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केरल के किसान बनाम कोका कोला-3 | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केरल के कोका कोला प्लांट से निकलने वाले कचरे और पानी की ख़राब हालत पर छह महीने पहले बीबीसी ने जो कार्यक्रम पेश किया उसके बाद यह मुद्दा भारतीय संसद तक में उठा. इस मुद्दे पर पर्यावरणवादी भी आगे आए. मेनका गाँधी पर्यावरण के क्षेत्र में सक्रिय हैं जो भारत सरकार की सामाजिक न्याय और पर्यावरण मंत्री भी रह चुकी हैं. मेनका गाँधी कहती हैं, "यह ज़रूरी है कि वे हमारे साथ आदमी की तरह बर्ताव करें. लेकिन उन्होंने क्या किया कि स्थानीय किसानों के भोलेपन का नाजायज़ फ़ायदा उठाया. कोका कोला ने यह कहाँ सोचा होगा कि बीबीसी यहाँ आकर उनका पर्दाफाश कर देगा." रिपोर्टर: हम हाल ही में उसी प्लांट पर फिर गए और देखा कि अब भी वहाँ खेतों में कोका कोला प्लांट से निकलने वाले कचरे के बड़े-बड़े बोरे पड़े हुए हैं. मतलब ये कि समस्या अभी पूरी तरह ख़त्म नहीं हुई है. आप इस बारे में क्या सोचती हैं? मेनका गाँधी: मैं समझती हूँ कि हमें इस मुद्दे को उठाते रहना चाहिए और उनके उत्पादों का बहिष्कार करना चाहिए. और यह तब तक जारी रहे जब तक कि वे मुआवज़ा ना दे दें." "जो भी नुक़सान हुआ है उसकी भरपाई करे, खेतों की सफाई कराएं, किसानों को मुआवज़ा दें, तभी हम समझ सकते हैं कि उन्होंने कुछ सुधार किया है." मुद्दा यहीं ख़त्म नहीं होता. केरल के कोका कोला प्लांट से निकलने वाले कचरे का क्या कुछ हो रहा है यह जानने के लिए बीबीसी टीम ने प्लांट के अंदर जाने की काफ़ी कोशिश की लेकिन उसे अंदर जाने की इजाज़त नहीं दी गई. तब बीबीसी रिपोर्टर जॉन वेट ने कोका कोला इंडिया के प्रसिडेंट संजीव गुप्ता से जानना चाहा कि बीबीसी के पिछले कार्यक्रम के बाद कंपनी ने क्या सुधार किए हैं. संजीव गुप्ता: हमने आपके कार्यक्रम और इसने जो मुद्दे उठाए उन्हें बड़ी गंभीरता से लिया. हमने हमारे प्लांट से निकलने वाले कचरे को खेतों में डालना बंद किया. "हमने सभी प्लांटों में इस कचरे का फिर से परीक्षण कराया और अपने आँकड़ों में सुधार भी किया. इस तरह विज्ञान हमारे साथ है लेकिन मैं अपने आँकड़े आपको नहीं बता सकता." रिपोर्टर: मिस्टर गुप्ता, आप जानते ही हैं कि हमारे कार्यक्रम में जो निष्कर्ष पेश किए गए थे उनकी पुष्टि कुछ ही दिन बाद हो गई थी जब केरल के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्लांट से कुछ सैंपल लिए थे और आपके प्लांट के कचरे में सीसे और कैडमियम के तत्व पाए गए थे. संजीव गुप्ता: मैं इस वक़्त यह बताना चाहूँगा कि केरल में हम लंबे समय तक रहने वाली कंपनी हैं और हम एक आदर्श नागरिक या ज़िम्मेदार नागरिक रहे हैं. मैं यह भी कहना चाहूँगा कि आपकी चिंताएं महत्वपूर्ण हैं इसलिए हम उन्हें गंभीरता से लेते हैं. "हमने आपके कार्यक्रम के बाद पूरे देश में अपने प्लांटों से निकलने वाला कचरा खेतों में डालना बंद कर दिया. इसलिए हम इसके बारे में कोई बहस नहीं कर सकते." रिपोर्टर: लेकिन केरल के प्लेकिमादा में आप इसे पिछले तीन साल से खेतों में डाल रहे थे. संजीव गुप्ता: सर, मैं यह कहना चाहूँगा कि हम विभिन्न प्रदूषण बोर्डों के साथ मिलकर काम करते हैं उनमें से कुछ ने कहा है कि यह कचरा ख़राब नहीं है. लेकिन फिर भी हमने इसके बारे में चिंताओं को गंभीरता से लिया है और पूरे देश में इसे ख़तरनाक़ समझा है. रिपोर्टर: अच्छा, मान लिया, आप कहते हैं कि आप इन चिंताओं को गंभीरता से ले रहे हैं लेकिन अगर बीबीसी का कार्यक्रम प्रसारित नहीं होता तो आप यह कचरा