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सोमवार, 21 फ़रवरी, 2005 को 20:39 GMT तक के समाचार
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'लंबे बच्चे ज़्यादा कमाते हैं'
शिशु
अध्ययन के अनुसार पहले साल का विकास शिशुओं के लिए बहुत अहम होता है.
एक शोध के अनुसार जो बच्चे अपने पहले जन्मदिन पर ज़्यादा लंबे होते हैं, भविष्य में उनकी ज़्यादा आमदनी होने की संभावना होती है.

चार हज़ार, छह सौ तीस लड़कों पर हुए एक अध्ययन से ये पता चला कि अधेड़ उम्र के जो आदमी पहले जन्मदिन पर 80 सेंटीमीटर लंबे थे, वो 72 सेंटीमीटर या उससे कम लम्बाई वाले आदमियों के मुक़ाबले अब पचास फ़ीसदी ज़्यादा कमा रहे हैं.

चाईल्डहुड जर्नल के आर्काईव ऑफ डिज़ीज़ में कहा गया है कि सामाजिक पृष्ठभूमि ध्यान में लेकर शोध करने पर ये पाया गया कि हर दो सेंटीमीटर पर 3.5 फीसदी आय की बढ़त मानी जा सकती है.

साथ ही कम लंबे बच्चे आगे चलकर शारीरिक क्षमता वाले कार्यों में ज्यादा संलग्न पाए गए.

72 सेंटीमीटर या उससे कम लम्बाई वाले 44 फ़ीसदी बच्चे आगे चलकर मजदूरी करने लगे, जबकि इससे लंबे बच्चों में पाँच में से केवल एक ही मज़दूरी कर रहा था.

 इस अध्ययन के बाद लोगों को ये अहसास हो जाएगा कि बच्चे के विकास के लिए पहला साल कितना अहम होता है.
प्रोफ़ेसर डेविड बार्कर

1934 से 1944 के बीच फ़िनलैंड में जन्मे लड़कों की 1990 में क्या आय थी? इस बारे में जानकारी के आधार पर ये अध्ययन किया गया. इस दौरान की ज़्यादातर लड़कियाँ घर में ही रहती थी, इसलिए उनको इसमें शामिल नहीं किया गया.

इससे पहले कई अध्ययनों में बचपन में हुए विकास को भविष्य में सफलता से जोड़कर देखा गया था. लेकिन इनमें ज़्यादातर स्कूल जाने वाले बच्चों को रिसर्च में रखा गया था.

साउथेम्पटन विश्वविद्यालय और फिनलैंड नेशनल पब्लिक हेल्थ इंस्टीट्यूट इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि पहले साल में हुए विकास से ही भविष्य में कमाने की क्षमता का पता चल सकता है.

इससे ये भी स्पष्ट हुआ कि जो बच्चे धीरे बढ़ते हैं, पढ़ाई-लिखाई में भी वो साधारण ही रहते हैं. अध्ययनकर्ताओं का मानना है कि ऐसा शायद इसलिए है कि शारीरिक विकास कम होने से मानसिक विकास भी धीरे होता है.

रिपोर्ट पेश करने वाले प्रोफेसर डेविड बार्कर कहते हैं कि उन्हें उम्मीद है कि इस अध्ययन के बाद लोगों को ये अहसास हो जाएगा कि बच्चे के विकास के लिए पहला साल कितना अहम होता है.

लंदन के बिरबिक कॉलेज में मानव विकास के प्रोफेसर एडवर्ड मेलुइश भी मानते हैं कि बच्चे का विकास उसका भविष्य निर्धारित करता है. लेकिन साथ ही उनका ये भी मानना है कि इसे सामाजिक पृष्ठभूमि से अलग करके नहीं देखा जा सकता.

वो कहते हैं, "ज़्यादातर ऊँचे तबके से आने वाले लोग निचले तबके के लोगों से ज़्यादा लंबे होते हैं."

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