BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
सोमवार, 08 जनवरी, 2007 को 12:12 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
प्रभु के लिए जयपुरी रज़ाई की गर्माहट

प्रभु को ठंड से बचाने के लिए जयपुरी रज़ाई का अर्पण
उत्तर भारत जहाँ शीतलहरी की चपेट में है और लोग सर्दी से बचाव के लिए गर्म कपड़ों का सहारा ले रहे हैं वहीं जयपुर में देवी-देवताओं को भी गर्म कपड़े पहनाकर उनकी सर्दी दूर भगाई जा रही है.

जयपुर में इन दिनों गर्म तासीर वाला 'पौष बड़ा' भगवान को प्रसाद के रूप में चढ़ाया जा रहा है और हर रोज़ हज़ारों भक्त प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं.

शीत ऋतु में भगवान को ऊनी वस्त्रों के अलावा मंदिरों को हीटर जैसे उपायों की मदद लेकर गर्म रखने के प्रयास किए जा रहे हैं.

अनेक मंदिरों में रात्रि-विश्राम के समय भगवान को रजाई मुहैया कराई जा रही है.

तो क्या भगवान को भी ठंड लगती है ?

जयपुर के बड़ी चौपड़ स्थित तीन सौ साल पुराने लक्ष्मी नारायण मंदिर के महंत पुरुषोत्तम भारती कहते हैं," वैष्णव धर्म की मान्यता है कि भगवान का रूप वात्सल्य भरा है, वे छोटे बालक की तरह हैं."

पुरुषोत्तम भारती के मुताबिक जयपुर छोटी काशी है, जहाँ सात हज़ार छोटे-बड़े मंदिर हैं और मंदिर में इन दिनों गर्म तासीर का प्रसाद चढ़ाया जा रहा है और ऊनी पोशाक पहनाई जा रही है.

मंहत भारती कहते हैं," घट-घट में भगवान हैं. हम सुबह गुनगुने पानी से भगवान का अभिषेक करते हैं और रात को रजाई अर्पित करते हैं."

जयपुर मेटल के सामने बने एक हनुमान मंदिर में मूर्ति को कोट पहनाया गया है और गर्मी के लिए अँगीठी का सहारा लिया जा रहा है.

पौष बड़ा

जयपुर शहर में रविवार को 50 से अधिक 'पौष बड़ा' उत्सव आयोजित किए गए.

 घट-घट में भगवान हैं. हम सुबह गुनगुने पानी से भगवान का अभिषेक करते हैं और रात को रजाई अर्पित करते हैं
पुरुषोत्तम भारती, मंदिर के महंत

सामूहिक भक्ति भाव से इस आयोजन में हज़ारों श्रद्धालुओं ने अपने इष्टदेव को भोग लगाने के बाद तेल, घी, मिर्च, जीरा, धनिया और पौष्टिक आहार से बने 'पौष बड़े' का प्रसाद दिया गया.

राजस्थान ज्योतिष परिषद् के सचिव पंडित विनोद शास्त्री कहते हैं," इसका शास्त्रीय महत्व है. 'पौष बड़े' में इस्तेमाल होने वाली सामग्री का ग्रहों से संबंध है. जैसे शनि का तेल से, मिर्च का मंगल से, जीरा और धनिया का बुध ग्रह से, गेहूँ का चंद्रमा और पृथ्वी से और शक्कर का शुक्र से संबंध है.

जब इन ग्रहों की ऊर्जा आदमी को मिलती है तो शीतकाल में पूस प्राण संचारित होता है."

श्री शास्त्री कहते हैं," हमारी संस्कृति में कोई भी आहार प्रसाद के रूप में बनाया जा सकता है. इसलिए सर्दी में भगवान को उष्मा पैदा करने वाली सामग्री अर्पित की जाती है. यह प्रतीकात्मक है."

महंत पुरुषोत्तम भारती कहते हैं," ऋतुकाल के अनुसार भगवान का प्रसाद और परिधान बदल जाता है.शीतकाल में प्रभु को सौंठ, अजवाइन और तिल से बना प्रसाद चढ़ाया जाता है. वर्षा ऋतु में हल्के वस्त्र पहनाए जाते हैं और जल विहार का आयोजन किया जाता है."

एक श्रद्धालु मंजू कहती हैं," हर व्यक्ति और प्राणी में भगवान है इसलिए जो भक्त को महसूस होता है वही भगवान को अर्पित किया जाता है."

इससे जुड़ी ख़बरें
कोहरे से आवागमन बुरी तरह प्रभावित
02 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस
उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड
07 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस
सभी के आराध्य हैं चातन स्वामी
10 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस
विवाद का विषय बना कृष्ण का आधुनिक रूप
19 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस
नेपाल में 'देवी पूजा' की जाँच के आदेश
02 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>