उसी तरह खेतों में डालना जारी रखते. संजीव गुप्ता: मैं मानता हूँ कि मेरे ख़याल में बीबीसी ने अच्छे मुद्दे की तरफ़ ध्यान दिलाया. मैं मानता हूँ कि बीबीसी केरल में हमारी और मदद कर सकता है. "मैं यह भी कहूँगा कि हमारे पास एक ठोस कार्यक्रम है और इसे लागू करने और केरल के पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने में योगदान की इच्छा शक्ति भी." "मगर हमें अपना संदेश लोगों तक पहुँचाने में मुश्किल होती है क्योंकि कोका कोला को एक पूंजीवादी कंपनी मान लिया जाता है. अगर मार्क्सवादियों के शब्दों में कहें तो उनका नारा है - "कोका कोला को भारत से बाहर निकालो." रिपोर्टर: तो आप कहते हैं कि यह सब एक राजनीति का हिस्सा है. यह पर्यावरण प्रदूषण का मुद्दा नहीं है. यह सिर्फ़ राजनीति है. संजीव गुप्ता: नहीं. मैं सोचता हूँ कि यह पर्यावरण के लिए ठोस योगदान करने का मुद्दा है. रिपोर्टर: लेकिन मिस्टर गुप्ता, क्या कोई ज़िम्मेदार कंपनी ऐसा करेगी कि अपने कचरे की पर्याप्त जाँच कराए बिना ही, किसानों को यह भरोसा दिला दे कि यह खाद है. संजीव गुप्ता: लेकिन हमने उसकी जांच कराई है, हम इस पर बहस कर सकते हैं कि हमारा विज्ञान और हमारे आँकड़े सही हैं. रिपोर्टर: लेकिन क्या आप जानते थे मिस्टर गुप्ता कि आपके कचरे में सीसा और कैडमियम जैसे ज़हरीले पदार्थ थे. संजीव गुप्ता: हमने पूरे देश में अपने प्लांटों के कचरे की जाँच और परीक्षण कराए हैं जिनसे पता चलता है कि इन पदार्थों की मात्रा सुरक्षित सीमा के दायरे में थी और इन्हें खेतीबाड़ी में इस्तेमाल किया जा सकता है. रिपोर्टर: मिस्टर गुप्ता, आपने कितना कचरा साफ़ कराया है. संजीव गुप्ता: मेरा ख़याल है कि जिस किसान ने भी हमसे इसे साफ़ करने को कहा हमने उसे खेतों से उठवाकर वापस अपने प्लांट में रखवा दिया है. हमने इसे साफ़ करके अपने प्लांट में रख लिया है. रिपोर्टर: केरल में अपने प्लांट में अगर यह कचरा इकटठा कर रहे हैं तो आगे इसका क्या होगा. मेरा मतलब है कि इसे इसी तरह तो प्लांट में इकट्ठा नहीं किया जा सकता. फिर इसका क्या होगा. संजीव गुप्ता: हम इसे ऐसी जगह फेंक सकते हैं जहां फेंकने की इजाज़त हो. यह भी किया जा सकता है कि इसमें मौजूद धातुओं का स्तर कम करने के लिए कुछ परीक्षण किए जाएं. इस तरह हम विभिन्न विकल्पों पर काम कर रहे हैं. "अगली बार जब आप केरल या भारत में होंगे तो हम आपको वहाँ ले जाएंगे और यह दिखाने में हमें ख़ुशी होगी कि हम क्या कर रहे हैं." रिपोर्टर: मिस्टर गुप्ता, मैं तो इसी बार प्लांट के अंदर जाकर देखना चाहता था लेकिन मुझे अंदर ही नहीं जाने दिया गया. संजीव गुप्ता: मैं इसके लिए आपसे माफ़ी माँगता हूँ लेकिन वादा करता हूँ कि अगली बार ऐसा नहीं होगा. "मेरा ख़याल है कि आपने पिछली बार हमारा जो इंटरव्यू किया था उसके बाद हम इस बार आपसे कुछ डरे हुए थे. लेकिन मैं माफ़ी माँगता हूँ. हमारी मंशा तो यही है कि हमारा प्लांट पूरी तरह खुला है." तो ये थे कुछ सवाल जिनके जवाब दे रहे थे भारत में कोका कोला कंपनी के प्रेसिडेंट संजीव गुप्ता. सवाल यह भी रह जाता है कि केरल का कोका कोला प्लांट कितने दिन के लिए इस तरह खुला रहता है. केरल हाई कोर्ट ने यह फ़ैसला भी सुना दिया कि कोका कोला प्लांट अपनी जल आपूर्ति के लिए कुछ और विकल्प तलाशे. और 17 फ़रवरी 2004 को राज्य सरकार ने ये आदेश भी जारी कर दिए हैं कि कोका कोला कंपनी पालक्कड़ ज़िले में अपने प्लांट के लिए इलाक़े से पानी नहीं निकाल सकती क्योंकि इससे सूखे का ख़तरा पैदा हो गया है. |
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