|
बांग्लादेश में चावल की भारी किल्लत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बांग्लादेश के सेना प्रमुख का कहना है कि चावल की आपूर्ति में भारी कमी के कारण देश बड़ी विपदा की ओर बढ़ रहा है. चावल बांग्लादेशियों का मुख्य भोजन है. जनरल मुईन यू अहमद ने कहा है कि वो इस स्थिति से काफी चिंतित हैं. उन्होंने अविलंब इस समस्या से निपटने की ज़रूरत बताई है. बांग्लादेश में क़ीमतें तेजी से बढ़ी हैं जो वहाँ की राजनीति का एक बड़ा मुद्दा रहा है. पिछले एक साल के दौरान कुछ खाद्यान्नों की क़ीमतें दोगुनी हो चुकी हैं. ऊपर से इस साल आए भयानक तूफ़ान और ख़राब मौसम के कारण धान की खेत बुरी तरह प्रभावित हो गई. बढ़ती क़ीमत जनरल अहमद का कहना था, "अगर हम यह सोचें कि ये एक विपदा है और मिल कर काम करें तो हम इस संकट से पार पा सकते हैं." उन्होंने बढ़ती क़ीमतों के लिए विश्व बाज़ार को ज़िम्मेदार ठहराया.
सरकार का कहना है कि वो इस संकट से निपटने की कोशिश कर रही है. गुरुवार को इस कड़ी में चटगाँव बंदरगाह पर एक लाख सात हज़ार टन चावल की खेप पहुँची है. सरकार का कहना है कि शुक्रवार तक दस हज़ार टन चावल और आ जाएगा. देश में काम के बदले अनाज कार्यक्रम और ग़रीबों को मुफ़्त अनाज देने की योजना शुरू की गई है. | इससे जुड़ी ख़बरें बांग्लादेश को चावल का निर्यात01 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस तूफ़ान में बचे शाहिद की कहानी22 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय मदद 19 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस बांग्लादेश में तूफ़ान से सैकड़ों मारे गए17 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस बांग्लादेश में तूफ़ान से सैकड़ों मारे गए16 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस बांग्लादेश में आया भीषण समुद्री तूफ़ान15 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस यौनकर्मियों को नहीं मिलती दो गज़ ज़मीन12 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||