़ोलिक ने कृषि उत्पादन में टिकाऊ बढ़ोत्तरी के लिए एक कार्ययोजना का भी प्रस्ताव रखा है जिसे विश्व बैंक की स्टीयरिंग कमेटी ने अपनी सहमति दे दी है. इस कमेटी में वित्त और विकास मंत्री शामिल होते हैं. कमेटी की बैठक वाशिंगटन में हुई. विश्व बैंक और इसकी सहयोगी संस्था अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने गत सप्ताहांत एक बैठक आयोजित की जिसमें खाद्य और ऊर्जा की बढ़ती क़ीमतों पर चर्चा की गई. इस बैठक में दुनिया के वित्त बाज़ारों में उथल-पुथल पर भी चर्चा हुई. रॉबर्ट ज़ोलिक ने कहा है, "आँकड़ों के सख़्त दायरे के बाहर सामान्य विश्लेषण के नज़रिए से बात करें तो पिछले क़रीब तीन साल में खाद्य पदार्थों की क़ीमतों में तीन गुना बढ़ोत्तरी हुई है जिसकी वजह से ग़रीब देशों में लगभग दस करोड़ लोग और ज़्यादा ग़रीबी का शिकार हो सकते हैं." मुश्किलें भारत, चीन, वियतनाम और मिस्र जैसे महत्वपूर्ण देशों में चावल के निर्यात लगाने पर पाबंदियाँ लगाई गई हैं और बांग्लादेश, फ़िलीपीन्स और अफ़ग़ानिस्तान जैसे देश काफ़ी प्रभावित हुए हैं जो खाद्य पदार्थों का बड़े पैमाने पर आयात करते हैं. खाद्य पदार्थों की बढ़ती क़ीमतों से पैदा हुए मुश्किल हालात की वजह से हैती, फ़िलीपीन्स, मिस्र और बांग्लादेश जैसे कई देशों में दंगे भी हो चुके हैं और भारत में भी महंगाई को लेकर बड़ी चिंता है.
हाल के महीनों में अनेक देशों में खाद्य पदार्थों की क़ीमतों में तेज़ी से बढ़ोत्तरी हुई और इसकी वजह माँग में तेज़ी, कुछ देशों में ख़राब मौसम बताए गए हैं. ख़राब मौसम ने अनेक देशों में फ़सलों को चौपट कर दिया है. विश्व बैंक ने कहा है कि गेहूँ, चावल और मक्का जैसे अनाजों की क़ीमतों में तेज़ी से बढ़ोत्तरी हुई है और इसी की वजह से खाद्य पदार्थों में पिछले तीन साल में क़रीब 83 प्रतिशत की तेज़ी देखी गई है. विश्व बैंक के अध्यक्ष रॉबर्ट ज़ोलिक ने कहा है, "हमें अपना धन ख़र्च करना होगा जहाँ लोगों के मुँह हैं ताकि हम लोगों के मुँह में खाना डाल सकें. यह एक चुनौती है." उन्होंने आहवान किया कि ग़रीब देशों में ग़रीब लोगों को ज़्यादा खाद्य पदार्थ मुहैया कराए जाएँ और छोटे किसानों को मदद मुहैया कराई जाए. रॉबर्ट ने कहा कि विश्व बैंक नए फ़सल मौसम के लिए किसानों को नए बीज मुहैया कराने की योजना पर काम कर रहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'बढ़ती क़ीमतें ला सकती है भुखमरी'13 अप्रैल, 2008 | कारोबार दाना पानी, हर किसी की यही कहानी11 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस भारत पर खाद्य संकट का ख़तरा?09 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस जंक फ़ूड विज्ञापनों के ख़िलाफ़ अभियान16 मार्च, 2008 | विज्ञान दुनियाभर में बढ़ते खाद्य संकट पर चिंता25 फ़रवरी, 2008 | पहला पन्ना 'महामारी बन रहा है मोटापा'20 फ़रवरी, 2008 | विज्ञान श्वेत और हरित क्रान्ति...16 फ़रवरी, 2008 | पहला पन्ना दक्षिण एशिया में खाद्यान्न संकट09 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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