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नए रेलमंत्री का बजट भी पुरानी पटरियों पर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नई सरकार के नए रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने अपने पहले रेल बजट को पुरानी लीक पर बनी पटरियों पर ही दौड़ा दिया है. जिस रेल बजट को लेकर कयास लगाए जा रहे थे कि वह चमत्कारिक होगा और रेलमंत्री पुराने ढर्रे पर चल रही रेल की दिशा, दशा और गति बदल देंगे, इसका संकेत उनके बजट में दिखाई नहीं पड़ा. परिवर्तन के बीजारोपण करने का संकेत तक न दे सके रेलमंत्री ने संसद में बजट पेश करने के बाद फिर दोहराया कि वह भारतीय रेल को दुनिया की नंबर एक रेल बनाएंगे. लोकलुभावन वायदों की झड़ी के अलावा रेलबजट 2004-05 में देश के विकास और संपूर्णता में रेलवे के हितों की अनदेखी की गई है. विपक्ष के पास जवाब नहीं यात्री किराए और माल भाड़े में वृद्धि न करके और नई-पुरानी घोषणाओं को मिलाकर कुल 32 ट्रेनों को चलाने का वादा रेल बजट में करके आम जनता की वाहवाही लूट रहे लालू यादव ने एक हत तक विपक्षी दलों को भी निरूत्तर कर दिया है.
हालांकि समूचा विपक्ष आज संसद के दोनों सदनों में दाग़ी मंत्रियों के मुद्दे को लेकर उपस्थित भी नहीं हुआ, लेकिन बाहर भी उसके पास बोलने को कुछ ख़ास नहीं था. और बिहार की राजनीति का दबाव देखिए कि बड़ी होशियारी से लालू यादव ने पिछले रेल मंत्री नीतीश कुमार की योजनाओं को अपने बजट में शामिल कर लिया है. रेल बजट की ख़ासियतें देखने की कोशिश करें तो कहा जा सकता है कि लालू यादव ने अपने राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अपने जनाधार को मजबूत करने की कोशिश की है. कुछ महीनों में बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं और सबसे ज्यादा 5 ट्रेनें उन्होंने बिहार को दी हैं. शेष कुल्हड़ से कुम्हार, खादी से जुलाहा (अल्पसंख्यकों) दूध-दही से यादव, सब्जियों की आपूर्ति से कुशवाहा जातियों को संतुष्ट करने की घोषणा रेल मंत्री बनने के साथ ही लालू यादव करने लगे थे. आज जो बजट उन्होंने पेश किया उस पर नौकरशाही का पुराना तौर-तरीका ही दिखायी पड़ता है. नई योजनाओं की स्थिति कुल 273 किलोमीटर नई रेल लाइन बिछाने की घोषणा की गयी है. वह भी कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, चंडीगढ़, बिहार और महाराष्ट्र में है, जो बहुत हद तक लिंक मार्ग हैं. आमान परिवर्तन का काम भी कुछ हज़ार किलोमीटर का है जो पिछले रेल मंत्री के लेखानुदान में शामिल था. रेल मंत्री ने 43 नए रेलमार्गो के सर्वेक्षण कार्य को भी बजट में शामिल किया गया है, लेकिन आश्चर्यजनक यह है कि इसमें बीमारू राज्य, आदिवासी राज्य एव अन्य पिछड़े क्षेत्र शामिल नहीं हैं. अधिकांश सर्वेक्षण पहले से बनी लाइनों के सर्वेक्षण के लिए हैं. विलेज ऑन व्हील्स
इसमें गरीब लोग चलेंगे और तीर्थस्थलों एवं पयर्टक स्थलों पर धूमेंगे. यह ट्रेन कब कैसे और कहां चलेगी. रेल बजट इस पर खामोश है. नई ट्रेनों में 17 संपर्क क्रांति एक्सप्रेस ट्रेन की घोषणा की गई है, जो पूर्व रेलमंत्री कर चुके थे. लालू यादव ने केवल 15 नई ट्रेनें दी हैं जिसमें सिर्फ पांच बिहार के लिए हैं या उधर से गुजरेंगी. कहने को कहा जा सकता है कि बिहार को मंत्री ने ज़्यादा है, लेकिन वस्तुतः ऐसा नहीं है, क्योंकि बिहार को ही नहीं तमाम पिछड़े राज्यों को नए रेलमार्ग चाहिए, जो है ही नहीं. आम आदमी सीधे तौर पर आम आदमी के लिए रेलमंत्री ने तोहफों का पिटारा ही खोल दिया है. बेरोज़गारों को नौकरी के लिए परीक्षा देने जाते समय किराया माफ़ी के साथ गरीबों, विकलांगों और महिलाओं के लिए लालू यादव ने तमाम घोषणाएं की हैं.
रेलवे में खान-पान सेवाओं में सुधार, सफाई का रेलवे में राष्ट्रव्यापी अभियान, रेल स्टेशनों पर एच व्हीलर की पुस्तकों की दुकानों का एकाधिकार समाप्त करना, गूंगे-बहरों को और उनके सहयात्रियों को भी किराए में 50 प्रतिशत की छूट, टिकट निरीक्षक पदों पर महिलाओं की नियुक्ति जैसी अनेक घोषणाएं हैं. सुरक्षा को लेकर चिंतित रेलमंत्री ने रेल पुलिस फोर्स की कार्यकुशलता बढ़ाने तथा सुरक्षा बलों की सीधी भर्ती नियम पुनः शुरु करने की घोषणा की गई है, लेकिन लालू यादव ने बाद में एक बातचीत में कहा कि अंततः अपराध का मामला राज्य पुलिस का है और उसके सहयोग के बिना सुरक्षित रेल यात्रा संभव नहीं है. धन का जुगाड़ यात्री किराया और माल भाड़े में वृद्धि न होने और केवल पार्सल वस्तुओं पर 33 प्रतिशत की वृद्धि के बाद भी रेल की पिछली और कुछ नई रेल योजनाएं कैसे चलेंगी, इस पर बजट और खुद रेल मंत्री खामोश हैं. कहां से पैसा आएगा? लालू यादव सपाट लहजे में कहते हैं रेल को नंबर एक बनाना है, आधुनिकीकरण करना है, प्रत्येक मार्ग पर चार-चार रेल लाइन डालना है और गाड़ी का स्पीड बढ़ाना है इसके लिए पैसा चाहे जहां से आये उसका जुगाड़ करना है. रेलमंत्री बातचीत में संकेत देते हैं कि उनकी योजनाओं और खर्च का पूरा दारोमदार माल भाड़े से होने वाली आमदनी पर है. साथ रेलवे में चोरी रोक कर वह बड़ी बचत करेंगे. यह दोनों ही व्यावहारिक नहीं दिखता और फिर वे इसका जवाब वह टाल जाते हैं कि रेलवे की सिर्फ पिछली लंबित योजनाओं के लिए ही 50 हजार करोड़ रुपए का खर्च है इसका जुगाड़ वे कहाँ से करेंगे. |
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