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दाँत गिर जाएँ तो कैसे लौटें? | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
धनबाद, झारखंड से अक्शा राही पूछते हैं कि दाँत लगाने की नवीनतम तकनीक इम्प्लान्ट के बारे में बताइए. क्या इस तकनीक से पूरे 32 दाँत लगाए जा सकते हैं. और इसमें कितना ख़र्च आता है? जहाँ नया दाँत लगाना है, अगर वहाँ हड्डी में जगह होती है तो उसमें टाइटेनियम का पेंच डाला जाता है और उसपर नया दाँत बना दिया जाता है जो स्वाभाविक दाँत की तरह ही काम करता है. इसी तरह आठ इम्प्लान्ट ऊपर और आठ इम्प्लान्ट नीचे डालकर उनपर 28 दाँत लगाए जा सकते हैं. एक इम्प्लान्ट में कम से कम बीस हज़ार रुपए का ख़र्च आता है. ऐसाफ़ैटिडा या हींग क्या रासायनिक उत्पाद है या प्राकृतिक? भोजन में इस्तेमाल के अलावा इसके क्या उपयोग हैं? जानना चाहते हैं गोलपहाड़ी, जमशेदपुर से जंगबहादुर सिंह और उमा सिंह. हींग एशिया में पाए जाने वाले बारहमासी पौधे का गोंदनुमाँ सूखा रस होता है. इस पौधे की टहनियाँ 6 से 10 फ़ुट ऊँची हो जाती हैं और इसपर हरापन लिए पीले रंग के फूल निकलते हैं. इसकी जड़ों को काटा जाता है जहाँ से एक दूधिया रस निकलता है. फिर इसे इकठ्ठा कर लिया जाता है. सूखने पर ये भूरे रंग के गोंद जैसा हो जाता है जिसे हींग कहा जाता है. हींग का पौधा तुर्की, अफ़ग़ानिस्तान और ईरान में होता है. ईरान में लगभग हर तरह के भोजन में इसका प्रयोग किया जाता है. भारत में भी हींग का भरपूर इस्तेमाल होता है, लेकिन इसमें ओषधीय गुण भी अनेक हैं. हाज़मे के लिए हींग बहुत अच्छी है और ये खाँसी भी दूर करती है. अगर कोई अफ़ीम खा ले तो हींग उसके असर को ख़त्म कर सकती है. अंतरराष्ट्रीय डेटलाइन कैसी रेखा है, विस्तार से बताइए. जानना चाहते हैं ग्राम बोरिया, समस्तीपुर बिहार के संतोष कुमार. अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा एक काल्पनिक रेखा है जो कैलैंडर के दो क्रमिक दिनों को अलग करती है. ये रेखा महज़ सुविधा के लिये बनाई गई है. जब यात्री पश्चिम दिशा का तरफ़ सफ़र करते थे तो घर लौटकर पाते थे कि एक दिन और बीत गया है. पहली बार दुनिया का चक्कर लगाने वाले मैगलैन के सह नाविकों ने यही पाया कि एक अतिरिक्त दिन बीत गया है, जबकि उन्होंने दिनों का बराबर हिसाब रखा था. उसी तरह अगर पूर्व दिशा की ओर से सफ़र करें तो एक दिन घट जाता था. इसलिए दुनिया को उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव तक बांटने वाली एक रेखा की कल्पना की गई जिसके बाईं तरफ़ एक दिन आगे रहता है. ये काल्पनिक रेखा मैरीडियन रेखा से ठीक 180 डिग्री दूर प्रशांत महासागर से होकर गुज़रती है. यानी रूस के धुर पूर्वी सिरे और अलास्का के बीच से होकर न्यूज़ीलैंड के पास से. तल्ली गैरोली, चमोली उत्तरांचल से मुकेश गैरोला पूछते हैं कि ऐस्टेरॉयड क्या हैं. ऐस्टेरॉयड चट्टान और धातुओं से बने पिंड हैं जो सूर्य का चक्कर लगाते रहते हैं लेकिन इतने छोटे हैं कि उन्हे ग्रह नहीं माना जाता. इनका आकार छोटे पत्थरों से लेकर एक हज़ार किलोमीटर व्यास तक का हो सकता है. अधिकांश ऐस्टेरॉयड मंगल और बृहस्पति ग्रहों के बीच की कक्षा में घूमते रहते हैं. ये माना जाता है कि ये सौर मंडल के निर्माण के समय की बची हुई सामग्री हैं. कुछ का कहना है कि सैकड़ों साल पहले एक ग्रह ज़बरदस्त टकराव में बिखर गया था, ऐस्टेरॉयड उसी के टुकड़े हैं. लेकिन संभावना ये है कि ये वह सामग्री है जो ग्रह का रूप नहीं ले पाई. |
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