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गुरुवार, 08 जुलाई, 2004 को 06:54 GMT तक के समाचार
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बजट में शिक्षा और स्वास्थ्य पर ज़ोर
पी चिदंबरम
1996 के बाद काँग्रेस की अगुआई वाली किसी सरकार का पहला बजट पेश किया चिदंबरम ने
वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने यूपीए सरकार के पहले बजट में करदाताओं को राहत दी है और इसके साथ कृषि क्षेत्रों के विकास और बुनियादी ज़रूरतों पर ध्यान देने का भी वायदा किया है.

चिदंबरम ने गुरूवार को लोकसभा में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार का पहला बजट पेश किया.

बजट भाषण की शुरूआत करते हुए चिदंबरम ने कहा कि इस वर्ष हुए आम चुनावों के नतीजे सोनिया गांधी और यूपीए सरकार के पक्ष में रहे और नई सरकार सत्ता संचालन में भी बदलाव करेगी.

1996 के बाद काँग्रेस की अगुआई वाली पहली सरकार के बजट में आर्थिक विकास की दर सात से आठ प्रतिशत रखने का लक्ष्य रखा गया है.

वित्त मंत्री ने राजस्व घाटे को 2007-2008 तक दूर करने का भी प्रस्ताव रखा.

चिदंबरम ने अपना बजट पेश करने के बाद कहा कि उनकी सरकार की यूपीए गठबंधन के साझा न्यूनतम कार्यक्रम में पूरी आस्था है और उनकी सरकार खेती और उत्पादन क्षेत्र के लिए और काम करेगी और ऐसे क़दम उठाएगी जिससे रोज़गार को बढ़ावा मिले.

उन्होंने कहा,"जिस दिन मैंने कुर्सी संभाली उसी दिन मैंने कहा था कि हमारी प्राथमिकता खेती, निर्माण क्षेत्र और रोज़गार रहेगी".

आयकर राहत

बजट में आयकर छूट की सीमा 50 हज़ार रूपए से बढ़ाकर एक लाख रूपए करने का प्रस्ताव किया गया है.

चिदंबरम ने कहा कि इस दायरे को बढ़ाने से देश के एक करोड़ 40 लाख करदाताओं को लाभ होगा.

उन्होंने बताया कि भारत में हर वर्ष तीन करोड़ 40 लाख लोग आयकर की रिटर्न दाखिल करते हैं और इनमें से दो करोड़ 70 लाख लोग कर अदा करते हैं.

वित्तमंत्री ने करों के मौजूदा ढांचे में किसी तरह का कोई परिवर्तन करने से इनकार किया.

मगर शिक्षा क्षेत्र में व्यय के लिए सभी तरह के करों पर दो प्रतिशत के अतिरिक्त सरचार्ज का प्रस्ताव किया गया है.

कृषि क्षेत्र और ग्रामीण विकास

 जिस दिन मैंने कुर्सी संभाली उसी दिन मैंने कहा था कि हमारी प्राथमिकता खेती, निर्माण क्षेत्र और रोज़गार रहेगी
पी चिदंबरम

वित्तमंत्री ने कृषि क्षेत्र में ऋण प्रवाह की दर तीन सालों के भीतर दोगुनी करने का प्रस्ताव रखा है.

उन्होंने कहा कि इस संबंध में सामुदायिक बैंकिंग या कोऑपरेटिव बैंकिंग की समीक्षा के लिए एक टास्क फ़ोर्स गठित की जाएगी.

बजट में कृषि क्षेत्र में निवेश के लिए वित्तीय प्रबंध करने पर बल दिया गया है और कृषिगत अनुसंधान और विकास के लिए 1,000 करोड़ रूपए के व्यय का भी प्रस्ताव किया गया है.

बजट में ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के लिए 2300 करोड़ रूपए दिए जाने का प्रस्ताव रखा गया है.

बिहार को पैकेज

उम्मीद के अनुसार वित्तमंत्री ने बिहार के लिए विशेष पैकेज दिए जाने का प्रस्ताव किया है.

बजट में बिहार के विकास के लिए 3225 करोड़ रूपए की सहायता दिए जाने का प्रस्ताव रखा गया है.

समझा जाता है कि केंद्र सरकार की प्रमुख घटक, रेलमंत्री लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल की माँग और अगले वर्ष के आरंभ में वहाँ होनेवाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए ये घोषणा की गई है.

अन्य राज्य

चिदंबरम ने अपने गृहप्रदेश का भी पूरा ख़याल रखा और चेन्नई में खारे पानी को साफ़ करने का देश का बड़े पैमाने का पहला प्लांट लगाने का प्रस्ताव किया.

उन्होंने कहा कि इस परियोजना में 1,000 करोड़ रूपए का ख़र्च बैठने का अनुमान है और इससे चेन्नई के 30 करोड़ निवासियों को पानी दिया जा सकेगा.

पूर्वोत्तर भारत के सात राज्यों और सिक्किम के विकास के लिए भी 5823 करोड़ रूपए के निवेश का प्रस्ताव किया गया है.

जम्मू कश्मीर की बगलिहार परियोजना के लिए 300 करोड़ रूपए का अनुदान देने का प्रस्ताव किया गया है.

शिक्षा और रोज़गार

बजट में शिक्षा क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि कि सरकार ये सुनिश्चित करेगी कि सभी बच्चों को कम-से-कम आठ साल तक शिक्षा मिले और वे भूखे ना रहें.

उन्होंने अल्पसंख्यकों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने के लिए 50 करोड़ रूपए का अतिरिक्त ख़र्च करने का प्रस्ताव रखा.

बजट में देश के छोटे पैमाने के तकनीकी संस्थानों आईटीआई यानी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों पर विशेष रूप से ध्यान देने की बात की गई है.

वित्तमंत्री ने कहा कि हर साल 100 संस्थानों की दर से अगले पाँच सालों में 500 आईटीआई संस्थानों को उन्नत करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि युवाओं को प्रशिक्षित किया जा सके.

वित्तमंत्री ने ग़रीबों के लिए और नौकरियां लाने का वादा करते हुए कहा है कि सरकार ये सुनिश्चित करना चाहती है कि हर आदमी को हर साल 100 दिन के रोज़गार की गारंटी दी जा सके.

रक्षा ख़र्च

बजट में रक्षा ख़र्च में 117 अरब रूपए की वृद्धि करने का प्रस्ताव किया गया है.

वित्तमंत्री ने अपने भाषण में रक्षा ख़र्च को पिछले वर्ष के 653 अरब रूपए से बढ़ाकर 770 अरब रूपए करने का प्रस्ताव किया.

चिदंबरम ने कहा कि रक्षा व्यय में बढ़ोतरी की ज़रूरत इसलिए पड़ी क्योंकि पिछले वर्षों में इसमें वृद्धि कम की गई थी और सशस्त्र सेना ने अपने लिए कुछ बड़ी योजनाएँ बना रखी हैं जिनके लिए धन चाहिए.

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