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दक्षिण एशिया में खाद्यान्न संकट | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान और बांग्लादेश समेत दक्षिण एशियाई देशों में गेहूँ और चावल की भारी किल्लत महसूस की जा रही है. पाकिस्तान में आटे का भाव आसमान पर है. पाकिस्तानी शहरों में दुकानों से राशन लेने के लिए लंबी कतारें देखी जा सकती हैं. पिछले कुछ समय में यहाँ आटे के भाव में ज़बर्दस्त उछाल आया है. पाकिस्तान में गेहूँ के आटे से बनी रोटियाँ लोगों का मुख्य भोजन है. पिछले हफ़्ते अफ़ग़ानिस्तान ने गेहूँ की कमी दूर करने के लिए विदेशी मदद की गुहार लगाई थी तो दूसरी ओर बांग्लादेश ने चेतावनी दी थी कि वहाँ चावल की भारी किल्लत महसूस हो रही है. विश्व बाज़ार में गेहूँ की कीमतें अभी आसमान छू रही हैं. उत्तरी गोलार्ध में गेहूँ की फ़सल चौपट होने और विकासशील देशों से बढ़ती माँग के कारण समस्या और जटिल हो गई है. अफ़ग़ानिस्तान के वाणिज्य मंत्री मोहम्मद अमीन फरहांग ने कहा है कि जाड़े के दिनों में गेहूँ की कमी भारी समस्या पैदा कर सकती है. उनका बयान ऐसे समय में आया है जब अफ़ग़ानिस्तान में खाद्यान्नों के भाव बढ़ने से लोगों में असंतोष बढ़ा है. अफ़ग़ानिस्तान में गेहूँ की खेती कम होती है और यह अपनी ज़रूरतों के लिए विदेश से आयात पर निर्भर है. पाकिस्तान में असर पाकिस्तान की सरकार का कहना है कि देश में गेहूँ की कोई कमी नहीं है लेकिन इसका समुचित वितरण न हो पाना एक बड़ी समस्या है.
कराची स्थित बीबीसी संवाददाता मोहम्मद इलियास ख़ान का कहना है कि पाकिस्तान सरकार फ़सल तैयार होते समय थोक भाव में गेहूँ की ख़रीद करती है और इसकी आपूर्ति पूर्व निर्धारित कोटे के आधार पर आटा मिलों को करती है. सरकार का कहना है कि अब मिल मालिकों को आपूर्ति बढ़ा दी गई है और तय क़ीमत से अधिक वसूलने वाले मिलों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी. पाकिस्तान में सालाना गेहूँ की खपत लगभग दो करोड़ 20 लाख टन है और पिछले सीजन में पैदावार दो करोड़ 30 लाख टन के आस-पास हुआ था. अधिकारियों का आरोप है कि खाद्यान्न की पेटी कहे जाने वाले पंजाब प्रांत के व्यापारी अफ़ग़ानिस्तान और मध्य एशियाई देशों में गेहूँ की तस्करी कर रहे हैं.
गेहूँ की कमी के कारण पाकिस्तान के कई हिस्सों में आटे की क़ीमत 60 रूपए प्रति किलोग्राम तक पहुँच गई जबकि औसतन कोई मज़दूर एक दिन में सिर्फ़ सौ रूपए कमा पाता है. सरकार समर्थित सहकारी दुकानें 18 रूपए प्रति किलो की दर से गेहूँ बेचती हैं लेकिन इनके पास इतने काउंटर नहीं हैं जो 16 करोड़ की आबादी को अनाज मुहैया करा सके. बांग्लादेश में संकट बांग्लादेश के सेना प्रमुख का कहना है कि चावल की आपूर्ति में भारी कमी के कारण देश बड़ी विपदा की ओर बढ़ रहा है. चावल बांग्लादेशियों का मुख्य भोजन है. जनरल मुईन यू अहमद ने कहा है कि वो इस स्थिति से काफी चिंतित हैं. उन्होंने अविलंब इस समस्या से निपटने की ज़रूरत बताई है. बांग्लादेश में क़ीमतें तेजी से बढ़ी हैं जो वहाँ की राजनीति का एक बड़ा मुद्दा रहा है. पिछले एक साल के दौरान कुछ खाद्यान्नों की क़ीमतें दोगुनी हो चुकी हैं. ऊपर से इस साल आए भयानक तूफ़ान और ख़राब मौसम के कारण धान की खेत बुरी तरह प्रभावित हो गई. | इससे जुड़ी ख़बरें बांग्लादेश में चावल की भारी किल्लत04 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस चूहों ने इंसानों का भला किया13 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'ग़लत नीतियों की वजह से बढ़ रही भुखमरी'08 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस भारतीय अर्थव्यवस्था की चुनौतियाँ24 जून, 2006 | कारोबार बेहतर आईक्यू बनाता है शाकाहारी15 दिसंबर, 2006 | विज्ञान तेल के लिए अनाज कार्यक्रम03 फ़रवरी, 2005 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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