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नाइट ईटिंग सिंड्रोम क्या होता है? | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुर्गापुर, अंगुल उड़ीसा के ज्योतिरंजन बिस्वाल ये जानना चाहते हैं कि नाइट ईटिंग सिंड्रोम क्या है. ये एक तरह की बीमारी है जो तनाव से जुड़ी है. इसमें व्यक्ति आमतौर पर अवसादग्रस्त होता है. ख़ासतौर से रात के समय उसे तनाव, घबराहट और चिन्ता अधिक महसूस होती है. उसे सोने में दिक्कत आती है, अगर नींद आ भी जाए तो टूटती रहती है. शायद इसीलिए वो रात में उठकर कुछ कुछ खाता रहता है और वो भी चर्बी बढ़ाने वाली चीज़ें. ऐसा करने से उसमें अपराध-बोध पनपना स्वाभाविक है. नाइट ईटिंग सिंड्रोम से पीड़ित लोगों को सुबह के समय बिल्कुल भूख नहीं लगती और वो आमतौर पर रात के भोजन के बाद अधिक खाते हैं. अगर ये सिलसिला चलता रहे तो तुरन्त अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. इसरो इसरो क्या है, इसका पूरा रूप क्या है और इसकी स्थापना कब और क्यों की गई. जानना चाहते हैं बिशनपुर, कुशीनगर उत्तर प्रदेश से बीर बहादुर यादव. इसरो का पूरा नाम है इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गैनाइज़ेशन. भारत सरकार ने जून 1972 को अंतरिक्ष आयोग और अंतरिक्ष विभाग की स्थापना की. इसरो अंतरिक्ष विभाग के अधीन आता है जिसका काम है भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को विकसित करना.
पटना के अशोक कुमार गौतम ने हमें ईमेल से एक सवाल लिखकर भेजा है. वो ये जानना चाहते हैं कि भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन यानि इसरो की चंद्रयान परियोजना क्या है. इसमें एक ऐसा उपग्रह बनाया जाएगा जिसे चंद्रमा की कक्षा में छोड़ा जाएगा. ये यान चंद्रमा पर उतरेगा नहीं बल्कि दो साल तक उससे कोई सौ किलोमीटर ऊपर रहकर जानकारी प्राप्त करेगा. ऐसे उपकरण बनाए जा रहे हैं जिससे चंद्रमा का मानचित्र बनाना संभव होगा. कुछ ऐक्सरे उपकरण लगाए जाएंगे जो ये पता लगाएंगे कि चंद्रमा पर किस तरह की धातुएं हैं. कुछ लेज़र उपकरणों से चंद्रमा के गढ्ढों के बारे में जानकारी हासिल की जाएगी. इस परियोजना का उद्देश्य है अब तक गए मिशनों से आगे की जानकारी हासिल करना. यान तैयार करने में 170-80 करोड़ का ख़र्च आएगा और पीऐसऐलवी का ख़र्च 70-80 करोड़ के आस-पास आएगा. सबसे बड़ा मंदिर विश्व का सबसे बड़ा मंदिर किस देश में है. ग्राम बरियरीया मोतिहारी बिहार से सोनू कुमार श्रीवास्तव.
कम्बोडिया के प्राचीन मंदिर अंगकोर वाट को दुनिया का सबसे विशाल मंदिर माना जाता है. ये कम्बोडिया की राजधानी फ्नोम पैन से 192 मील उत्तर पश्चिम में स्थित है. कहते हैं कि एक भारतीय ब्राह्मण कम्बू ने 100 ईसवी में फ़ूनान राज्य की स्थापना की. भारतीय व्यापारी वहां बसने लगे और इस क्षेत्र में भारतीय संस्कृति का प्रभाव बढ़ने लगा. अंगकोर वाट की स्थापना सूर्यवर्मन द्वितीय ने 1131 में की. उनके पचास वर्ष के शासन में ही इस मंदिर का निर्माण हुआ. अंगकोर वाट का मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है. ये कोई 81 हैक्टेयर क्षेत्र में बना है और ये भारतीय वास्तुकला का अभूतपूर्व नमूना है. इसकी हर दीवार, दीर्घा और स्तम्भ पर हिन्दू मिथक कथाएं उकेरी गई हैं. सदियों तक ये मंदिर कम्बोडिया के घने जंगलों में सुरक्षित छिपा रहा लेकिन फिर 1860 में इसकी खोज एक फ़्रांसीसी मिशनरी हैनरी महूत ने की और 1992 में संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनैस्को