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अमरीका को यूरोपीय देशों की चेतावनी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
यूरोपीय संघ ने अमरीका को ग्रीन हाउस समूह की गैसों का उत्सर्जन कम करने के कुछ लक्ष्य तय करने पर राज़ी करने लिए कुछ नाटकीय प्रयास शुरू किए हैं. यूरोपीय संघ के अनेक देशों ने चेतावनी के अंदाज़ में कहा है कि अमरीका ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने के प्रयासों के तहत लक्ष्य तय करने वाले बाली समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेगा तो यूरोपीय देश राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के उस भाषण का बहिष्कार करेंगे जो वह अगले महीने जलवायु परिवर्तन पर देने की योजना बना रहे हैं. बीबीसी के पर्यावरण मामलों के संवाददाता रोजर हराबीन का कहना है कि माना जा रहा है कि संयुक्त राष्ट्र का ये बाली सम्मेलन अगले दो सालों की बातचीत के लिए एक रोडमैप तैयार करेगा. संयुक्त राष्ट्र चाहता है कि इस रोडमैप में ये प्रस्ताव भी शामिल हो कि अमीर देश ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन 25 से 40 फीसदी तक कम कर देंगे लेकिन अमरीका रोडमैप में इस तरह के किसी लक्ष्य को शामिल करने पर तैयार नहीं है. अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश का कहना है कि दुनिया के प्रमुख देश अगले महीने होनोलूलु में मिलकर जलवायु परिवर्तन पर एक अलग ही तरह के समझौते पर बातचीत करें. विश्व वन्य निधि के अध्यक्ष जिम लीप का मानना है कि दुनिया के सबसे ताक़तवर देश के रूप में अमरीका को इस तरह के समझौते का विरोध करने की जगह इसे अमल में लाने की पहल करनी चाहिए. इस बातचीत में अमरीका समझौते से बिल्कुल अलग भाषा प्रयोग कर रहा है. ये उदाहरण है इस बात का कि वो थोड़-थोड़ा कर समझौते के रास्ते में रोड़ा अटकाने की कोशिश कर रहे हैं. उधर पूर्व अमरीकी उप राष्ट्रपति अल गोर ने भी बाली में सभी देशों के प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि अमरीका बाली सम्मेलन में प्रगति नहीं होने दे रहा है. "मैं एक दुखदाई सच बोलने जा रहा हूँ. मेरा अपना देश, अमरीका ही बाली में प्रगति के रास्ते में अवरोध पैदा कर रहा है. ये हम सब जानते हैं लेकिन ये ज़रूरी नहीं है कि मेरा देश ही आगे बढ़ने के लिए क़दम बढ़ाए, जिसे हम आगे बढ़ें. वहीं इसी दौरान जर्मनी के एक सरकारी प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया है कि अगर अमरीका बाली के सम्मेलन में प्रगति के रास्ते में अवरोध पैदा करता है तो यूरोपिय देश इस बैठक का बहिष्कार करेंगे. ऐसे में राष्ट्रपति बुश असमंजस की स्थिति में फंस गए हैं. या तो उन्हें गैस उत्सर्जन घटाने के मसले पर हामी भरनी होगी – जो कि वो नहीं चाहते – या फिर उन्हें अमरीकी जनता को इस बात का जवाब देना होगा कि यूरोपिय देश उस बैठक का बहिष्कार क्यों कर रहे हैं, जिसका प्रस्ताव खुद उन्होंने दिया था. | इससे जुड़ी ख़बरें जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ी चुनौती: मून12 दिसंबर, 2007 | पहला पन्ना जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर सहमति08 सितंबर, 2007 | पहला पन्ना असहमतियों के बीच सम्मेलन शुरु06 जून, 2007 | पहला पन्ना जलवायु पर प्रस्ताव अमरीका को नामंज़ूर06 जून, 2007 | पहला पन्ना बुश उत्सर्जन पर नए लक्ष्य के पक्ष में31 मई, 2007 | पहला पन्ना उत्सर्जन कम करने का मसौदा ख़ारिज26 मई, 2007 | पहला पन्ना 'युद्ध जितना ख़तरनाक है जलवायु परिवर्तन'02 मार्च, 2007 | पहला पन्ना बाध्यकारी प्रावधान स्वीकार नहीं:अमरीका03 फ़रवरी, 2007 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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