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मीट टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रम का विरोध | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय यानी इग्नू को 'मीट टेक्नोलॉजी' का पाठ्यक्रम जैन और हिंदू संतों के विरोध के मद्देनज़र स्थगित करना पड़ सकता है. मांस उत्पादन के क्षेत्र में प्रशिक्षण देने वाला यह पाठ्यक्रम राज्य के जबलपुर और महू पशु चिकित्सा महाविद्यालयों में जुलाई से शुरू किया जाना था लेकिन जैन और हिंदू समाज के कुछ लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है. यूनिवर्सिटी के क्षेत्रीय निदेशक केएस तिवारी का कहना है कि पिछले एक माह के दौरान उन्हें दर्जनों ऐसी चिट्ठियाँ भेजी गई हैं जिसमें मांसाहार को भारतीय सभ्यता, संस्कृति, परंपरा और खानपान की आदतों के विरुद्ध बताकर मध्य प्रदेश में मीट टेक्नोलॉजी डिप्लोमा कोर्स शुरु न किए जाने की माँग की गई है. क्षेत्रीय कार्यालय ने इन चिट्ठियों को दिल्ली स्थित मुख्यालय में भेज दिया है जो जबलपुर और महू विश्वविद्यालयों से सलाह मशविरा कर इस पर निर्णय लेगा. विरोध ‘गाँधी के देश में हिंसा नहीं’ और ‘बूचड़खाना तकनीक बंद करो’ जैसी बात करती यह चिट्ठियाँ हालाँकि यूनिवर्सिटी अधिकारियों के नाम अलग-अलग जगहों से भेजी जा रही है लेकिन इन सबका स्रोत शायद एक ही है. प्रांतीय मुनि संत समाज के अध्यक्ष और विश्व हिंदू परिषद के पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष अमरनंद अजमेरा का कहना है कि जैन गुरु आचार्य विद्यासागर मांसाहार को बढ़ावा देने वाले इस पाठ्यक्रम के ख़िलाफ़ हैं और उनके काफ़ी शिष्यों ने इसके विरोध में इग्नू को पत्र भेजे हैं. उन्होंने कहा कि इस आंदोलन को तेज़ करने के लिए जल्द ही हिंदू और जैन संतों की एक बैठक आयोजित की जाएगी. श्री अजमेरा पूछते हैं,‘‘हम स्कूल-कॉलेजों में अपने बच्चों को पढ़ने के लिए भेजते हैं कि बूचड़ बनाने के लिए.’’ स्वयं जैन समाज से ताल्लुक रखने वाले कांग्रेस नेता हृदय मोहन का कहना है कि जब आचार्य विद्यासागर ने इस अभियान को शुरु कर दिया है तो इसे निश्चत ही अन्य साधू-संतों का भी आर्शीवाद प्राप्त हो सकता है और आंदोलन बाद में बड़ा रूप भी ले सकता है. डब्बा बंद भोजन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय इग्नू की सहायता से मीट टेक्नोलॉजी जैसे कोर्स भारत के अन्य क्षेत्रों में भी शुरू करने की योजना बना रहा है. केएस तिवारी का कहना है कि इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य मांसाहार को बढ़ावा देना बिल्कुल नहीं है बल्कि मांसाहारी प्रवृत्ति के लोगों को बेहतर गुणवत्ता वाली सामग्री उपलब्ध कराना है. | इससे जुड़ी ख़बरें बेंगालुरु के बाद अब जबालीपुरम21 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'रोज़गारोन्मुख पाठ्यक्रम बनाए जाएँ'05 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस 'लालू यादव पर अध्याय ख़त्म होगा'05 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस पाकिस्तान ने बुश समर्थक कविता हटाई05 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस '12वीं की परीक्षा समय पर हों'12 जनवरी, 2005 | भारत और पड़ोस 'वास्तुदोष के कारण विधायकों की मौतें'23 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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