|
'छह वर्षों में भारत पूर्ण साक्षर होगा' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के मानव संसाधन राज्य मंत्री अली अशरफ़ फ़ातमी ने कहा है कि छह वर्षों के भीतर देश को पूर्ण साक्षर बनाने के लिए सरकार 32 हज़ार करोड़ रुपये ख़र्च करेगी. बीबीसी हिंदी सेवा से बातचीत में उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 तक छह से 14 वर्ष उम्र के सारे बच्चे स्कूलों में होंगे. फ़ातमी ने कहा, "बच्चों को पाठ्य सामग्री मुफ़्त उपलब्ध कराई जाएगी, और उन्हें स्कूलों में गर्म ताज़ा भोजन दिया जाएगा." उन्होंने कहा कि अपने सर्व शिक्षा अभियान को सफल बनाने के लिए सरकार ग़ैरसरकारी संस्थाओं का भी सहयोग लेगी. उन्होंने इस अभियान में लड़कियों, मुसलमानों, अनुसूचित जाति और जनजाति के बच्चों पर विशेष ध्यान दिए जाने की बात की.
फ़ातमी ने कहा कि शिक्षा केंद्र की मौजूदा संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार की प्राथमिकता है और इसलिए इस साल के बजट का छह प्रतिशत शिक्षा पर ख़्रर्च किया जा रहा है. शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की अन्य पहल के बारे में उन्होंने कहा, "सरकार इस साल 200 के क़रीब केंद्रीय विद्यालय और इतनी ही संख्या में नवोदय विद्यालय खोलेगी. केंद्र सरकार इसके अलावा दो से ढाई हज़ार हाई स्कूल खोलने में भी राज्य सरकारों की सहायता करेगी." फ़ातमी राष्ट्रमंडल देशों के मंत्रीस्तरीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए ब्रिटेन पहुँचे. उन्होंने कहा कि सम्मेलन में इस बात पर सहमति बनी कि राष्ट्रमंडल के सदस्यों में से विकसित देश किसी छोटे या विकासशील देश से प्रशिक्षित शिक्षकों को बुलाने से पहले वहाँ की सरकार से राय-मशविरा करेंगे. भारत में पाठ्य-पुस्तकों में पिछली सरकार द्वारा किए गए फेरबदल के बारे में फ़ातमी ने कहा कि सरकार ने इस बारे शिक्षाविदों की समिति गठित की है और उसकी अनुशंसाओं पर कार्रवाई की जाएगी. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||