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लंबा क़द, परेशानी बेहद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कद सात फ़ुट आठ इंच, वज़न एक सौ दस किलो, पैरों में अठारह नंबर के जूते और पैंट-शर्ट के लिए चाहिए छह मीटर कपड़ा. यही पहचान है भारत के सबसे लंबे और एशिया में दूसरा स्थान रखने का दावा करने वाले बिहार के सारण ज़िले के मूल निवासी 34 वर्षीय जितेंद्र सिंह की. अपने इन दावों के समर्थन में हालाँकि उनके पास कोई अधिकृत प्रमाण नहीं है. जितेंद्र की असाधारण लंबाई ने जहाँ उन्हें कई परेशानियों में डाल रखा है, वहीं उन्हें इससे कुछ फ़ायदे भी मिले हैं. जितेंद्र का बचपन कोलकाता में बीता और इस समय वह झारखंड के जमशेदपुर में किराये के एक मकान में रह रहे हैं. अपने असामान्य क़द पर लोगों की प्रतिक्रिया के बारे में जितेंद्र कहते हैं, "घर से निकलने पर देखने वालों की भीड़ लग जाती है, तो कहीं ट्रैफ़िक जाम हो जाता है. टैक्सी स्टैंड हो या बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन हो या सिनेमा हॉल- जनता मुझे घेर लेती है." अपनी परेशानियों के बारे में उन्होंने कहा कि किसी विशेष उत्सव या विवाह समारोह में वह नहीं जा सकते और किसी इमरजेंसी में कहीं पहुँचना हो तो वह जल्दी पहुँच नहीं पाते. जितेंद्र ने बताया कि ऑटो, कार और बस में बैठने में उन्हें बहुत दिक़्क़त होती है. उन्होंने कहा, "रेडीमेड शर्ट-पैंट और जूते नहीं मिलते. ये सब स्पेशल ऑर्डर पर ही बनाए जाते हैं." विशेष जूते जितेंद्र ने कहा कि उनके पैरों में 18 नंबर के जूते आते हैं जो बाटा कंपनी तैयार कर उन्हें रियायती दर पर देती है.
उन्होंने कहा, "पैंट-शर्ट के लिए छह मीटर कपड़ा लगता है और दर्जी को टूल पर खड़ा होकर नाप लेना होता है." जितेंद्र को नींद तो आम लोगों की तरह ही आती है लेकिन उनके सोने के लिए दो पलंगों को जोड़कर व्यवस्था करनी होती है. घरों के दरवाज़े से होकर आने-जाने में भी उन्हें सिर को बचाकर चलना पड़ता है. उन्होंने कहा, "जब मैं 11 साल का था तो अचानक मेरी लंबाई बढ़ने लगी और स्कूल में छात्रों की शरारत के कारण पढ़ाई छोड़नी पड़ी." कोलकाता में 1997 में हुए एक वाक़ये का ज़िक्र करते हुए जितेंद्र कहते हैं कि कैसे बड़ा बाज़ार में घूमते हुए उन्हें भीड़ ने घेर लिया और लोगों की टिप्पणियों से क्षुब्ध होकर उन्होंने एक व्यक्ति की पिटाई कर डाली. इसके विरोध में वहाँ भीड़ रोड़ेबाज़ी पर उतर आई, ट्रैफ़िक जाम हो गया और पुलिस ने हस्तक्षेप कर उन्हें हावड़ा स्टेशन तक पहुँचाया. उन्हें यात्रा छोड़ जमशेदपुर वापस लौट जाना पड़ा. फ़ायदा लेकिन असाधारण लंबाई से उन्हें फ़ायदा भी हुआ है क्योंकि इसी कारण उन्होंने बास्केटबॉल खेलना शुरू किया. खेल में राष्ट्रीय पहचान मिलने के बाद टाटा स्टील प्लांट में उन्हें जे-3 रैंक में नौकरी मिली, हालाँकि आठ साल बाद उनकी नौकरी छूट गई. चार भाइयों और एक बहन के बीच सिर्फ़ जितेन्द्र का क़द ही असामान्य है. जितेंद्र की शादी 1995 में अंजू के साथ हुई, और संयोग से वह औसत से ज़्यादा लंबी यानी पाँच फ़ुट दस इंच की हैं. अंजू कहती हैं, "सपने में भी मैंने नहीं सोचा था कि भारत के सबसे लंबे व्यक्ति मेरे पति होंगे. मैं अपने को सौभाग्यशाली मानती हूँ." जितेन्द्र और अंजू के तीन बच्चे हैं. फ़िल्म देखने के शौकीन जितेंद्र अमिताभ और ऐश्वर्या के प्रशंसक हैं. मीडिया, व्यवस्था और नेताओं से उन्हें नाराज़गी है कि कोई उनकी सुध नहीं लेता. उन्होंने कहा कि नौकरी के लिए वह कई अधिकारियों के पास गए. सबने उनके साथ तस्वीरें खिंचवाई और आश्वासन दिए, लेकिन हुआ कुछ नहीं. |
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