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एड्स से लड़ने के लिए पैसे कम | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एड्स से विश्व स्तर पर निपटने के लिए गठित संयुक्त राष्ट्र संस्था का कहना है अगर उन्हें जल्दी से जल्दी अतिरिक्त सहायता न मिली तो वो अपने लक्ष्य पूरे नहीं कर सकेगी. एड्स और एचआईवी पर गठित संयुक्त राष्ट्र कार्यक्रम ने 2010 तक यह लक्ष्य निर्धारित किया था कि वो दुनिया के सभी एड्स रोगियों को इलाज मुहैया कराएगी. संयुक्त राष्ट्र संस्था का कहना है कि जिस तरह से दुनिया के विभिन्न देश एड्स से लड़ने के लिए कम पैसे खर्च कर रहे हैं उसे देखते हुए यह संभव नहीं है कि 2010 तक एड्स रोगियों को इलाज की सुविधा मुहैया कराई जा सके. संस्था के अनुसार विभिन्न देशों के इस रवैये के कारण सह्स्त्राब्दि लक्ष्यों के तहत 2015 तक एड्स की रोकथाम का जो लक्ष्य बना था वो पूरा होता नहीं दिख रहा है. वित्तीय मामलों से जुड़ी अपनी रिपोर्ट में संस्था का कहना है कि 2007 में संस्था को केवल सात अरब डॉलर की राशि मिली है जबकि 2010 के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए उसके अनुमान के अनुसार 32 से 51 अरब डॉलर की ज़रुरत है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले तीन साल में महत्वाकांक्षी उद्देश्यों को पूरा करने के लिए जल्द से जल्द अतिरिक्त संसाधनों और स्त्रोतों की ज़रुरत है तभी दुनिया भर में एड्स रोगियों को इलाज मुहैया कराने की प्रक्रिया तेज़ हो सकेगी. संस्था ने अपनी रिपोर्ट में ब्राज़ील और बोत्सवाना की तारीफ़ करते हुए कहा है कि इन देशों में अधिकतर एड्सरोगियों को इलाज की सहूलियत मिल रही है. हालांकि कई देश अभी भी ऐसे हैं जहां पैसों की कमी के कारण एड्सरोगियों की स्थिति ख़राब होती जा रही है. रिपोर्ट के अंत में वैकल्पिक वित्तीय योजना का सुझाव भी दिया गया है जिसके तहत 2010 के लक्ष्यों को आगे बढ़ाकर 2015 तक पूरा करने की बात कही गई है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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