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समय आगे-पीछे करने का मामला! | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मेरठ, उत्तर प्रदेश से ग़ज़ाला ख़ान पूछती हैं कि पश्चिमी देशों में गर्मियों के महीनों में घड़ियां आगे क्यों की जाती हैं. भारत में तो ऐसा नहीं होता. ग़ज़ाला जी, इसकी वजह ये है कि उत्तरी गोलार्द्द में गर्मियों में सूरज बहुत जल्दी उगता है और देर से डूबता है. इसलिए अगर घड़ियां आगे कर दी जाएं तो दिन की रोशनी का ज़्यादा उपयोग हो सकता है. इसका सुझाव सबसे पहले 1784 में सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक बैंजामिन फ़्रैंकलिन ने दिया था. फिर सन् 1907 में विलियम वैलैट नामके एक अँग्रेज़ ने वसंत से लेकर पतझड़ तक घड़ियों को 80 मिनट आगे करने जाने का सुझाव दिया. लेकिन ब्रिटन की संसद ने इसे ठुकरा दिया. सन् 1916 में आख़िरकार एक अधिनियम पारित किया गया जिसके अनुसार वसंत में घड़ियों को एक घंटा आगे करने और फिर पतझड़ में उन्हें ग्रीनिच मान समय पर लौटा देना तय हुआ. यूरोपीय संसद के एक अधिनियम के अनुसार मार्च महीने के अंतिम रविवार से लेकर अक्तूबर के अंतिम रविवार तक ग्रीष्म कालीन समय लागू रहता है. अयोध्या, उत्तर प्रदेश से श्रुति मिश्रा लिखती हैं कि ग्रीन ऑस्कर पुरस्कार क्या होते हैं किसलिए दिए जाते हैं. ग्रीन ऑस्कर का असली नाम पांडा अवार्ड्स है. ये पर्यावरण या जीव-जंतुओं से जुड़ी सबसे अच्छी फ़िल्म को दिया जाता है. पैंस कहाँ की मुद्रा है. क्या ये किसी मुद्रा का छोटा सा भाग है. पूछते हैं भोगलपुर दरभंगा बिहार से मिथिलेश कुमार अकेला. पैंस ब्रिटेन की मुद्रा की सबसे छोटी इकाई है. एक पाउंड स्टर्लिंग में सौ पैंस होते हैं. इसे पैनी भी कहा जाता है जो आंग्ल सैक्सन भाषा के पैनिग शब्द से बना है. पैनी की शुरुआत ब्रिटेन में 757 ईस्वी में हुई थी. बैकलॉग क्या है, पूछते हैं सहरसा बिहार से नीरज कुमार झा. ये शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है बैक और लॉग. बैक का मतलब है पीछे और लॉग कहते हैं लकड़ियों को. आतिशदान के पीछे लकड़ियों का ढेर रखा जाता था जिसे बैकलॉग कहते थे. लेकिन आजकल इसका प्रयोग तब किया जाता है जब ढेर सा काम जमा हो जाए. डोपिंग टैस्ट क्या होता है. पूछते हैं औरंगाबाद से आशुतोष गौरव, गोलपहाड़ी जमशेदपुर से जंगबहादुर सिंह और उमा सिंह और छातापुर सुपौल बिहार से अमरेन्द्र मुन्ना. कई बार खिलाड़ी कुछ ऐसी दवाओं का सेवन करते हैं जिससे अपने प्रदर्शन को बढ़ा सकें. लेकिन इसे अवैध माना जाता है और इसे जांचने के लिए जिस प्रणाली का प्रयोगा किया जाता है उसी को डोपिंग टैस्ट कहते हैं. इसके लिए खिलाड़ी के मूत्र के नमूने लिए जाते हैं और उन्हें दो बोतलों में बांटा जाता है. फिर परीक्षण द्वारा ये देखा जाता है कि खिलाड़ी ने प्रतिबंधित दवाओं में से किसी का सेवन तो नहीं किया. वर्ल्ड ऐंटी डोपिंग एजेंसी ने कोई 200 दवाओं की सूची बना रखी है जिसमें हर साल एक या दो दवाएं बदल जाती हैं. मुख्य रूप से इनमें ऐनाबॉलिक स्टैरॉएड्स, डायोरैटिक्स, बीटा ब्लॉकर्स, स्टिमुलैंट्स और दर्द निवारक दवाएं हैं. अगर मूत्र परीक्षण से ये साबित होता है कि खिलाड़ी ने इनमें से कोई दवा ली है तो उसे अपील का एक मौक़ा दिया जाता है. या तो वह अपनी ग़लती मान जाता है या फिर कहता है कि उसके दूसरे नमूने का भी परीक्षण किया जाए. अगर इस परीक्षण से भी ये साबित होता है कि उसने दवा ली है तो उसपर दो साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया जाता है. अगर खिलाड़ी दो साल बाद फिर ऐसा करे तो उसपर आजीवन प्रतिबंध लग जाता है. |
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