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पीसा की झुकी हुई मीनार का रहस्य? | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पीसा की झुकी हुई मीनार यानी “लीनिंग टावर ऑफ़ पीसा” कहाँ है और इसका निर्माण कब और किसने किया था? ये सवाल पूछा है सेड़िया, सांचोर, राजस्थान से तुलसाराम पटीर ने. इटली में छोटा सा शहर है पीसा. वहीं है ये मीनार जिसके आसपास कई इमारतें हैं जो एकदम सीधी है और वहीं उनके बीच टेढ़ी-सी ये इमारत वाक़ई बड़ी आश्चर्यजनक लगती है. पीसा की झुकी हुई मीनार बननी शुरू हुई वर्ष 1173 में लेकिन इस मीनार को पूरा करने में लगे 200 साल. 1173 में पीसा एक अमीरों का शहर था, वहाँ के लोग अच्छे नाविक थे और व्यापारी भी – और ये लोग जाते थे येरूशलम, कार्थेज, स्पेन, अफ़्रीका, बेल्जियम और नॉर्वे तक. पीसा के लोगों और एक दूसरे इतालवी नगर फ़्लॉरेंस के लोगों का छत्तीस का आँकड़ा था, दोनों ने कई युद्ध लड़े थे और फ़्लोरेंस के लोगों को नीचा दिखाने और अपना बड़प्पन साबित करने के लिए ही ये विशाल मीनार बनाने की शुरुआत पीसा में हुई. इसके पहले वास्तुशिल्पी यानी बनाने वाले थे बोनानो पीसानो. मीनार का निर्माण शुरू होने के 12 साल बाद ही साफ़ हो गया कि ये टेढ़ी हो रही है लेकिन तब तक इसकी 8 में से 3 मंज़िलें बन चुकी थीं और आज तक बड़े जतन से इस मीनार को गिरने से बचाया जाता रहा है. मीनार बनने का काम शुरू होने के लगभग 830 साल बाद पीसा अब उतना बड़ा शहर नहीं रहा है लेकिन अब भी दुनिया भर से लोग पीसा की इस मीनार को देखने आते हैं और दिलचस्प बात ये है कि बहुत से भारतीय, बांग्लादेशी और पाकिस्तानी लोगों ने पीसा की झुकी हुई मीनार के आसपास अपनी दुकानें सज़ा रखी हैं. नई दिल्ली से प्रभात चंद्र बोस पूछते हैं कि मैक्स मुलर के बारे में बताइए. ऐसा कहा जाता है कि भारत के बारे में उन्होंने बहुत लिखा लेकिन वह कभी भारत नहीं आए.
जी हाँ प्रभात चंद्र जी - मैक्स मुलर जर्मनी के थे और इनके बारे में स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि पश्चिमी दुनिया में अगर किसी ने वेदांत के मर्म को समझा है तो वो हैं मैक्स मुलर. मैक्स मुलर 6 दिसंबर 1823 को पैदा हुए थे और उनकी मौत हुई वर्ष 1900 में लेकिन 16 साल की उम्र से ही उनकी गहरी रुचि संस्कृत में थी और इसी के चलते मैक्स मुलर ने सेक्रेड बुक्स ऑफ़ द ईस्ट के नाम से 50 खंड लिखे हैं जिनमें शामिल है ऋग्वेद का भाष्य और उपनिषदों के अनुवाद. मैक्स मुलर के पिता विल्हेम मुलर जर्मनी में शृंगार रस के कवि थे और उनकी माँ जर्मनी के एक प्रांत के मुख्यमंत्री की बेटी थीं. मैक्स मुलर ने संस्कृत के अलावा फ़ारसी और अरबी भाषाएँ भी पढ़ी थीं. मैक्स मुलर ने भारतीय धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन ईस्ट इंडिया कंपनी के ब्रिटेन लाए गए दस्तावेज़ों, ब्रहम समाज के भारतीय सदस्यों और ऑक्सफ़र्ड जैसे जाने-माने विश्वविद्यालयो में अन्य यूरोपीय विद्वानों के साथ मिलकर किया था. कुछ हिंदू लेखकों ने मैक्स मुलर की ईसाई धर्म को हिंदू धर्म से बेहतर बताने की कोशिश करने वाला कहकर आलोचना की है तो कई ईसाई धर्मगुरुओं ने उनके जीवनकाल में उन्हें ईसाइयों के ख़िलाफ़ बताया था. मैक्स मुलर ने एक बार कहा था, "अगर कोई मुझसे पूछे कि प्रकृति प्रदत्त गुणों का किस मानव मस्तिष्क ने सबसे बेहतर उपयोग किया है, किसने जीवन की सबसे बड़ी समस्याओं का गहराई से अध्ययन किया है – और वो कौन है जिसके साहित्य और ज्ञान को प्लेटो और कांट के दर्शन को समझने वालों को भी पढ़ना चाहिए तो मैं उसे भारत का रास्ता बताऊँगा.” |
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