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सभी के आराध्य हैं चातन स्वामी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के दक्षिण राज्य केरल के उत्तरी ज़िले त्रिचूर से क़रीब 60 किलोमीटर दूर स्थित पेरिंगटुकर एक अनोखा गाँव है. यहाँ करीब़ 60 छोटे-बड़े मंदिर हैं जहाँ भैंस पर सवार चातन स्वामी नाम के देवता की पूजा की जाती है. स्थानीय लोगों के घरों में चातन स्वामी के अनेक मंदिर चलाए जा रहे हैं और यहाँ का अधिकतर व्यापारी वर्ग इनकी पूजा करता है. पर अब चातन स्वामी केवल हिंदुओं के देवता नहीं रह गए हैं. अनेक मुस्लिम और ईसाई व्यापारी भी इनको मानने लगे हैं. भिन्न हैं भक्त कनाडीमठ्म के पास एक दुकान चला रहे इलियास का कहना है कि मुस्लिम समुदाय में चातन देवता काफ़ी लोकप्रिय हैं. अधिक धन और मुनाफ़े की चाह में हर धर्म का व्यापारी यहाँ आता है. इलियास कहते हैं, "तांत्रिक देवता की पूजा करना सरासर इस्लाम के ख़िलाफ़ है लेकिन यह याद रखना ज़रूरी है कि इस्लाम पर हिंदू सभ्यता का असर हुआ है." सूरज के ढलने के बाद कई लोग रात के सन्नाटे में चातन स्वामी के मंदिर जाते हैं. कनाडीमठ्म के पुजारी, केके सिवानंदन ने कहा कि चातन स्वामी को शराब और मुर्गी का चढ़ावा चढ़ाया जाता है. कई लोग तो विदेशी शराब लेकर पूजा करने आते हैं. प्रथा यह भी है कि चातन स्वामी अगर किसी की मनोकामना पूरी कर देते हैं तो उसे अपने मुनाफ़े का 10 प्रतिशत हिस्सा मंदिर में दान करना पड़ता है. चातन पूजा न करने के लिए स्थानीय चर्च ने भी ईसाइयों को हिदायत दी लेकिन चातन स्वामी के ईसाई समर्थक कम नहीं हुए. क्यों हैं पूज्य स्थानीय सेंट पीटर्स चर्च के पॉल ने बताया कि पूरे समाज में धन कमाने और मुनाफ़े की होड़ लगी है. ईसाई लोग भी इसी समाज का हिस्सा हैं.
वो बताते हैं, "कई लोग तो अपना सारा धन खो देने के बाद चर्च वापिस आते हैं. चातन पूजा में वो अपना पैसा लुटा देते हैं." चातन स्वामी की पूजा करने के लिए लोग केरल से ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्य तमिलनाडु से भी आते हैं. चातन पूजा की लोकप्रियता के कारण कुछ लोगों ने अपने मकानों में मंदिर बना लिए हैं. हर मंदिर का एजेंट गाँव के बाहर से आ रहे लोगों को लुभाने की कोशिश करता है. कई मासूम लोग भी इसमें फंस जाते हैं. आयकर विभाग ने पिछले कुछ वर्षों में कुछ मंदिरों पर छापे भी मारे थे. | इससे जुड़ी ख़बरें प्रबंधन शरणं गच्छामि08 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस उस्ताद ने काटे बच्चों के कान16 सितंबर, 2004 | भारत और पड़ोस हर ललक पूरी करने की लालसा | भारत और पड़ोस संतों पर सरकारी 'मेहरबानियाँ' | भारत और पड़ोस केरल में भी है एक मॉस्को07 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस छोटे क़द वालों ने माँगे अपने हक़04 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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