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सबरीमाला के कर्मचारी पहन सकेंगे कच्छा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दक्षिण भारत में प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर के तकरीबन दो सौ कर्मचारियों ने कच्छा पहनकर मंदिर में काम करने की लड़ाई जीत ली है. केरल राज्य मानवाधिकार आयोग ने मंदिर प्रबंधन से उस ड्रेस कोड को वापस लेने कहा है जिसके तहत कोई भी कर्मचारी मंदिर में कच्छा नहीं पहन सकता. मंदिर प्रबंधन ने चोरी के मामले सामने आने के बाद दस साल पहले कर्मचारियों के लिए यह ड्रेस कोड बनाया था. केरल में स्थित सबरीमाला मंदिर दक्षिण भारत में तिरुपति मंदिर के बाद दूसरा सबसे व्यस्त मंदिर है. अनुमान है कि दर्शन के ख़ास मौसम में यहाँ पाँच करोड़ लोग आते हैं. नक़द-ज़ेवरात मंदिर प्रबंधन को नक़द के साथ ही बड़ी संख्या में सोना, चाँदी और हीरे के ज़ेवरात चढ़ावे में मिलते हैं. मंदिर के कर्मचारियों को चढ़ावा वाले कमरों में सिर्फ़ धोती पहनने की अनुमति दी गई थी. इसी बात को लेकर किसी गुमनाम आदमी ने राज्य मानवाधिकार आयोग के पास गुहार लगाई थी. आयोन ने राज्य सरकार से सुनिश्चित करने कहा है कि मंदिर के कर्मचारी कच्छा पहन सकें. चढ़ावा की चोरी रोकने के लिए आयोग ने सरकार से मंदिर में आधुनिक सुविधाओं का भी प्रबंध करने कहा है. पिछले साल सबरीमाला मंदिर को दान और चढ़ावा के रूप में करीब 80 करोड़ रुपए मिले थे. मंदिर के भंडार घर में एक समय में 60 कर्मचारी काम करते हैं. कर्मचारियों का कहना है कि नक़दी और ज़ेवरात की मात्रा इतनी अधिक होती है कि उसे सँभालना आदमी के बूते से बाहर है. 'साफ़-सफ़ाई की दिक्कत'
पर्यवेक्षकों का कहना है कि साफ़-सफ़ाई के अलावा मंदिर में जोरी रोकने के लिए आधुनिक जाँच सुविधाओं की ज़रूरत है. केरल के पश्चिमी घाट पर सहयाद्रि पहाड़ियों पर बने इस मंदिर तक जाने के लिए श्रद्धालुओं को पंपा नदी के किनारे से तीन घंटे की चढ़ाई करनी पड़ती है. मंदिर में शौच या कचरे के निबटान की कोई व्यवस्था नहीं है. राज्य के जल संसाधन मंत्री एनके प्रेमचंद्रन ने हाल ही में पंपा नदी में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताई थी और कहा था कि इससे लोगों के स्वास्थ्य को गंभीर ख़तरा पैदा हो रहा है. सरकार अब मंदिर के मामलों की देखरेख के लिए एक ट्रस्ट बनाने की सोच रही है. |
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