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खाने की कला सिखाता है 'मीयरकैट' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वैज्ञानिक शोध से पता चला है कि नेवले की तरह दिखने वाला मीयरकैट ख़ुद बिच्छू जैसै ख़तरनाक जीवों को निगलना नहीं जानता बल्कि यह कला उसे सिखाई जाती है. खाने की शिक्षा-दीक्षा बड़ों की गहन देखरेख में दी जाती है. वैज्ञानिकों के इस नए ख़ोज के मुताबिक मीयरकैट मनुष्यों के अलावा दुनिया का दूसरा ऐसा प्राणी है जो अपने बच्चों को खाने की कला सिखाता है. इससे पहले हुए शोधों से यह बात सामने आई कि चींटी भी अपने बच्चों को खाने के गुर सिखाती है. मीयरकैट के बारे में ताज़ा शोध विज्ञान पत्रिका साइंस में छपा है. 'ईटिंग स्कूल' की पहली कक्षा में नर और मादा मीयरकैट अपने बच्चों के लिए ख़ुद शिकार कर इन्हें अपने बच्चों को सामने परोसते हैं. जब बच्चा कुछ बड़ा होता है तो उसे मृत शिकार को टुकड़ों में बाँटने की कला सिखाई जाती है ताकि खाने में आसानी हो. जब धीरे-धीरे जूनियर मीयरकैट को बिच्छू, छिपकली और मकड़ी जैसे ख़तरनाक जीवों का जायका जँचने लगता है तो उसे ख़ुद शिकार पर निकलने की प्रेरणा मिलती है. शोध कैंब्रिज विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने ख़ास तौर पर दक्षिण अफ्रीका में पाए जाने वाले मीयरकैट पर वर्षों तक अध्ययन किया है. लंबी पूंछों वाला यह जीव हमेशा 30-40 के झुंड में रहना पसंद करता है. मीयरकैट की गतिविधियों को नज़दीक से देखने वाले वैज्ञानिक एलेक्स थॉर्नटन ने बीबीसी से कहा कि खाने की कला सिखाने का वास्तव में कोई असर होता है या नहीं इसके लिए नायाब प्रयोग किए गए. मीयरकैट के हमउम्र बच्चों को तीन समूहों में बाँटा गया. एक समूह को खाने के लिए जीवित बिच्छू दिए गए. हालाँकि इसका डंक हटा दिया गया था. दूसरे समहू को मरे हुए बिच्छू दिए गए और तीसरे समूह के मीयरकैट को उबला हुआ अंडा दिया गया चौथे दिन सभी समूहों को जीवित बिच्छू दिए गए. इससे पता चला कि जिस समूह को प्रयोग के दौरान जीवित बिच्छू दिए गए थे वो बाक़ी दो समूहों को पीछे छोड़ कर चटकारें लेने में मशगूल था. |
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