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छोटे क़द वालों ने माँगे अपने हक़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केरल में छोटे क़द वाले लोगों का एक सम्मेलन हुआ जिसमें अपने हक़ के लिए संघर्ष करने का संकल्प किया गया. केरल स्मॉल मेन एसोसिएशन के 300 सदस्य हैं और वे माँग कर रहे हैं कि सरकार उन्हें विशेष दर्जा दे. पिछले दिनों एक मलयालम फ़िल्म रिलीज़ हुई थी 'अदभुत द्वीप' जिसमें लगभग 300 बौने लोगों ने अभिनय किया था. माना जा रहा है कि इस फ़िल्म की सफलता से प्रेरित होकर ही इन लोगों ने ऐसी माँग उठाई है. इन लोगों का कहना है कि उन्हें नौकरियों में आरक्षण, मुफ़्त यातायात जैसी सुविधाएँ मिलनी चाहिए. केरल स्मॉल मैन एसोसिएशन के अशोकन ने कहा, "हम अपने क़द की वजह से भेदभाव के शिकार होते हैं, हर जगह हम पीछे रह जाते हैं, हमें सामाजिक रूप से स्वीकार किए जाने की ज़रूरत है." सिर्फ़ केरल राज्य में 500 से अधिक लोग ऐसे हैं जिनका क़द औसत से बहुत कम है. माँग एसोसिएशन के बालकृष्ण करासिरी का कहना है कि "बौने लोगों को विकलांग की श्रेणी में रखा जाना चाहिए." करासिरी ने कहा, "हमें हर जगह बच्चे की तरह देखा जाता है लेकिन हम अपनी बात कहने में सक्षम हैं." बीए तक पढ़ाई कर चुके थॉमस जोसेफ़ कहते हैं, "यह तो मानवाधिकार का मामला है, हमारी गंभीर समस्याएँ और ज़रूरतें हैं. समय आ गया है कि जब हम अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करें." थॉमस कहते हैं, "हमारे साथ ख़ास तौर पर नौकरी के मामले में भेदभाव होता है, कई बार मुझे योग्यता के बावजूद नौकरी नहीं दी गई." इस संगठन के एक अन्य सदस्य मुबाश कहते हैं, "हम लोगों का दिल बहलाते हैं लेकिन कोई हमारे दिल के हाल के बारे में नहीं सोचता, पहले हम सर्कस में काम कर लेते थे लेकिन अब वह धंधा भी ठप पड़ गया है." इन लोगों को विशेष दर्जा दिए जाने के बारे में पूछे जाने पर राज्य के एक विधायक पीटी थॉमस ने बताया, "उन्हीं लोगों को विकलांग का दर्जा मिल सकता है जिनका शरीर 40 प्रतिशत तक अक्षम हो. विकलांगों की सूची में बौने लोगों को लाने के लिए सरकार को क़ानून में संशोधन करना होगा." ऐसा नहीं है कि केरल में कम क़द के लोगों की बड़ी तादाद हो, इसी राज्य में केरल टॉल मेन एसोसिएशन भी है जिसके 600 से अधिक सदस्य हैं. |
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