|
श्वेत और हरित क्रान्ति... | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुदूली, नैनीताल उत्तरांचल से राजू शर्मा पूछते हैं कि भारत में श्वेत क्रान्ति और हरित क्रान्ति के जनक कौन थे. वर्गीज़ कुरियन को भारत की श्वेत क्रान्ति का जनक माना जाता है. उन्होंने गुजरात के आनन्द शहर में सहकारी डेरी विकास के एक मॉडल की स्थापना की और भारत को दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बना दिया. उन्होंने अमूल जैसे ब्रांड स्थापित किए जिन्हें भारत का बच्चा-बच्चा जानता है. जहाँ तक हरित क्रान्ति का सवाल है तो उसके जनक थे सी सुब्रमण्यम. 1943 में बंगाल में ज़बरदस्त अकाल पडा जिसमें कोई चालीस लाख लोग मारे गए थे. आज़ादी के बाद खाद्यान्न के उत्पादन पर काफ़ी ज़ोर दिया गया लेकिन उतनी सफलता नहीं मिली. फिर सत्तर के दशक में जब सी सुब्रमण्यम खाद्य और कृषि मन्त्री बने तो उन्होंने हरित क्रान्ति की योजना तैयार की जिसमें खेतिहर भूमि का विस्तार, एक साल में दो फ़सलें उगाना और बेहतर बीज आयात करना और तैयार करना शामिल था. जिसका नतीजा ये हुआ कि दशक के अंत तक खाद्यान्न के उत्पादन में 30 प्रतिशत वृद्धि हो गई. गोलपहाड़ी जमशेदपुर से जंगबहादुर सिंह और उमा सिंह और महिनाथपुर से बड़ा बाबू झा ने पूछा है कि पी नोट्स या पार्टिसिपेटरी नोट्स क्या होते हैं और इनका हैज फ़ंड से क्या संबंध है. पार्टिसिपेटरी नोट्स वो दस्तावेज़ होते हैं जिनके माध्यम से कुछ व्यक्तियों या संस्थाओं को भारतीय शेयर बाज़ार में सहभागिता करने का मौक़ा मिल जाता है. आमतौर पर ऐसे लोग अपने नाम से सीधे निवेश नहीं करना चाहते तो वो इस तरह का रास्ता अपनाते हैं. जैसे एफ़आईआई या फ़ॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर भारत में पंजीकरण करा सकते हैं और निवेश कर सकते हैं. लेकिन कई निवेशक ऐसे हो सकते हैं जो भारतीय बाज़ार में निवेश करके मुनाफ़ा तो कमाना चाहते हैं लेकिन अपनी पहचान ज़ाहिर नहीं करना चाहते. तो ऐसे निवेशक किसी देश में एक कम्पनी बनाकर ऐसे फ़ॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर को पैसा दे सकते हैं जो भारत में पंजीकृत है. लेकिन भारत में इस बात को लेकर चिंता थी कि बाज़ार में पैसा आ किसका रहा है. इसलिए पार्टिसिपेटरी नोट्स के रास्ते पर कुछ प्रतिबंध लगाए गए हैं. जहाँ तक हैज फ़ंड का सवाल है तो ये ऐसे संगठन हैं जिनका गठन कुछ लोग मिलकर करते हैं. ये संगठन उधार लेकर देश-विदेश के शेयर बाज़ारों में कम समय के लिए पैसा लगाते हैं और बहुत तेज़ी से पैसा उगाहते हैं. हैज फ़ंड सरीखे संगठन यह काम पार्टिसिपेटरी नोट्स के ज़रिये करते रहे हैं. डीऐनए का पूरा रूप क्या है. जानना चाहते हैं कटिहार बिहार से हरेन्द्र प्रसाद साहा.
डीऐनए का पूरा रूप है डिऑक्सीरीबो न्यूक्लिक एसिड. यह कोशिकाओं के केन्द्र में पाया जाने वाला रसायन होता है जिसमें आनुवांशिक जानकारी रहती है. यूं समझ लीजिए कि डीऐनए में शरीर के निर्माण की रूपरेखा रहती है. भारत का पहला आईआईटी संस्थान कहाँ खुला था. पूछते हैं ढिलालपुर कटिहार बिहार से मोहम्मद नेहाल अहमद. भारत का पहला आईआईटी यानी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नॉलॉजी, कोलकाता के पास खड़गपुर शहर में 1951 में स्थापित हुआ था. भारत की आज़ादी से पहले वाइसराय की कार्यकारी परिषद के सदस्य सर जोगेन्द्र सिंह ने भारत के औद्योगिक विकास के लिए एक समिति का गठन किया जिसे उच्च तकनीकी शिक्षा संस्थाएँ स्थापित करने का काम सौंपा गया. नलिनी रंजन सरकार की अध्यक्षता में इस समिति ने देश के विभिन्न भागों में इन संस्थाओं की स्थापना की सिफ़ारिश की. ये संस्थाएँ वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के प्रशिक्षण के लिए खोली गईं जिससे आज़ादी के बाद भारत के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए कार्यबल तैयार किया जा सके. इस समय सात आईआईटी संस्थान हैं, खड़गपुर, मुम्बई, चेन्नई, कानपुर, दिल्ली, गोवाहाटी और रुड़की में. इनमें से कुछ की स्थापना यूनेस्को, जर्मनी, अमरीका और सोवियत संघ की आर्थिक और तकनीकी मदद से की गई. आगे तीन और आईआईटी स्थापित करने की योजना है. दुर्गापुर अंगुल उड़ीसा से ज्योतिरंजन बिस्वाल ने सवाल किया है कि रूसी लेखक लियो टॉल्स्टॉय के कितने बेटे-बेटियाँ थे. लियो टॉल्स्टॉय ने सन् 1862 में 34 साल की उम्र में 19 वर्षीय सोफ़िया सोन्या आन्द्रेयेवना बैहर्स से विवाह किया. उनके कुल बारह बच्चे हुए. सर्गेइ, तातियाना, इल्या, लियो, मारिया माशा, पेत्या, निकोलस, एक बेटी जो जन्म के तुरन्त बाद ही मर गई, आन्द्रे, ऐलैक्सिस, ऐलैक्ज़ान्द्रा साशा और इवान. मानव जाति का विकास एक कोशीय जीव प्रोटोज़ोआ से हुआ है. तो क्या इसमें भी लिंग भिन्नताएँ थीं. यह जानना चाहते हैं खखाइजखोर गोरखपुर उत्तर प्रदेश से सचिन कुमार शुक्ल. प्रोटोज़ोआ अत्यन्त सूक्ष्म जीव होते हैं जिन्हे माइक्रोस्कोप से ही देखा जा सकता है. लेकिन ये बहु कोशीय जीवों की तरह सांस लेते हैं, गतिशील होते हैं और प्रजनन करते हैं. इनमें लिंग भिन्नताएं नहीं होतीं यानि नर मादा नहीं होते बल्कि एक प्रोटोज़ोआ के दो में विभाजित होने से प्रजनन होता है. प्रोटोज़ोआ की बीस हज़ार से अधिक प्रजातियों के बारे में जानकारी है जिनमें से अधिकांश पानी में या नम इलाक़ों में रहते हैं. ये अपनी झिल्ली से ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं. इनका भोजन बैक्टीरिया और अन्य जीवों के अपशिष्ट होते हैं. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||