|
बांग्लादेश में तूफ़ान से सैकड़ों मारे गए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बांग्लादेश सरकार का कहना है कि दक्षिण-पश्चिमी तटवर्ती इलाक़ों में आए भीषण तूफ़ान में छह सौ ज़्यादा लोग मारे गए हैं. कुछ अन्य रिपोर्टों में मृतकों की संख्या एक हज़ार से अधिक बताई गई है. बचावकर्मियों का कहना है कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है. तूफ़ान ने भारी तबाही मचाई है और हज़ारों लोग बेघरबार हो गए हैं और कई इलाक़ों में संचार व्यवस्था ठप्प हो गई है. अधिकारियों का कहना है कि गुरुवार की रात आया भीषण तूफ़ान शुक्रवार शाम तक ठंडा हो गया. तूफ़ान तटवर्ती इलाक़ों में 240 किलोमीटर प्रति किलोमीटर की रफ़्तार से पहुँचा और इसकी वजह से कई जगह पाँच-पाँच मीटर ऊँची लहरें उठ रहीं थीं. इस समुद्री तूफ़ान के बाद अनेक लोग लापता हैं और लाखों अपने घर छोड़कर पलायन करने को मजबूर हुए हैं. अधिकरियों का कहना है कि मछली पकड़ने के लिए गईं कोई 150 नौकाएँ लौट नहीं सकीं हैं. संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी का कहना है कि एक हज़ार मछुआरे लापता हैं.
बांग्लादेश के पड़ोस में भारत के पश्चिमी बंगाल राज्य के अधिकारियों को आशंका है कि तूफ़ान से वहाँ लगभग दस लाख लोगों प्रभावित हुए हैं. सहायता और बचाव कार्य बांग्लादेश में दो सौ किलोमीटर प्रति घंटे से ज़्यादा तीव्रता वाली तेज़ हवाओं ने कई घरों और भवनों को ध्वस्त कर दिया है और बड़ी संख्या में पेड़ और बिजली के खंबे उखड़ गए. सेना, पुलिस और अन्य सरकारी एजेंसियों के अलावा रेडक्रॉस और कई स्वयंसेवी संस्थाएं राहत और बचाव कार्य में लगी हुई हैं. पीड़ितों को खाना, दवा, टेंट और कंबल आदि पहुँचाने की कोशिशें की जा रही हैं. कई तटवर्ती इलाक़ों में पानी भरा हुआ है. यातायात ठप्प पड़ा हुआ है और सरकार को ढाका के मुख्य हवाईअड्डे से सभी उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं. कई इलाकों में संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण अभी तक तूफ़ान से हुई तबाही का सही अंदाज़ा नहीं लगाया जा सका है. बांग्लादेश का दक्षिणी तट अक्सर तूफ़ान की चपेट में आ जाता है. वर्ष 1970 में यहाँ भीषण तूफ़ान आया था जिसमें पाँच लाख लोग मारे गए थे. भारत में हालात सामान्य नई दिल्ली में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के निदेशक बीपी यादव का कहना था कि गुरूवार को आए उस तूफ़ान की तीव्रता शुक्रवार तक धीमी पड़ चुकी है और सरकार ने अलर्ट हटा लिया है.
यादव ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "जिन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया था उनमें से काफ़ी तो वापिस लौट चुके हैं और जो नहीं लौटे हैं उन्हें सलाह दी जा रही है कि अब कोई ख़तरा नहीं है." यादव ने कहा कि मछुआरे भी समुद्र में अपनी सामान्य गतिविधियाँ जारी रख सकते हैं. यादव ने कहा कि इस तूफ़ान से प्रभावित उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में कोई बड़ा नुक़सान नहीं हुआ है और इसका ज़्यादातर नुक़सान बांग्लादेश में हुआ है. यादव ने कहा कि यह तूफ़ान बांग्लादेश और भारत के सभी इलाक़ों में ठंडा पड़ चुका है और अब इससे और नुक़सान की कोई संभावना नहीं है. उन्होंने कहा कि भारत में संचार व्यवस्था ठीकठाक है और यातायात के हालात भी सामान्य हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें बांग्लादेश में आया भीषण समुद्री तूफ़ान15 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'बाढ़ प्रभावित इलाक़ों में खाद्यान्न संकट'18 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस बारिश के कारण स्थिति हुई बदतर17 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस 'बाढ़ पीड़ितों में महामारी का खतरा'07 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस बाढ़ पीड़ितों पर पुलिस फ़ायरिंग03 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस बांग्लादेश:मरने वालों की संख्या 118 हुई13 जून, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||