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जब तक रहेगी दुनिया, दीया जलता रहेगा... | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के सिंध प्रांत में एक मंदिर में डेढ़ सौ सालों से एक दीप लगातार जल रहा है. वहाँ के लोगों का मानना है कि जब तक यह दुनिया क़ायम है तब तक यह दीप जलता रहेगा. हैदराबाद से क़रीब 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित टंडो अल्लाहयार शहर के श्री रामदेव मंदिर में यह दीप रखा हुआ है. हिंदू पंचायत के अध्यक्ष और इस मंदिर के संचालक ईश्वर दास ने बीबीसी हिंदी डॉट कॉम को बताया की 150 साल पहले यहाँ के एक निवासी श्री रूपचंद खत्री को औलाद नहीं हो रही थी तो वह राजस्थान के रूणिचा शहर के श्री रामदेव मंदिर गए. मंदिर में उन्होंने प्रार्थना की और इसके बाद उन्हें औलाद हो गई. ईश्वर दास ने बताया, "रूपचंद खत्री जी वहाँ के मंदिर से एक जलता हुआ दीपक लाए थे और यहाँ आकर यह मंदिर आबाद किया और इसका नाम भी श्री रामदेव रख दिया." उन्होंने कहा कि मंदिर आज तक आबाद है और दीपक भी जल रहा है, उनके पुरखों ने इसे कभी भी बुझने नहीं दिया और न ही उन्होंने. उत्सव इस मंदिर में हर साल सितंबर के महीने में एक बहुत बड़ा चार दिवसीय उत्सव आयोजित किया जाता है और पाकिस्तान के विभिन्न शहरों और भारत से इस दीप का दर्शन करने यात्री पैदल पहुँचते हैं. सिंध के सभी मंदिरों में से श्री रामदेव मंदिर एक मात्र मंदिर है जहाँ हर वक़्त भीड़ लगी रहती है और हर महीने की नौ तारीख़ को तो उत्सव जैसा माहौल होता है. ईश्वर दास का कहना है कि जब भारत में बाबरी मस्जिद का विध्वंस हुआ था तो लोगों ने ग़ुस्से में आकर इस मंदिर को गिरा दिया था. उन्होंने कहा, "पूरा मंदिर नष्ट हो गया था लेकिन दीप जल रहा था, यह एक चमत्कार था." उन्होंने कहा कि अगर दीप बुझ जाता तो सिंध में कोई भी हिंदू ज़िंदा न रहता और इस दीप के कारण ही सिंध में हिंदू जीवित है और अब तो बेहतर जीवन बिता रहे है. उन्होंने कहा, "पहले तो 20 वर्ग फ़ुट पर मंदिर था और आज यह 100 वर्ग फ़ुट पर फैला हुआ है, यह अल्लाह की मेहरबानी है." हर महीने की नौ तारीख़ को पाकिस्तान के विभिन्न शहरों से यात्री इस दीप के दर्शन के लिए पैदल आते हैं और इनमें बड़ी संख्या महिलाओं की होती है. यात्री तीन दिनों तक इस मंदिर में रहते हैं और हिंदू पंचायत की ओर से उन्हें खाना, पीना और रहने की सविधाएँ उपलब्ध कराई जाती है. आस्था सिंध के एक छोटे से शहर खिपरो से पैदल पहुँचे एक यात्री ने बताया वे कुछ साल पहले काफ़ी बीमार पड़ गए थे और उनकी टांगों में बहुत दर्द रहता था.
उन्होंने बताया, "मैंने काफ़ी इलाज करवाया और एक बार कराची भी गया लेकिन दर्द ख़त्म नहीं हुआ, किसी ने सलाह दी और मैं श्री रामदेव की मूर्ति और दीप का दर्शन करने पहुँचा तो दर्द ख़त्म हो गया और आज तक कभी भी नहीं हुआ है." उन्होंने बताया कि हर महीने की नौ तारीख़ को वे अपने पूरे परिवार के साथ पैदल यहाँ पहुँचते हैं. हिंदू पंचायत के सदस्य रतन लाल ने बताया कि इस मंदिर में जो भी अपने मन की मुराद लेकर आता है उनकी मुराद पूरी हो जाती है. उन्होंने कहा, "उत्सव के समय हमारे मुसलमान भाइयों का अच्छा सहयोग मिलता है और यात्रियों को अपने घरों में रहने की जगह देते हैं.” उन्होंने कहा कि अगर भारत और पाकिस्तान के संबंध बेहतर होते हैं तो उन्हें बहुत प्यार मिलता है और काफ़ी सहयोग भी और जब रिश्तों में थोड़ी सी भी खटास हो जाती है तो उन्हें भी कुछ मैली आँखों से देखा जाता है. रतनलाल ने कहा कि इस दीप ने हिंदुओं और मुसलमानों के लाखों घरों को रोशन रखा है. उन्होंने बताया, "उत्सव के समय यहाँ के हमारे मुसलमान भाई काफ़ी पैसा कमाते हैं और यह श्री रामदेव और इस दीप के बदौलत है." श्री रामदेव मंदिर में रतनलाल ने दीप के सामने भारत और पाकिस्तान के बेहतर संबंधों के लिए प्रार्थना की. |
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