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सोमवार, 07 नवंबर, 2005 को 09:38 GMT तक के समाचार
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केरल में भी है एक मॉस्को

मॉस्को
50 साल पहले कम्युनिस्ट विचारधारा के प्रभाव में मड्डनपल्ली पंचायत के इस गाँव का नाम मॉस्को रखा गया.
मॉस्को का नाम सुनते ही दिमाग़ में रूस की राजधानी मॉस्को का ख़्याल आता है. लेकिन जिस मॉस्को की बात हम कर रहे हैं वो रूस की राजधानी से भिन्न है.

यहाँ तापमान आमतौर पर 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है और यहाँ बड़ी संख्या में रबर के पेड़ उगाए जाते हैं. यह है केरल के कोट्टायम ज़िले का मॉस्को गाँव.

50 साल पहले कम्युनिस्ट विचारधारा के प्रभाव में मड्डनपल्ली पंचायत के इस गाँव का नाम मॉस्को रखा गया.

आज रूस में कम्युनिस्ट भले ही कमज़ोर हुए हैं लेकिन केरल में इस विचारधारा का व्यापक प्रभाव है.

तिरूवनंतपुरम स्थित रूसी सांस्कृतिक केंद्र ने कोट्टायम के मॉस्को गाँव में एक कार्यक्रम किया जिसमें भाग लेगे के लिए छह लेनिन पहुँचे.

दो गगारिन और साथ ही एक ब्रेज़नेव और ख्रुश्चेव. गोर्बाच्येव का सबने बेसब्री से इंतज़ार किया लेकिन वो नहीं आए.

प्रेरणा

रूसी नेताओं के नाम इनको इनके कम्युनिस्ट विचारधारा से प्रेरित माता-पिता ने दिए.

कुछ को बचपन में ऐसे नाम अच्छे नहीं लगे मगर बड़े होकर अब वे इन नामों की विशेषता जान गए हैं.

महान रूसी लेखक पुश्किन के नाम पर वीजी पुश्किन का नाम रखा गया.

 जब मैं छोटा था तब मेरे दोस्त मेरा मज़ाक बनाते थे क्योंकि मेरा मलयाली नाम नहीं था. आज मैं इसकी विशेषता समझता हूँ. मैं एक बैंक में काम करता हूँ और हमारे बैंक के 25 हज़ार कर्मचारियों में मेरी अलग ही पहचान है
वीजी पुश्किन

वह बताते हैं, "जब मैं छोटा था तब मेरे दोस्त मेरा मज़ाक बनाते थे क्योंकि मेरा मलयाली नाम नहीं था. आज मैं इसकी विशेषता समझता हूँ. मैं एक बैंक में काम करता हूँ और हमारे बैंक के 25 हज़ार कर्मचारियों में मेरी अलग ही पहचान है."

पुश्किन का कम्युनिस्ट विचारधारा से कोई लगाव नहीं है लेकिन 25 वर्षीय लेनिन का अवश्य है. उसके पिता मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य है.

आजकल लेनिन क़ानून की पढ़ाई ख़त्म करके समाज सेवा में मास्टर की पढ़ाई कर रहा है.

लेनिन बताते हैं, "यह नाम अद्भुत है. मैं राज्य की हैंडबॉल टीम का सदस्य भी हूँ. देश भर में बहुत घूमा लेकिन मैंने दूसरा लेनिन नहीं पाया."

ऐसे अधिकतर लोग 1960 से 1980 के बीच पैदा हुए थे. दुनिया में सोवियत रूस का दबदबा था. रूसी राजनेताओं के नाम अपने बच्चों को देकर कम्युनिस्ट विचारधारा के समर्थकों ने सोवियत रूस के प्रति अपना समर्थन जताया.

नाम के नाम

लेकिन ख्रुश्चेव, जो राज्य परिवहन की एक बस के चालक हैं, का कहना है कि उनका परिवार काँग्रेस समर्थक है.

मॉस्को
वामपंथी विचारधारा और रूस से प्रभावित माता-पिता ने अपने बच्चों को ऐसे नाम दिए

उनके पड़ोसियों ने उन्हें यह नाम दिया और माता पिता ने स्वीकार कर लिया. ख्रुश्चेव कहते हैं कि ऐसे नाम से कोई उनके धर्म और जाति का अंदाज़ नहीं लगा सकता.

यह बात सही है लेकिन क्या उन्होंने अपने बच्चों को ऐसे नाम दिए, इस बाबत ख्रुश्चेव बताते हैं कि उनकी पत्नी कृष्ण भक्त हैं और उन्होंने अपने बच्चों को हिंदू नाम दिए हैं.

इसी तरह पुश्किन भी अपने नाम की विशेषता खूब समझते हैं, लेकिन उन्होंने अपनी लड़कियों को लक्ष्मी और रेशमा नाम दिए.

पश्चिम बंगाल के साथ केरल ही एक ऐसा राज्य है जहाँ वामपंथियों का व्यापक प्रभाव है लेकिन सोवियत रूस के विघटन के बाद से रूसी नामों की लोकप्रियता कुछ घटी है.

अब रूसी राजनेताओं के नाम कम ही लोग अपने बच्चों को देते हैं. अलेक्ज़ेंडर, नताशा और नतालिया जैसे नाम तो दे देंगे मगर लेनिन और स्टालिन नहीं.

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