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'12वीं की परीक्षा समय पर हों' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए होने वाले भ्रम और अफ़रा-तफ़री को कम करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने 12वीं की परीक्षा समय पर करवाने के निर्देश दिए हैं. ये आदेश देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए है. इसमें मेडिकल कालेजों में प्रवेश का मामला भी शामिल है. उल्लेखनीय है कि सभी राज्यों में बारहवीं की परीक्षाएँ अलग-अलग तारीखों पर होने के कारण नतीजे भी अलग-अलग तारीखों पर आते हैं और इससे कई छात्र प्रतियोगी परीक्षाओँ में शामिल होने से वंचित रह जाते हैं. कई बार इसके कारण छात्रों का साल भी ख़राब होता है. सर्वोच्च न्यायलय ने अपने फ़ैसले में कहा है कि सभी राज्यों को हर हाल में बारहवीं कक्षा की परीक्षाओं के नतीजे 10 जून तक दे देना चाहिए और सभी छात्रों को 15 जून तक अंकसूची दे देना चाहिए. न्यायमूर्ति वायके सबरवाल की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय पीठ ने मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशालय को भी निर्देश जारी किए हैं. देश भर में मेडिकल पाठ्यक्रमों में होने वाली परीक्षाओं का 15 प्रतिशत यही निदेशालय आयोजित करता है. इस निर्देश के अनुसार निदेशालय से कहा है कि वह 25 जुलाई तक मेडिकल पाठ्यक्रमों के लिए पहले दौर की काउंसिलिंग पूरी कर ले और 26 जुलाई तक रिक्त स्थानों की घोषणा कर दे. |
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