|
बेहतर आईक्यू बनाता है शाकाहारी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक अध्ययन के अनुसार जिन बच्चों की बुद्धिमत्ता (आईक्यू) का स्तर बेहतर है उनके बड़ा होने पर शाकाहारी बनने की संभावना अधिक है. साउथैम्पटन विश्वविद्यालय की एक टीम को इस अध्ययन में पता लगा कि 30 वर्ष की उम्र तक जो लोग शाकाहारी बन चुके हैं उन सभी का आईक्यू स्तर 10 वर्ष की उम्र में औसत से पाँच अंक ज़्यादा था. शोधकर्ताओं ने कहा कि यही कारण है कि जिन लोगों का आईक्यू स्तर अच्छा होता है वो ज़्यादा स्वस्थ होते हैं क्योंकि शाकाहारी भोजन का सीधा संबंध हृदय रोग और मोटापे से होता है. ब्रितानी मेडिकल जर्नल में 8,179 लोगों के साथ किए गए इस अध्ययन को शामिल किया गया था. वर्ष 1970 में किए गए आईक्यू टेस्ट के 20 साल बाद ये पाया गया कि अध्ययन में सम्मलित लोगों में से 366 लोगों ने कहा कि वे शाकाहारी हैं, हालाँकि उनमें सौ से ज़्यादा लोगों ने यह भी कहा कि वे मछली या मुर्गा खाते थे. शाकाहारी पुरुषों का आईक्यू स्कोर 106 रहा जबकि मांसाहारी पुरुषों का आई क्यू स्कोर 101 रहा. दूसरी ओर शाकाहारी महिलाओं का औसत आईक्यू स्कोर 104 रहा जबकि मांसाहारी महिलाओं ने आईक्यू के पैमाने पर 99 अंक प्राप्त किए. बुद्धिमता लेकिन केवल शुद्ध शाकाहार करने वाले लोगों का आईक्यू स्तर ऐसे लोगों से भिन्न नहीं था जो मछली या मुर्गा खाते थे. शोधकर्ताओं के मुताबिक़ अध्ययन में सामने आई बातों का संबंध कुछ हद तक बेहतर शिक्षा और उच्चस्तरीय व्यावसायिक सामाजिक वर्ग के लोगों से है. लेकिन इन तथ्यों को हटाने के बाद भी ये आँकड़े काफ़ी महत्वपूर्ण रहते हैं. शोध में पाया गया कि मांसाहारी लोगों के मुक़ाबले शाकाहारी लोगों में से ज़्यादातर महिलाएँ हैं, उच्चस्तरीय व्यावसायिक सामाजिक वर्ग से हैं और अधिक शिक्षित हैं. लेकिन शाकाहारी और मांसाहारी लोगों की सालाना आय में कहीं कोई अंतर नहीं दिखा. प्रमुख शोधकर्ता कैथरीन गेल ने कहा, "शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि अधिक बुद्धिमता वाले बच्चों के वयस्क अवस्था में पहुँचने पर शाकाहारी बनने की संभावना ज़्यादा होती है." उन्होंने कहा कि शाकाहारी भोजन के कारण बाल्यकाल या प्रौढ़ावस्था में अच्छा आईक्यू स्तर बाद में हृदय रोग की संभावना को कम कर देता है. कैथरीन गेल के मुताबिक़ ये भी हो सकता है कि ये निष्कर्ष केवल बुद्धिमता के अच्छे स्तर के बाद अपनाई गई जीवनशैली की प्राथमिकताओं का एक उदाहरण भर हो- जैसे पंसद का अख़बार पढ़ना. हालाँकि उन सभी प्राथमिकताओं का स्वास्थ्य पर असर नहीं पड़ता. शाकाहारी समिति की लिज़ ओ नील कहती हैं, "ये बात हम सब जानते हैं कि शाकाहारी होना एक समझदारी भरा क़दम है जो मनुष्यों, पशुओं और वातावरण के लिए फ़ायदेमंद है." लेकिन ब्रिटिश डॉयटेटिक एसोसिएशन के डॉ. फ्रैंकी फ़िलिप्स ने कहा कि ये वैसी ही बात है कि पहले मुर्गी आई या अंडा. लोग शाकाहारी बनते हैं क्योंकि उनका आईक्यू का स्तर अच्छा है या फिर क्योंकि वे स्वास्थ्य मुद्दों को लेकर अधिक सचेत हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'फ़ैट स्कैन' बताएगा शरीर में चर्बी कहाँ10 दिसंबर, 2006 | विज्ञान चूहे बताएंगे खाना ख़राब तो नहीं...16 नवंबर, 2006 | खेल नाइट ईटिंग सिंड्रोम क्या होता है?26 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना खाने की कला सिखाता है 'मीयरकैट'14 जुलाई, 2006 | विज्ञान दूध और जुड़वां बच्चों में संबंध20 मई, 2006 | विज्ञान माँ का दूध पिलाने का रिकॉर्ड06 मई, 2006 | विज्ञान ऊंटनी का दूध नया सुपर फूड21 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||