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'खाद्यान्न कीमतों में वृद्धि पर चेतावनी' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगातार बढ़ोत्तरी ने ग़रीब देशों के करोड़ों लोगों के समक्ष गहरा संकट खड़ा कर दिया है. संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफ़एओ) एफ़एओ का कहना है कि पिछले वर्ष खाद्य पदार्थों की कीमतों में 40 प्रतिशत तक का अभूतपूर्व उछाल आया है और कई ग़रीब देश इस महँगाई को झेलने में असमर्थ हैं. संगठन ने ग़रीब देशों के किसानों को बीज और खाद खरीदने में मदद करने और खाद्यान्न उत्पादन पर जैव ईंधन के प्रभाव की समीक्षा की अपील की है. मदद की अपील एफ़एओ के महानिदेशक जैक्स डियोफ़ ने कहा, "महँगाई की मार से बुरी तरह त्रस्त देशों के ग़रीब किसान और उनके परिवार मदद के बिना नहीं उबर पाएँगे." एफ़एओ ने 1990 में महँगाई सूचकांक शुरू किया था और इसके बाद से पिछले साल इसमें सबसे अधिक 40 फ़ीसदी का उछाल आया है. संगठन का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण सूखा और बाढ़ से फसलों को हुआ नुकसान इसकी वजह है. इसके अलावा तेल की कीमतों में उछाल के कारण जैव ईंधन की माँग में वृद्धि से भी खाद्यान्नों के दाम बढ़े हैं. एफ़एओ का कहना है कि विभिन्न देशों में लोगों की खाने की बदलती आदतों और कई देशों में अनाज के दामों में बढ़ोत्तरी से भी यह संकट बढ़ा है. संगठन ने फ़सल उत्पादन बढ़ाने के लिए ग़रीब देशों के किसानों को बीज और खाद उपलब्ध कराने के लिए मदद की आहवान किया है. डियोफ़ ने कहा कि मलावी में किसानों की मदद के अच्छे नतीजे रहे हैं और देशभर में मक्का उत्पादन बढ़ा है. | इससे जुड़ी ख़बरें अमरीका को यूरोपीय देशों की चेतावनी13 दिसंबर, 2007 | पहला पन्ना मौत की सज़ा रोकने का प्रस्ताव15 नवंबर, 2007 | पहला पन्ना अफ़्रीका में बीमारियों का ख़तरा16 सितंबर, 2007 | पहला पन्ना अफ़्रीकी देशों में बाढ़ का कहर15 सितंबर, 2007 | पहला पन्ना एड्स से लड़ने के लिए पैसे कम26 सितंबर, 2007 | पहला पन्ना ऊँटनी का दूध कितना पौष्टिक!03 अक्तूबर, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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