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गंगाजल ख़राब क्यों नहीं होता? | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हरपुर पूसा, समस्तीपुर बिहार से प्रवीण कुमार पूछते हैं कि गंगाजल काफ़ी दिनों तक रखने के बावजूद ख़राब नहीं होता है जबकि साधारण जल कुछ दिनों में ख़राब हो जाता है, क्यों? गोमुख से निकली भागीरथी, देवप्रयाग में अलकनंदा से मिलती है. यहाँ तक आते-आते इसमें कुछ चट्टानें घुलती जाती हैं जिससे इसके जल में ऐसी क्षमता पैदा हो जाती है जो पानी को सड़ने नहीं देती. हर नदी के जल की अपनी जैविक संरचना होती है, जिसमें ख़ास तरह के घुले हुए पदार्थ रहते हैं जो कुछ क़िस्म के बैक्टीरिया को पनपने देते हैं कुछ को नहीं. बैक्टीरिया दोनों तरह के होते हैं, वो जो सड़ाते हैं और जो नहीं सड़ाते. वैज्ञानिक शोध से पता चला है कि गंगा के पानी में ऐसे बैक्टीरिया हैं जो सड़ाने वाले कीटाणुओं को पनपने नहीं देते, इसलिए पानी लंबे समय तक ख़राब नहीं होता. हाथ की उंगलियों के नाख़ून, पैर की उंगलियों के नाख़ून की अपेक्षा जल्दी बड़े हो जाते हैं, क्यों? ये सवाल पूछा है वंदना पांडेय ने. हाथ की उंगलियों के नाख़ून को जड़ से आगे बढ़ने में छः महीने लगते हैं जबकि पैर की उंगलियों के नाख़ून को कोई साल भर लगता है. हमारे नाख़ून कैराटिन नाम के एक प्रोटीन से बनते हैं. इनकी जड़ उँगली की खाल के भीतर होती है और नाख़ून का यही भाग जीवित होता है और दिखने वाला भाग मृत. इसीलिए जब हम नाख़ून काटते हैं तो हमें कोई तकलीफ़ नहीं होती. हाथ की उंगलियों के नाख़ून के अधिक तेज़ी से बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं. हाथ की उंगलियां बराबर हरकत में रहती हैं इसलिए उन्हे ख़ून की सप्लाई अधिक मिलती है, उन्हे पानी, धूप और हवा भी ज़्यादा मिलती है, फिर खुले में होने की वजह से उनकी टूट फूट अधिक होती है. कुछ आनुवांशिक कारण भी होते हैं. हरदोई, उत्तर प्रदेश से राजेंद्र सिंह पूछते हैं कि अगर विदेश यात्रा या लंदन यात्रा करते हुए किसी का पासपोर्ट खो जाए तो उस व्यक्ति के साथ क्या व्यवहार किया जाता है. क्या उसे जेल भे ज दिया जाता है?
बिल्कुल नहीं. अगर आपका पासपोर्ट खो जाए या चोरी हो जाए तो उसकी पुलिस रिपोर्ट करानी पड़ती है और उसकी संदर्भ संख्या लेकर भारतीय दूतावास जाना होता है. वहाँ आपको ऐल फ़ार्म मिलेगा, जिसे भर के जमा कराना होगा. ये फ़ार्म आपको दूतावास की वैबसाइट से भी मिल सकता है. अगर आपके पास खोए हुए पासपोर्ट की फ़ोटो कॉपी है तो सहूलियत हो जाएगी. फिर पासपोर्ट अधिकारी उस केंद्र के पासपोर्ट अधिकारी से सम्पर्क करेगा जहाँ से आपका पासपोर्ट जारी हुआ था. एक बार आपकी पहचान सुनिश्चित हो जाए तो आपको डुप्लिकेट पासपोर्ट जारी हो जाएगा. अगर आपके पास खोए हुए पासपोर्ट की फ़ोटोकॉपी नहीं है तो भी एक आपात सर्टिफ़िकेट जारी किया जा सकता है जिससे आप स्वदेश लौट सकते हैं. सूमो पहलवान सूमो पहलवान इतने विशालकाय क्यों होते हैं. जगरनाथपुर मधुबनी बिहार से लालबाबू सिंह.
सूमो कुश्ती जापान की सबसे पुरानी युद्ध कलाओं में से एक है. इसकी जड़ें शिंतो धर्म में मिलती हैं. अच्छी फ़सल के लिए देवताओं के आगे सूमो कुश्तियाँ कराई जाती थीं. ये परंपरा कोई डेढ़ हज़ार साल पुरानी है. सूमो कुश्ती शुरु होने से पहले कई अनुष्ठान किए जाते हैं और फिर दोनों पहलवान उस घेरे में प्रवेश करते हैं जिसे दोयो कहा जाता है. सारा खेल प्रतिपक्षी को घेरे के बाहर फेंकने या उसे धराशायी करने का है. और इसमें सत्तर तरह के दांव-पेंच इस्तेमाल किए जाते हैं. सूमो पहलवानों का वज़न भी बड़ा काम आता है. आमतौर पर पहलवानों का वज़न 250 पाउंड से 500 पाउंड के बीच होता है, क्यों, इसका कारण शायद ये है कि भारी भरकम काया ताक़त की प्रतीक है. अंग्रेज़ी चिकित्सा पद्धति ऐलोपैथी का जनक कौन है? जानना चाहते हैं भूड़, ज़िला बरेली, उत्तर प्रदेश से रजत कुमार. हिपोक्रेटस को ऐलोपैथी का जनक माना जाता है. उनका जन्म ईसा से 460 वर्ष पूर्व हुआ था. वो अपने काल के सबसे महान चिकित्सक थे. उनकी चिकित्सा पद्धति मानव शरीर के विशद अध्ययन पर आधारित थी. उस समय बीमारियों को दुष्ट आत्माओं का प्रकोप या देवताओँ की नाराज़गी का कारण माना जाता था लेकिन हिपोक्रेटस ने इस मिथक को दूर किया और कहा कि हर बीमारी का कोई शारीरिक और तार्किक कारण होता है. दिलचस्प बात ये है कि डॉक्टरी की परीक्षा पास कर लेने के बाद हरेक को हिपोक्रेटस की शपथ लेनी पड़ती है. |
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