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मंगलवार, 29 अप्रैल, 2008 को 15:04 GMT तक के समाचार
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खाद्यान्न संकट टास्क फ़ोर्स का गठन
खाद्यान्न
दुनिया के कई देश खाद्यान्न संकट से जूझ रहे हैं
दुनिया भर में चल रहे खाद्यान्न संकट से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने एक कार्यदल के गठन का निर्णय किया है.

स्विट्ज़रलैंड की राजधानी बर्न में अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की एक बैठक के अंत में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने कहा कि इस सबसे पहला काम ये है कि उन लाखों लोगों तक खाद्य सामग्री पहुंचाई जाए जिन्हें महंगाई के कारण भूखे रहना पड़ रहा है.

लेकिन दूरगामी उपायों में संयुक्त राष्ट्र चाहता है कि किसानों की मदद की जाए और कृषि सब्सिडी को ख़त्म किया जाए.

बीबीसी संवाददाता के मुताबिक दुनिया भर में खाद्य पदार्थों की बढ़ती क़ीमतों पर विचार करने के लिए कार्य दल का गठन करना यह दिखाता है कि संयुक्त राष्ट्र इस विश्व संकट पर कितनी गंभीरता से सोच रहा है.

संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि खाद्य पदार्थों की बढ़ती क़ीमतों की वजह से लगभग दस करोड़ अतिरिक्त लोग भूख का सामना कर रहे हैं.

 जिस पर हम सब सहमत हैं वो ये है कि भूखे लोगों को भोजन मुहैया कराया जाए. अगर हम इन आपात ज़रूरतों को पूरा करने के लिए तुरंत धन मुहैया नहीं कराते हैं तो भूख, कुपोषण और सामाजिक अशांति का दायरा अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ जाने का बड़ा ख़तरा है
बान की मून

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून का कहना है भूख का सामना करने वाले इन लोगों की ज़रूरतें अब और इंतज़ार नहीं कर सकतीं.

बान की मून का कहना था, "सबसे पहले और तत्काल प्राथमिकता जिस पर हम सब सहमत हैं वो ये है कि भूखे लोगों को भोजन मुहैया कराया जाए. अगर हम इन आपात ज़रूरतों को पूरा करने के लिए तुरंत धन मुहैया नहीं कराते हैं तो भूख, कुपोषण और सामाजिक अशांति का दायरा अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ जाने का बड़ा ख़तरा है."

संयुक्त राष्ट्र ने जो कार्यदल बनाया है उसका काम फौरी तौर पर तो विकासशील देशों में किसानों को वित्तीय सहायता मुहैया कराना है.

जिन देशों में खाद्य पदार्थों की किल्लत हुई है उनमें बीज ख़रीदने के लिए एक अरब 70 करोड़ डालर की एक योजना बनाई गई है.

दीर्घ अवधि के लिए संयुक्त राष्ट्र चाहता है कि इस तरह का संकट की स्थिति भविष्य में फिर से ना पैदा हो लेकिन ऐसे संकट का हल निकालना इतना आसान भी नहीं नज़र आता.

बान की मून ने कहा, "हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय का आहवान करते हैं कि विकसित देशों में व्यापार को गड़बड़ा देने वाली सब्सिडी के मुद्दे के बारे में सोचें और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर दोहा दौर की बातचीत पर भी विचार करें. इतना ही नहीं, दीर्घ अवधि के लिए हमें जलवायु परिवर्तन की समस्याओं से पैदा होने वाली चुनौतियों के बारे में भी सोचना होगा."

विकसित देशों में खेतीबाड़ी के लिए सब्सिडी दिए जाने के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार बातचीत में गतिरोध पैदा हो गया है लेकिन कुछ प्रगति की उम्मीद भी की जा रही है.

विश्व व्यापार संगठन के मुखिया पास्कल लैमी ने भरोसा जताया है कि संयुक्त राष्ट्र ने कुछ ठोस कार्रवाई करने का जो आहवान किया है उससे व्यापार बातचीत में कुछ जान पड़ने की उम्मीद है और कोई समझौता संभव नज़र आता है.

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