| "शीतलपेयों में कीटनाशकों की रिपोर्ट सही" | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में शीतल पेयों में रसायन होने के आरोपों की जाँच करने वाली 5 सदस्यों वाली संयुक्त संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट संसद में रख दी है. रिपोर्ट में एक ग़ैर सरकारी पर्यावरणवादी संगठन सेंटर फॉर साइंस एंड एनवॉयरनमेंट (सीएसई) के इन नतीजों को सही बताया गया है कि कोका कोला और पेप्सी के पेयों में ख़तरनाक रसायन मिले होते हैं. समिति के एक सदस्य संजय निरूपम ने बीबीसी को बताया, "समिति ने पहली बड़ी सिफ़ारिश यही की है कि कोका कोला और पेप्सी के शीतल पेयों में ज़हरीले रसायन होने की सीएसई की रिपोर्ट सही है." सेंटर फॉर साइंस एंड एनवॉयरनमेंट (सीएसई) ने पिछले साल अपनी रिपोर्ट में कहा था कि दिल्ली में पेप्सी और कोका कोला सहित विभिन्न शीतल पेयों की बोतलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित मात्रा से ज़्यादा कीटनाशक पाए गए जो बहुत ख़तरनाक हैं. रिपोर्ट में कहा गया था कि अगर इन कीटनाशकों का लंबे समय तक सेवन किया जाए तो इनसे कैंसर, रोग प्रतिरोधक क्षमता में गड़बड़ी, प्रजनन संबंधी बीमारियाँ और मस्तिष्क को भी नुक़सान होने का ख़तरा रहता है. लेकिन कोका कोला और पेप्सी दोनों ही कंपनियाँ दावे करती रही हैं कि उनके उत्पाद बिल्कुल सुरक्षित हैं. सीएसई की निदेशक सुनीता नारायण ने समिति की रिपोर्ट पर प्रसन्नता व्यक्त की है. "इससे हमारी चिंता सही साबित हुई है और यह मुद्दा भी उजागर हुआ है कि लोगों का स्वास्थ्य खाद्य सुरक्षा देश के लिए एक प्रमुख मुद्दा है." बड़ा तूल सीएसई की रिपोर्ट के नतीजों पर देश के विभिन्न भागों में प्रतिक्रिया हुई थी और कुछ राज्य सरकारों ने इन शीतल पेयों में कीटनाशक होने के आरोपों की स्वतंत्र जाँच के आदेश दिए थे. भारतीय संसद के परिसर में इन शीतल पेयों की बिक्री पर रोक लगा दी गई थी और रक्षा मंत्रालय ने भी तमाम विभागीय कैंटीनों में इनकी बिक्री पर रोक लगाने के आदेश जारी किए थे.
इस रिपोर्ट के निष्कर्षों का खंडन करते हुए पेप्सी और कोका कोला ने उन्हें न्यायालय में चुनौती दी थी और इस विवाद ने काफ़ी तूल पकड़ लिया था. पूरे मामले की जाँच के लिए पिछले साल अगस्त में एक संयुक्त संसदीय समिति गठित की गई जिसने बुधवार को अपनी रिपोर्ट संसद में पेश कर दी. समिति ने कोका कोला और पेप्सी के 12 उत्पादों के तीन-तीन नमूने लेकर उनकी विभिन्न प्रयोगशालाओं में जाँच कराई. समिति के एक सदस्य संजय निरूपम ने बीबीसी को बताया कि समिति ने विभिन्न प्रयोगशालाओं में कोका कोला और पेप्सी के शीतलपेयों में ज़हरीले रसायन होने की सीएसई की रिपोर्ट सही निकली. "अलबत्ता इन शीतलपेयों में इन ज़हरीले रसायनों की मात्रा के बारे में विभिन्न प्रयोगशालाओं की राय कुछ अलग-अलग थी और उसकी वजह ये रही होगी कि सेंपल और प्रयोग करने के वातावरण वग़ैरा में कुछ बदलाव हो जाता है." समिति ने सरकार से सिफ़ारिश की है कि शीतलपेयों के मानक निर्धारित करने के लिए क़ानून बनाए जाएं ताकि इन से स्वास्थ्य को कोई ख़तरा नहीं रहे. |
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