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'रोज़गारोन्मुख पाठ्यक्रम बनाए जाएँ' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफ़ेसर अरुण कुमार का कहना कि यदि विश्वविद्यालयों को भविष्य की चुनौतियों का मुक़ाबला करना है तो उन्हें अपने पाठ्यक्रमों में आमूलचूल परिवर्तन करते हुए उन्हें रोज़गारमुखी बनाना होगा. उन्होंने कहा कि पारंपरिक पाठ्यक्रमों को हमें पूरी तरह ख़ारिज करना होगा क्योंकि बाज़ार में उनकी कोई माँग नहीं रह गई है. उन्होंने कहा, "हम लोगों को नौकरी खोजने वाले नहीं देने हैं बल्कि रोज़गार के अवसर पैदा करने वालों को तैयार करना है." गोरखपुर विश्वविद्यालय इस वर्ष अपनी स्थापना की स्वर्ण जयन्ती मना रहा है. इस अवसर पर आयोजित समारोहों में बीबीसी हिन्दी ने भी एक छात्र-परिचर्चा का आयोजन किया जिसका विषय था, 'विकास एक्सप्रेस में मेरी सीट कहाँ'. बदलाव ज़रूरी इसी विषय की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कुलपति प्रो. कुमार ने कहा कि पूर्वांचल के सात ज़िलों से ही हर साल डेढ़ लाख छात्र स्नातक बन कर रोज़गार के लिए कतार मे लग जाते हैं.
प्रो. कुमार ने ज़ोर देकर कहा, "इतिहास जैसे पारंपरिक पाठ्यक्रम अपनी उपयोगिता खो देंगे यदि उनके साथ संस्कृति और पर्यटन की बातें न जोड़ी जाएँ. शेक्सपीयर और मिल्टन के साथ व्यावहारिक अंग्रेज़ी को भी पाठ्यक्रम में शामिल करना होगा." जब शिवकान्त ने उनसे पूछा कि इतने क्रांतिकारी परिवर्तनों के लिए उनके जैसे कितने कुलपति तैयार होंगे तो उन्होंने कहा कि परिवर्तन की उम्मीद शिक्षकों की नयी पीढ़ी से ही है क्योंकि पुराने और वरिष्ठ लोग इतनी तेज़ गति से परिवर्तन को स्वीकार नहीं करते. प्रो. कुमार ने कहा कि दुनिया भर में तेज़ी से हो रहे परिवर्तनों के साथ संगति बनाए रखने के लिए विश्वविद्यालयों को निरन्तर प्रयोग और परिवर्तन के लिए तैयार रहना होगा. उन्होंने कहा, "मैं इस बदलाव के लिए नई पीढ़ी के शिक्षकों का आह्वान करता हूँ." (प्रो. अरुण कुमार बीबीसी हिन्दी रेडियो की प्रातः कालीन सभा 'आज के दिन' में बीबीसी के हिंदी रेडियो संपादक शिवकांत के साथ बातचीत कर रहे थे). | इससे जुड़ी ख़बरें इकलौती कन्या को मुफ़्त शिक्षा पर रोक21 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस निजी संस्थानों में आरक्षण विधेयक पारित21 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'मदरसों पर भारतीय नीति बिल्कुल स्पष्ट' 19 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस परीक्षा-प्रणाली में बदलाव के लिए सुझाव05 जून, 2005 | भारत और पड़ोस 'छह वर्षों में भारत पूर्ण साक्षर होगा'02 सितंबर, 2004 | भारत और पड़ोस नई शिक्षा नीति पर विचार 11 अगस्त, 2004 | भारत और पड़ोस 'शिक्षा की उपेक्षा हो रही है'02 मई, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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