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बांग्लादेश को चावल का निर्यात | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बांग्लादेश में चक्रवात से मची तबाही के बाद शुरू हुए राहत कार्यो के मद्देनज़र भारत बांग्लादेश को पाँच लाख टन चावल का निर्यात करने पर सहमत हो गया है. हाल में बांग्लादेश में आए समुद्री तूफ़ान में लगभग तीन हज़ार लोग मारे गए थे और अनेक अन्य घायल हुए थे. प्रभावित क्षेत्रो का जायज़ा लेने के लिए शनिवार को बाँग्लादेश पहुँचने के बाद भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि चक्रवात के बाद उत्पन्न हुए संकट से निपटने के लिए भारत पाँच लाख टन चावल का निर्यात करेगा. भारत में फ़िलहाल चावल के निर्यात पर प्रतिबंध है क्योंकि इस साल बाढ़ के कारण फ़सलों को काफ़ी नुक़सान पहुँचा था. लेकिन केन्द्र सरकार की इस घोषणा के बाद बाँग्लादेश के लिए इस प्रतिबंध को अस्थायी तौर पर हटा लिया गया है. राहत सामग्री सौंपी ढाका हवाई अड्डे पर प्रणव मुखर्जी ने बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार इफ़्तिखार अहमद चौधरी को 36 टन ज़रूरी राहत सामग्री भी सौंपी और कहा कि भारत तटीय क्षेत्रो में पुनर्वास के लिए हरसंभव प्रयास करेगा. इसके लिए भारत ने 10 गाँवो को विशेष रूप से चिन्हित किया है. बांग्लादेश में दो हफ़्ते पहले आए चक्रवात से फ़सलों, खेत खलिहानो और मवेशियों को ज़बरदस्त नुक़सान हुआ था. बांग्लादेश में सेना समर्थित सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अगले साल मार्च महीने से पहले पाँच लाख टन आपात खाद्य सामग्री मुहैया कराने का अनुरोध किया था. अपनी संक्षिप्त बाँग्लादेश यात्रा के दौरान विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी कार्यवाहक सरकार के प्रमुख फ़ख़रूद्दीन अहमद और अन्य महत्वपूर्ण नेताओं से मिलने के बाद शनिवार को ही दिल्ली लौट आएँगें. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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