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मंगलवार, 04 दिसंबर, 2007 को 22:44 GMT तक के समाचार
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राम मंदिर आंदोलन से जुड़े पाठ पर विवाद

किताब का पन्ना
राम मंदिर आंदोलन और कार सेवकों के पाठ पढ़ाए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है
राजस्थान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबंधित स्कूलों में राम मंदिर आंदोलन और कार सेवकों के बारे में पाठ पढ़ाए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है.

मुस्लिम संगठनों और मानव अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस पर कारवाई की माँग की है. लेकिन आएसएस ने इन पाठ्य पुस्तकों को उचित बताया है.

राज्य मे विद्या भारती से संबंधित सैकडों स्कूलों में नैतिक शिक्षा की पुस्तक 'संस्कार सौरभ' में अयोध्या राम मन्दिर आंदोलन के बारे में बताया गया है.

इसमें राजस्थान के दो युवकों शरद और रामकुमार कोठारी का भी उल्लेख है, जो कार सेवा के लिए अयोध्या गए थे.

पुस्तक के मुताबिक इन दोनों की 1990 को अयोध्या मे पुलिस गोली से मौत हो गई थी.

इस पुस्तक मे 'अनूठा बलिदान' नाम के पाठ में कोठारी बंधुओं को अमर बलिदानी और वीर बताया गया है. पुस्तक कहती है की ये दोनों आरएसएस की शाखाओं में जाते थे.

राजस्थान विश्वविद्यालय के डॉक्टर राजीव गुप्ता कहते है," ये बहुत ही आपत्तिजनक है क्योंकि ये पाठ्य पुस्तकें सांप्रदायिक विचारों को फैलाने वाली है. इन पुस्तको की सामग्री का नज़रिया वैज्ञानिक नही है."

हैरत की बात ये है कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों को इन पुस्तकों के बारे में पता है, फिर भी वे चुप हैं.

विवाद

कई लोगों ने कार सेवकों के बारे में पढ़ाए जाने का विरोध किया है

उधर आरएसएस के प्रवक्ता कन्हिया लाल चतुर्वेदी कहते है कि पुस्तकों में कुछ भी ग़लत नहीं है.

वो कहते हैं, ''अयोध्या का मंदिर आंदोलन एक राष्ट्रीय आंदोलन था, इसमें शहीद हुए लोग बलिदानी थे, उन्हें याद करना कैसे ग़लत हो सकता है. वे नायक थे. "

जमाते इस्लामी के सलीम इंजीनियर कहते है, " ये पुस्तकें न केवल संविधान के विरुद्ध हैं, बल्कि ये हमारे धर्मनिरपेक्षता पर भी प्रहार है. हम सरकार से माँग करते है कि तुरंत इन स्कूलों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करे."

मानव अधिकार कार्यकर्ता कविता श्रीवास्तव कहती हैं, "कार सेवकों को शहीद बताना भगत सिंह जैसे महान शहीदों का अपमान है.ये पुस्तकें बच्चों में घृणा का भाव पैदा करेंगी. "

राज्य में इन स्कूलों में लाखों विद्यार्थी पढ़ते है. बच्चे का मन कोरी स्लेट होता है. लेकिन इस स्लेट पर हर कोई अपने विचारों की इबारत लिख कर राजनीति की इमारत खड़ी करना चाहता है- ऐसे में अबोध बच्चे क्या करें?

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