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हाथ में आ गई खोपड़ी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आपने गुस्से में लोगों को कहते हुए सुना होगा कि आंखें निकाल कर हाथ में रख दूंगा लेकिन कोलकाता में एक व्यक्ति की खोपड़ी का एक हिस्सा ही उसके हाथ में आ गया है. शंभू राय नामक यह व्यक्ति जीवित और स्वस्थ है लेकिन उसकी खोपड़ी देखने के लिए सैकड़ों लोग कोलकाता के अस्पताल में जमा हो रहे हैं जहां शंभू का इलाज हो रहा है. शंभू बड़े आराम से अपनी खोपड़ी का बड़ा सा हिस्सा अपने हाथ में लेकर दिखाता है और कहता है कि वह इसे हमेशा अपने पास रखेगा. हालांकि कुछ डॉक्टर इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि शंभू के हाथ में उसकी खोपड़ी है या सर की खाल. खोपड़ी या खाल शंभू को पिछले साल अक्तूबर में बिजली का बड़ा झटका लगा था जिसके बाद उनका इलाज हो रहा था. शंभू का इलाज कर रहे सर्जन रतन लाल बंधोपाध्याय ने रायटर्स से कहा " जब शंभू पिछले साल हमारे पास आए थे तो उनकी खोपड़ी बुरी तरह जली हुई थी और कुछ महीनों के बाद वह बिल्कुल बाहर आ गई." डाक्टर कहते हैं कि शंभू की खोपड़ी का जो हिस्सा बाहर निकला है वह मृत हो गया था क्योंकि उसमें खून नहीं जा पा रहा था. डॉ बंधोपाध्याय कहते हैं कि खोपड़ी के नीचे नई हड्डियां बन रही हैं इसलिए खोपड़ी के निकलने का शंभू के स्वास्थय पर असर नहीं पड़ा है. डॉक्टरों ने कहा " जब खोपड़ी बाहर आई थी तो हमें लगा था कि शंभू की मौत हो जाएगी लेकिन नई हड्डियां और खाल निकल रही थी." डॉक्टर कहते हैं कि अब शंभू को कोई ख़तरा नहीं है.हालांकि एक डॉक्टर ने अपना नाम उजागर न करने की शर्त पर बीबीसी से कहा कि शंभू की खोपड़ी नहीं बल्कि उसके सर की खाल का बड़ा हिस्सा निकला है. विशेषज्ञ भले ही शंभू की खोपड़ी और खाल को लेकर बहस करते रहें शंभू मीडिया औऱ लोगों का ध्यान पाकर बहुत खुश हैं. वो कहते हैं " डॉक्टर बता रहे हैं कि मेरी नई खोपड़ी आ रही है लेकिन मैं अपनी पुरानी खोपड़ी जाने नहीं दूंगा. इसे संभाल कर रखूंगा." शंभू का कहना है कि उनकी खोपड़ी ने ही मुझे प्रसिद्ध कर दिया है और इसे मैं अस्पताल को वापस नहीं करूंगा. | इससे जुड़ी ख़बरें डॉक्टर दे सकेंगे भाँग01 सितंबर, 2003 | विज्ञान आवाज़ 'जवान' करने के लिए ऑपरेशन21 अप्रैल, 2004 | विज्ञान आँख की रौशनी के लिए नई किरण31 जनवरी, 2005 | विज्ञान किसी ने नहीं देखा मुड़-मुड़के...11 जनवरी, 2006 | विज्ञान विज्ञान की सफलता का नया चेहरा06 फ़रवरी, 2006 | विज्ञान कुआँरापन वापस पाने की चाहत04 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस मध्यकाल में भी जटिल सर्जरी संभव थी06 अक्तूबर, 2004 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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