ने इसे विश्व विरासत घोषित कर दिया. चायनामैन पीलीभीत उत्तर प्रदेश से रामेश्वर दयाल पटेल पूछते हैं चायनामैन शब्द किस खेल से संबंधित है और इसका प्रयोग कब और कहां किया जाता है. रामेश्वर जी चायनामैन का संबंध क्रिकिट से है. जब गेंदबाज़ उल्टे हाथ से कलाई को मोड़कर लैग स्पिन करता है तो गेंद ऑफ़ स्टम्प के बाहर टप्पा खाती है और विकिट की तरफ़ आती है. इसे चायनामैन कहा जाता है. ऐसी गेंद बल्लेबाज़ को परेशान करती है. इक्का दुक्का गेंदबाज़ ही इस तरह का प्रयोग करते हैं. ऑस्ट्रेलिया के पॉल ऐडम्स इस तरह से गेंद फेंकते थे. क्रिकेट 1983 के क्रिकट वर्ल्ड कप के समय भारतीय टीम के उप-कप्तान कौन थे. पूछते हैं इलाहबाद उत्तर प्रदेश से वीरेन्द्र कुमार गौतम. मोहिन्दर अमरनाथ उप कप्तान थे और उन्हे बल्लेबाज़ी और गेंदबाज़ी में अच्छे प्रदर्शन के लिए मैन ऑफ़ द मैच का ख़िताब भी दिया गया था. और ये तो आप जानते ही होंगे कि 1983 का विश्व कप भारतीय टीम ने जीता था. कमल का नाम कमल का वैज्ञानिक नाम क्या है. भवानीपुर, पूर्वी चम्पारण बिहार से मोहम्मद कासिम अंसारी.
कमल का वैज्ञानिक नाम है Nymphaeaceae. इसकी पाँच प्रजातियां हैं जिनमें तीन Nymphaea वर्ग की हैं और दो Nelumbo वर्ग की. भारतीय कमल दूसरे वर्ग में आते हैं. रूपा जानती हैं दुनिया की विभिन्न प्राचीन संस्कृतियों में कमल का बहुत महत्व रहा है. मिस्र के फ़ैरो को मरणोपरान्त कमल के पत्तों की माला से सजाया जाता था. बौद्ध धर्म में ये माना जाता है कि क्योंकि कमल की जड़ें मिट्टी में होती हैं और वो देखता आकाश की ओर है इसलिए वो पृथ्वी और स्वर्ग को जोड़ने वाला माध्यम है. भगवान बुद्ध को कमल पर लेटा दिखाया जाता है. उसी तरह लक्ष्मी भी कमल पर बैठी दिखाई जाती हैं. राजनीति पाकिस्तान के प्रथम प्रधानमंत्री कौन थे. पूछते हैं कठमलिया बिहार से चंद्रशेखर प्रसाद. जब 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान बना तो पहले प्रधानमंत्री बने नवाबज़ादा लियाक़त अली ख़ान. इनका जन्म तत्कालीन पंजाब के करनाल शहर के नवाब के घर 1895 में हुआ. लियाक़त अली ख़ान ने 1922 में इंगलैंड से वक़ालत पास की और लौटकर ऑल इंडिया मुसलिम लीग में शामिल हो गये. 1936 में जब मोहम्मद अली जिन्नाह ने पार्टी का पुनर्गठन किया तो लियाक़त अली महासचिव चुने गए. 1946 में जब भारत की अंतरिम सरकार का गठन हुआ तो वो वित्तमंत्री बनाए गए. और पाकिस्तान के अस्तित्व में आने पर वो प्रधानमंत्री बनाए गए. लेकिन वो अधिक समय तक इस पद पर न रह सके. 16 अक्तूबर 1951 को रावलपिंडी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए वो एक हत्यारे की गोलियों का निशाना बन गए. चलचित्र ग्राम अनढोवाकोला, किशनगंज बिहार से तौक़ीर आलम पूछते हैं कि चलचित्र का आविष्कार किस वैज्ञानिक ने किया था. आमतौर पर ये माना जाता है कि फ़्रांस के लुई लुमिए ने 1895 में पहले चलचित्र कैमरे का आविष्कार किया. लेकिन सच्चाई ये है कि इसी के आस-पास कई अन्य लोगों ने भी मिलते जुलते आविष्कार किये थे. हां लुमिए के आविष्कार में तीन चीज़ें साथ थीं, चलता-फिरता फ़िल्म कैमरा, फ़िल्म प्रोसैसिंग यूनिट और एक प्रोजैक्टर. 28 दिसम्बर 1895 में पेरिस के ग्रैंड कैफ़े में लुई और उनके भाई ऑगॉस्टे लुमिए ने पहला चलचित्र दिखाया जिसे दर्शकों ने टिकट ख़रीद कर देखा. यहीं से चलचित्र के युग की शुरुआत हुई. |
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